मूत्र असंयम के लिए घरेलू उपचार

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 14, 2015

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मूत्र असंयम वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति को अपने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता, कई बार शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ता है, इसके उपचार के लिए घरेलू नुस्‍खों का प्रयोग कर सकते हैं, आइए जानते हैं उन नुस्‍खों के बारे में।
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    घरेलू उपचार से करें मूत्र असंयम का इलाज

    मूत्र असंयम वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति को अपने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता। महिलाओं में यह समस्या गर्भावस्था और शिशु के जन्म के कारण अधिक होती है। मूत्र असंयम के लिए उम्र, (मूत्राशय की मांसपेशियों बढ़ती उम्र के साथ कमजोर हो जाती हैं) या सर्जरी या डिलीवरी, बढ़े हुए प्रोस्टेट, रजोनिवृत्ति, ओवरएक्टिव ब्‍लैडर, तंत्रिका क्षति, मूत्राशय की पथरी, मूत्र मार्ग में संक्रमण और कब्‍ज के कारण पेल्विक फ्लेार की मसल्‍स कमजोर होने जैसे कई कारक जिम्‍मेदार होते हैं। इसके अलावा, कुछ खाद्य पदार्थ, पेय और दवाएं मूत्राशय को उत्तेजित कर अस्थायी असंयम का कारण हो सकते है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि कुछ प्राकृतिक उपचार की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है। आइए ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में जानते हैं।
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    कीगल एक्‍सरसाइज

    गर्भवस्‍था या डिलिवरी के एकदम बाद महिलाओं में होने वाली मूत्र असंयम की समस्‍या से कीगल एक्‍सरसाइज की मदद से काबू पाया जा सकता है। यह श्रोणि की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, जिससे असंयम को रोकने में मदद मिलती है। इसे करने के लिए अपने घुटनों को मोड़ कर आराम की स्थिति में बैठ जाए। अब आप ध्‍यान केंद्रित करके पीसी मसल्‍स को टाइट करके संकुचित करें। इसे 30 से 50 बार दोहराये। पूरी प्रकिया के दौरान स्‍वतंत्र रूप से सांस लें। इस एक्‍सरसाइज को करने के दौरान 5 सेकंड के लिए संकुचन करें और फिर 5 सेकंड के लिए आराम करें। धीरे-धीरे इस समय को बढ़ा कर 10 सेकंड कर दें। लेकिन ध्‍यान रहें कि कीगल एक्‍सरसाइज को भरे हुए ब्‍लैडर के दौरान न करें, क्‍योंकि ऐसा करना आपकी मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है और ब्‍लैडर को अधूरा खाली कर देता है।
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    मैगनीशियम

    मूत्र असंयम के इलाज के लिए मैग्‍न‍ीशियम भी आपकी मदद कर सकता है, खासतौर पर अगर आपको रात में पैर में ऐंठन जैसे मैग्‍नीशियम की कमी के लक्षणों का अनुभव होता है। मैग्‍नीशियम पूरे शरीर की मांसपेशियों को आराम देने के लिए महत्‍वपूर्ण होता है। इस प्रकार, यह मूत्राशय मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद मिलेगी और मूत्राशय पूरी तरह से खाली भी होगा। इसलिए अपने आहार में नट्स, सीड्स, केले और दही जैसे मैग्‍नीशियम युक्‍त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
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    विटामिन डी

    विटामिन डी मूत्र असंयम को नियंत्रित करने के कलए इस्‍तेमाल किया जा सकता है, क्‍योंकि यह मांसपेशियों की ताकत को बनाये रखने में मदद करता है। आब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकॉलोजी में प्रकाशित 2010 के एक अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी के उच्च स्तर के साथ महिलाओं में मूत्र असंयम सहित पेल्विक फ्लोर विकारों के विकास का जोखिम कम होता है। विटामिन डी के लिए नियमित रूप से 10 मिनट सुबह सूरज की रोशनी में रहें। इसके अलावा विटामिन डी से भरपूर आहार जैसे मछली, कस्तूरी, अंडे की जर्दी, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों को अपने आहार में शामिल करें। या अपने डॉक्‍टर की सलाह से विटामिन डी सप्‍लीमेंट लें।
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    योगा

    योगा भी कीगल एक्‍सरसाइज की तरह मांसपेशियों को कसने में मदद करता है। इसके अलावा योगा तनाव को कम करने के लिए अच्‍छा है और चिंता और मूत्र असंयम से संबंधित अवसाद को दूर करने में मदद करता है। मूत्र असंयम के लिए आप मूलबंध, उत्कटासन, त्रिकोणासन और मालासन जैसे योग कर सकते हैं। लेकिन योग करने से पहले किसी योग प्रशिक्षक की मदद लें।
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    सेब का सिरका

    एप्पल साइडर सिरका आपके स्वास्थ्य के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक के रूप में काम करता है। यह आपके शरीर के विषाक्‍त पदार्थों को हटाकर मूत्राशय में संक्रमण को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह वजन कम करने में भी आपकी मदद करता है। अधिक वजन मूत्र असंयम की समस्‍या को बढ़ा देता है क्‍योंकि कूल्हों और पेट के आस-पास अधिक फैट मूत्राशय पर अतिरिक्त दबाव डालता है। समस्‍या होने पर एक गिलास पानी में 1 से 2 चम्‍मच सेब के सिरके को मिलाये। फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 से 3 बार नियमित रूप से लें। लेकिन ध्‍यान रहें कि अगर आपका ओवरएक्टिव ब्‍लैडर है तो सेब के सिरके का सेवन न करें।
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    बुच (buchu)

    छोटी पत्‍ती बुच मूत्र प्रणाली के स्वास्थ्य में सुधार करने वाली एक महान मूत्र पथ टॉनिक है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एंटी-बैक्‍टीरियल और मूत्रवर्धक गुणों के कारण मूत्राशय संक्रमण के कारण होने वाले मूत्र असंयम के लिए विशेष रूप से लाभप्रद होता है। साथ ही, यह ऊतकों को मजबूत बनाने में मदद करता है। समस्‍या होने पर इस हर्ब की एक चम्‍मच को पानी के एक कप में मिलाकर 5 से 10 मिनट के लिए उबालें। मूत्र असंयम की समस्‍या ठीक होने तक इस पेय को नियमित रूप से कुछ दिनों तक पीयें।
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    क्लीवर

    क्लीवर एक पारंपरिक मूत्र टॉनिक है और मूत्र समस्याओं के इलाज में मदद करता है। यह विशेष रूप से सिस्टाइटिस और अतिसक्रिय मूत्राशय के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह मूत्राशय में एक आरामदायक कोटिंग के रूप में मूत्राशय में जलन के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। गर्म पानी के एक कप में इस जड़ी-बूटी की 2 से 3 चम्‍मच मिलाकर 10 से 15 मिनट के लिए रखें। फिर इस चाय को नियमित रूप से दिन में तीन पर पीयें।
    Image Source : urbanherbology.org

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