चिरायता : त्‍वचा के लिए आसान और सस्‍ता उपाय

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 30, 2016

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अगर आप त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं के लिए उपायों की खोज कर रहे हैं तो परेशान न हो हम आपके लिए चिरायता के रूप में आसान और सस्‍ता उपाय लेकर आये हैं।
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    खून साफ करें चिरायता

    हजारों सालों से चिरायता नामक जड़ी-बूटी का इस्‍तेमाल त्‍वचा संबंधी रोगों के लिए किया जाता है, क्‍योंकि इसके सेवन से रक्‍त को साफ करने में मदद मिलती है। इसके अलावा चिरायता एक एंटी-बायोटिक औषधि है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ान में मदद करती है। इसके रोजाना सेवन करने से कीटाणु नष्‍ट होते हैं और बीमारियां दूर रहती है। आयुर्वेद के अनुसार चिरायता का रस कई किस्म की बीमारियों से लड़ने में सहायक है मसलन कैंसर, ट्यूमर का विकास, सर्दी-जुखाम, रुमेटाइड अर्थराइटिस, दर्द, जोड़ों के दर्द, त्वचा सम्बंधी बीमारी, थकन, कमजोरी, मस्लस में दर्द, सेक्स सम्बंधी समस्याएं, सिरदर्द, गठिया, पाचनतंत्र सम्बंधी समस्या, लिवर सम्बंधी समस्या, संक्रमण आदि। आइए चिरायता के त्‍वचा और स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की जानकारी लेते हैं।

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    चिरायता इस्‍तेमाल का तरीका


    चिरायता बनाने का आसान और सरल उपाय है कि इसका चाय की तरह सेवन किया जाए। जिस तरह आप चाय बनाते हैं यानी सबसे पहले पानी उबालें। इसके बाद इसमें एक चम्मच चिरायता की जड़ का इस्तेमाल करें। इस मिक्सचर को तकरीबन आधा घंटे तक रखें। इसके बाद इसे छानें और चिरायता चाय का मजा लें।
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    त्वचा सम्बंधी समस्या का निदान

    एग्जीमा, फंगस, कील-मुंहासे आदि तमाम त्वचा सम्बंधी समस्याओं को चिरायता से निदान किया जा सकता है। यही नहीं इससे बैक्टीरियल इंफेक्शन को भी दूर किया जा सकता है। जिन महिलाओं को मौसम बदलने से या फिर बरसात के मौसम में मुंहासों की समस्या होती है, उन्हें आवश्यक तौर पर इसका उपयोग करना चाहिए।

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    कैंसर और ट्यूमर से बचाव

    तमाम अध्ययनों से पता चला है कि चिरायता के जड़, पत्तों, टहनी, फल में 24 किस्म के तत्व मौजूद होते हैं। ये तमाम तत्व कैंसर को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करते हैं। आस्ट्रेलिया में स्थित यूनिवर्सिटी आफ क्वीन्सलैंड में हुए अध्ययन के मुताबिक चिरायता में पांच किस्म के स्टेराइडल सैपोनिन्स होते हैं। वास्तव में यही सैपोनिन्स कैंसर से लड़ने में सहायक है। इसके अलावा इसमें कई किस्म के एंटीआक्सीडेंट एसिड, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, तेल, रसायन आदि होते हैं जो कि इस बीमारी से बचाव के जरूरी है। यही नहीं चिरायता की सेल की हो रही क्षति रोकन में भी महति भूमिका है।

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    सर्दी-जुखाम

    यह इसका सबसे आम और सर्वविदित गुण है। तमाम जड़ी बूटियों की तरह चिरायता भी सर्दी-जुखाम से लड़ने में सहायक है। इसका सेवन कोई भी कर सकता है। जिन लोगों को ठंड लगने की शिकायत होती है खासकर उन्हें जिन्हें सर्दी के कारण फ्लू तक हो जाता है, उन्हें चिरायता का सेवन आवश्यक तौरपर करना चाहिए। हालांकि अकसर यह माना जाता है कि जड़ी बूटियां गंभीर बीमारियों को ठीक करने में मददगार नहीं होती। लेकिन चिरायता के साथ ऐसा नहीं है। यह रेसपिरेटरी संक्रमण को न सिर्फ ठीक करता है वरन किसी को यदि परिवार से यह बीमारी मिली है तो भी इसमें सुधार लाया जा सकता है।

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    लिवर की सुरक्षा

    चूंकि चिरायता पेशाब की स्थिति को भी बेहतर करता है। यही नहीं पसीने आने में भी यह मदद करता है। इसका मतलब साफ है कि यह लिवर के लिए लाभकारी तत्व है। यह सूजन और जलन से तो बचाता ही है। साथ पेट में हा रही तमाम किस्म की समस्याओं को भी रोकता है। इससे लिवर की सुरक्षा तो होती है साथ ही कई अन्य समस्याएं आने से पहले ही निपट जाती हैं। यह हमारे रक्त को साफ करता है और रक्त संचार को बेहतर करता है। इसके अलावा चिरायता का एक बड़ा गुण यह भी है कि रक्त से टाक्सिन को निकाल बाहार करता है। इसके अलावा यह टिश्यू को क्षति होने से रोकता है जिससे लिवर के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
    Image Source : Getty

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