हॉर्मोंस को कुदरती तौर पर कैसे करें नियंत्रित

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 15, 2014

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पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाये जाने वाले कई तरह के हॉर्मोंस में से कुछ का असर सीधे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। इसलिए इन्‍हें नियंत्रण में रखना चाहिए।
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    हार्मोंन को नियंत्रित करने के उपाय

    एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, टेस्टोस्टेरोन, थायराइड, कोर्टिसोल, इंसुलिन आदि का नाम आपने सुना होगा। ये हार्मोंस शरीर में मौजूद कोशिकाओं और ग्रन्थियों से निकलने वाले केमिकल होते हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रन्थियों पर असर डालते हैं। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारी चयापचय क्रिया, प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रजनन तंत्र, शरीर के विकास और मूड पर पड़ता है। किसी भी तरह के हॉर्मोन का तय से ज्यादा या कम मात्रा में निकलने को हॉर्मोन असंतुलन कहा जाता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाये जाने वाले कई तरह के हॉर्मोंस में से कुछ का असर सीधे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। इसलिए इन्‍हें नियंत्रण में रखना चाहिए। यहां दिए प्राकृतिक तरीकों से आप इन्‍हें नियंत्रित में रख सकते हैं।      
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    सफेद खाद्य पदार्थ से बचें

    डॉक्‍टर क्रिस्टियन हार्मोन बैलेंस फूड प्‍लान के अनुसार, हार्मोंन के संतुलन को बनाये रखने के लिए अपने भोजन में परिष्‍कृत कार्बोहाइड्रेट वाले आहार जैसे, शुगर, सफेद चावल, ब्रेड, एल्‍कोहल और सफेद आटे से बने खाद्य पदार्थ जैसे माफिन, पास्‍ता, प्रेट्जेल और अन्‍य स्‍नैक्‍स को लेने से बचें।   
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    ओमेगा -3 फैटी एसिड का सेवन

    अधिक पॉलीअनसेचुरेटेड ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन, हार्मोंन को संतुलन करने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। इसके लिए  आप मछली के तेल या शाकाहारी तेल जैसे चिया बीज, अलसी और अखरोट का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है।  
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    कमर्शियल तेलों से बचें

    कई कमर्शियल तेलों में ओमेगा-6 फैटी एसिड होता है, जो हृदय रोग और हार्मोंनल असंतुलन का कारण बनते हैं। ऐसे तेलों के सेवन से बचना चाहिए। वनस्‍पति तेल, मूंगफली तेल, कनोला तेल, सोयाबीन तेल आदि में नकली मक्खन और अन्‍य केमिकल फैट होते हैं। इनकी जगह फैट/तेल जैसे नारियल तेल और जैतून तेल को चुनें।  
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    कै‍फीन से बचें

    बहुत ज्‍यादा कैफीन पीने से नींद में खलल आता है। इससे कोर्टिसोल का स्‍तर बढ़ता और थायरॉयड का धीमा होता है। साथ ही इसका आपके पूरे शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए आप कैफीन के स्‍थान पर दिन में 1-2 बार ग्रीन या तुलसी की चाय लें। इससे हार्मोंन संतुलन होने के साथ-साथ वजन भी कम होगा और कैंसर भी आपसे दूर रहेगा।  
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    नारियल तेल और एवोकाडो का सेवन

    यह संतृप्‍त वसा के अन्‍य स्‍वस्‍थ सूत्रों में से एक है। और टेस्‍टोस्‍टेरोन या महिला हार्मोंन को बढ़ावा देने का सबसे अच्‍छा तरीका है। कोलेस्‍टॉल स्‍वस्‍थ कोशिका झिल्‍ली के गठन के लिए आवश्‍यक होता है और सभी स्‍टेरॉयड हार्मोंन (प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन, एफएसएच आदि) के लिए अग्रदूत है। हम संतृप्‍त वसा की पर्याप्‍त मात्रा के बिना उचित हार्मोनल संतुलन की कल्‍पना भी नहीं कर सकते।  
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    लेप्टिन को नियंत्रित रखें

    लेप्टिन भूख और चयापचय को नियंत्रित करने वाला एक हार्मोन है। लेकिन हम बहुत अधिक चीनी या प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थों के सेवन  और नींद की कमी के परिणामस्‍वरूप भोजन के प्रति लालसा और धीमी चयापचय का अनुभव के कारण लेप्टिन के स्‍तर में कमी पैदा कर देते हैं। इसलिए लेप्टिन के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए अनाज से भरपूर आहार, चीनी की कम मात्रा और भरपूर नींद लें।
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    विटामिन 'डी' का सेवन

    विटामिन 'डी' हमारे शरीर में एक हार्मोंन की तरह कार्य करता है और इसकी कमी से एलर्जी, अस्‍थमा, वजन बढ़ना, थकान, खाद्य एलर्जी और कैंसर की समस्‍या भी हो सकती हैं। विटामिन 'डी' प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा जरिया सूरज है, लेकिन अक्‍सर सूरज की रोशनी पर्याप्‍त नहीं होती। विटामिन डी का स्तर स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा परीक्षण किया जा सकता है, और पूरक विटामिन डी विभिन्न रूपों में पाया जा सकता है।
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    शलजम की जड़ों का सेवन

    शलजम की जड़े, हार्मोन का उत्पादन और कामेच्छा बढ़ाने में मदद करती है। इसके सेवन से पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन में वृद्धि, कामेच्छा, और बेहतर नींद जबकि कई महिलाओं पीएमएस के लक्षणों में कमी, प्रजनन, और बेहतर और स्‍वस्‍थ त्वचा नोटिस की गई। मका मिनरल और आवश्‍यक फैटी एसिड से भरपूर होने के कारण हार्मोंन के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इसका स्‍वाद बहुत अच्‍छा होता है, और यह कैप्‍सूल के रूप में भी उपलब्‍ध है।
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    फाइबर की अधिक मात्रा

    फाइबर पुराने एस्ट्रोजन से खुद को बांधने, सिस्‍टम को साफ करने और बेहतर तरीके से संतुलन बनाने में मदद करता है। एस्‍ट्रोजन के प्रभुत्‍व से पीड़ि‍त पुरुषों और महिलाओं के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इसलिए भरपूर मात्रा में फाइबर के लिए अपने आहार में कच्‍चे फल और सब्जियों को शामिल करें।
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    तनाव का प्रबंधन

    येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, सब कुछ सही करने के बावजूद भी अगर आप तनाव ग्रस्‍त है तो कोर्टिसोल का उच्‍च स्‍तर आपके सारे हार्मोंन को असंतुलन कर देगा। कोर्टिसोल का उच्‍च स्‍तर आमतौर पर वजन के साथ संघर्ष कर रहें लोगों को भी प्रभावित करता है। यहां तक कि पतले लोग भी कोर्टिसोल को लेकर चिंता महसूस करते हैं क्‍योंकि कोर्टिसोल का उच्‍च स्‍तर, पतली महिलाओं की पेट की चर्बी को बढ़ा सकता है।   
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    चेस्‍टबेरी का सेवन

    प्रोलैक्टिन का उच्‍च स्‍तर अनियमित मासिक धर्म की समस्‍या का कारण बनता है। चेस्‍टबेरी पिट्यूटरी ग्रंथि से प्रोलैक्टिन की रिहाई को दबाने का काम करती है। इसलिए पीएमएस या रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने के लिए हर्बल गुणों से भरपूर चेस्‍टबेरी का सेवन करें।   
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