मानसून में आयुर्वेदिक तरीके से करें त्‍वचा की देखभाल

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 04, 2014

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मानसून में त्वचा के प्रति आप की थोड़ी सी लापरवाही आप के सौंदर्य को प्रभावित कर सकती है। आइए जानें मानसून में बहुमूल्य आयुर्वेदिक तरीकों से त्वचा को कैसे चमकदार और खूबसूरत रखा जा सकता है।
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    मानसून में त्‍वचा की देखभाल के लिए आयुर्वेद

    चिलचिलाती धूप के बाद बारिश की बौछारें तन-मन को खुशी से सराबोर कर देती हैं। लेकिन साथ ही यह मौसम त्वचा के लिए कई प्रकार की समस्याएं ले कर आता हैं। मानसून को सूजन, पित्ती, रिर्गवर्म, हर्पीस और एक्जिमा के रूप में त्वचा की समस्यायें बढ़ाने वाला माना जाता है। वातावरण में बढ़ी आर्द्रता के बावजूद त्वचा डिहाइड्रेट होकर नमी खोने लगती है। image coutesy : getty images

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    आयुर्वेदिक तरीके

    मानसून में पित्त की उत्तेजना से कई प्रकार के त्वचा संबंधी विकार हो सकते हैं। इस मौसम में त्वचा के प्रति आपकी थोड़ी सी लापरवाही आप के सौंदर्य को प्रभावित कर सकती है। आइए जानें मानसून में बहुमूल्य आयुर्वेदिक तरीकों से त्वचा को कैसे चमकदार और खूबसूरत रखा जा सकता है।  image coutesy : getty images

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    मसालेदार और तले हुए आहार से दूरी

    मानसून में अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए, मसालेदार, तैलीय और खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। वातावरण में मौजूद अधिक नमी पाचन तंत्र को कमजोर कर सकती है। भारी भोजन पेट में खराबी पैदा कर सकता हैं। इस तरह का आहार पित्त को बढ़ावा देता है। जिससे इस मौसम में त्‍वचा पर फोड़े-फुंसियों की समस्‍या हो सकती है। इसलिए हलके और आसानी से पचने वाले आहार का सेवन कीजिये। उबली हुई सब्जियां जैसे तोरई, कद्दू, सलाद, फल, मूंग की दाल, खिचड़ी, मक्का, चना आटा, और दलिया आदि खाएं।  image coutesy : getty images

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    पित्त उत्तेजक पेय पदार्थों को न कहे

    इस बात को हम समझते हैं कि एक कप चाय के बिना दिन की शुरुआत करना बहुत से लोगों के लिए मुश्किल होता है। लेकिन, आपको इसे कम करने की कोशिश करनी चाहिए। कॉफी और शराब के लिए सख्‍त रूप से न है क्‍योंकि इन्‍हें पित्त और अम्लता के लिए बेहद उत्तेजक माना जाता है। इसकी जगह आप पित्त को शांत करने वाली हर्बल चाय को चुनें।  image coutesy : getty images

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    खुद को सूखा रखें

    बरसात में बाहर जाने पर थोड़ा बहुत गीला होना सामान्‍य बात है। लेकिन मानसून का आनंद लेते हुए अपनी त्‍वचा को लंबे समय तक गीला रखना ठीक नहीं है। त्वचा के अधिक समय तक गीला रहने से फंगल संक्रमण हो सकता है। फंगल का सीधा संबंध हाथ-पैरों की अंगुलियों से होता है। अधिक देर तक पानी में रहने या पानी में भीगने से फंगल इंफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए अपनी त्‍वचा और पैरों को साफ रखना महत्‍वपूर्ण होता है।  image coutesy : getty images

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    वीट ग्रास, त्वचा के लिए टॉनिक

    वीट ग्रास आपकी त्‍वचा के लिए एक टॉनिक है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के साथ त्‍वचा रोग को नियंत्रित करने में मददगार होता है। एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली से आप स्वस्थ और चमकदार त्वचा पा सकते हैं। वीट ग्रास एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध होता है और खून विषैले तत्‍व को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  image coutesy : getty images

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    भरपूर मात्रा में पानी

    इस मौसम में त्‍वचा की समस्‍याओं को रोकने के लिए और अपनी त्‍वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। इससे विषैले तत्‍व शरीर से निकल जाते हैं, इसलिए आपको प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने चाहिए। दूषित जल से संक्रमण फैलने खतरा होता है इसलिए हमेशा जल को उबालकर पीना चाहिए।  image coutesy : getty images

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    ताजा ही खाये!

    शरीर और त्‍वचा के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाये रखने के लिए ताजा और अपरिष्कृत आहार लें। पैक, फ्रिज में रखें या प्रसंस्कृत खाद्य पद‍ार्थों को लेने से बचें। इसके अलावा पिज्जा, बर्गर या चिप्स आदि की जगह घर में बना ताजा भोजन लें। अपने आहार में फल और हरी सब्जियों को शामिल करें।  image coutesy : getty images

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    अल्कोहल आधारित त्वचा क्लीन्जर से बचें

    अल्‍कोहल बेस स्किन क्‍लींजर के इस्‍तेमाल से बचना चाहिए। ये त्‍वचा को ड्राई कर सकते हैं। इसकी जगह अतिरिक्त तेल, जमी हुई कीट और धूल से छुटकारा पाने और त्‍वचा को बैक्टीरिया के संक्रमण से मुक्त रखने के लिए नियमित रूप से हर्बल साबुन या क्‍लींजर का उपयोग करें।  image coutesy : getty images

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    ठंडी जड़ी बूटियों का प्रयोग करें

    मानसून में त्वचा की चमक को बनाये रखने के लिए सौंफ, धनिया बीज और भारतीय करौदे और आंवला जैसे शरीर पर कूलिंग प्रभाव देने वाली जड़ी-बूटियों (पित्त शांत करना) का इस्‍तेमाल करें। आंवला लीवर से विषैले तत्‍वों को बाहर निकालने और पाचन में मददगार होता है - साथ ही यह विटामिन सी और अन्‍य मिनरल का अच्‍छा स्रोत है। इसके अलावा इसके नियमित सेवन से आपकी रंगत में निखार आता है।  image coutesy : getty images

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    एलोवेरा जैल का सेवन!

    एलोवेरा जैल त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, क्‍योंकि यह रक्त को शुद्ध करता है। ताजा एलोवेरा जैल को नियमित रूप से खाली पेट पर दो या तीन बड़े चम्मच की मात्रा में लिया जा सकता है। आप अपनी त्वचा पर ताजा एलोवेरा जैल का उपयोग कर सकते हैं - इसमें एंटी एजिंग, एंटी टैनिंग, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।  image coutesy : getty images

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    हल्के लैक्सटिव लें

    पाचन क्रिया का दुरुस्‍त होना स्‍वस्‍थ त्‍वचा के लिए बहुत जरूरी होता है। अगर आपको मल त्‍याग ठीक से नहीं होता है तो हल्‍के लैक्सटिव जैसे त्रिफला चूर्ण या अन्‍य प्राकृतिक लैक्सटिव जैसे आलूबुखारा, अंजीर और किशमिश लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। त्रिफला चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी या दूध के साथ नियमित रूप से रात को सोते समय लिया जा सकता है।  image coutesy : getty images

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