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जैसा हम खाते हैं वैसा ही हम बनते हैं, जानें कैसे

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 08, 2016
विज्ञान हो या धर्म पुराने समय से ही भोजन और सोच को जोड़क देखा जाता रहा है। तो चलिए जानें कि खाने का हमारे मन पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसके पीछे क्या कारण होते हैं।
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    जैसा खाएं अन्न वैसा होगा मन


    अन्न और मन का आपस में गहरा संबंध होता है, इसलिए ही कहा जाता है, "जैसा खाएं अन्न, वैसा होगा मन"। अन्न हमारे शरीर को काम करने की शक्ति (ऊर्जा) देता है और इसके प्रभाव से ही मन को भी सोचने समझने की शक्ति मिलती है। विज्ञान हो या धर्म पुराने समय से ही भोजन और सोच को जोड़क देखा जाता रहा है। तो चलिए जानें कि खाने का हमारे मन पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसके पीछे क्या कारण होते हैं।

    जैसा खाएं अन्न वैसा होगा मन
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    भोजन का महत्व


    अन्न को शास्त्रों में प्राण की संज्ञा दी गई है। और हो भी क्यों ना, अन्न प्राण से कम भी नहीं है। भोजन के तत्वों से ही शरीर में जीवनी शक्ति का निर्माण होता है। भोजन से ही मांस, रक्त, मज्जा, अस्थि तथा ओजवीर्य आदि का बनते हैं। भोजन के अभाव में इन आवश्यक तत्वों का निर्माण रुक सकता है और खराब भोजन के सेवन से ये सही से काम करना बंद कर सकते हैं। हम  क्या खाते हैं, यह हमारे दिमाग को भी बहुत प्रभावित करता है। विज्ञान और धर्म दोनों ही इस बात का समर्थन करते हैं।

    भोजन का महत्व
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    ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी की रीसर्च


    डेली मेल नामक अखाबर में छपी खबर के अमुसार, ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं के दल के मुताबिक जंक फूड खाने के बाद इसे खाने वाले व्यक्ति का दिमाग, खाए गे जंक फूड का हिसाब रख पाने में असमर्थ होता है। जिसके चलते वह ज्यादा मात्रा में खराब भोजन कर जाता है। अध्ययनकर्ताओं के दल से डॉ जीन बाउमेन कहते हैं कि, यह साबित हो चुका है कि जंक फूड और ट्रांस फैट हृदय और दिमाग दोनों के लिए ही हानिकारक होता है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार जंक फूड के सेवन से सेहत संबंधि कई समस्याएं, जैसे हृदय संबंधि समस्याएं, हाई कॉलेस्ट्रोल, मोटापा और मधुमेह आदि होने का जोखिम बना रहता है।

    ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी की रीसर्च
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    विज्ञान का नज़र से




    ब्रिटिश जर्नल ऑफ नुट्रिशन में साल 2011 में प्रकाशित शोध के अनुसार पुरुषों में हल्के निर्जलीकरण से भी सतर्कता और स्मृति में कमी और तनाव, चिंता, और थकान में बढ़त हो सकती है। वहीं साल 2009 में आई कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की स्टडी में पाया गया कि हाई-फैट डाइट ने प्रयोगशाला में चूहों न सिर्फ धीमा बल्कि  बेहद आलसी बना दिया। हाल में हुए  यूसीएलए के एक अध्ययन में पाया गया कि फ्रुक्टोज की उच्च मात्रा वाले आहार मस्तिष्क को धीमा कर देते हैं और याददाश्त व सीखने की क्षमता को भी बाधित करते हैं।

    विज्ञान का नज़र से
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