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अवसादरोधी के पीछे का सच

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 01, 2014
अवसादरोधी दवायें तुरंत फायदा तो करती हैं, लेकिन केमिकलयुक्‍त इन दवाओं का साइडइफेक्‍ट घातक हो सकता है! इसलिए बिना मनोचिकित्‍सक की सलाह के इनका सेवन न करें।
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    अवसादरोधी संभलकर खायें

    अवसाद हमारी दिनचर्या का हिस्‍सा बनता जा रहा है, इसके लिए सबसे अधिक जिम्‍मेदार अनियमित दिनचर्या, व्‍यायाम की कमी और खानपान में पौष्टिक तत्‍वों का अभाव है। लोग अवसाद पर काबू पाने के लिए अवसादरोधी दवाओं का सेव‍न चिकित्‍सक की परामर्श के बिना ही कर लेते हैं। बिना परामर्श इन दवाओं के सेवन का चलन किशोरों और युवाओं में सबसे अधिक है। अवसाद पर काबू पाने वाली ये दवायें वास्‍तव में हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हैं नुकसानदेह।

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    अवसादरोधी संभलकर खायें
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    अवसाद के प्रकार

    अवसाद के कई प्रकार हैं। आवृत्ति, लक्षण और तीव्रता के आधार पर अवसाद हल्‍का, मध्‍यम और तीव्र हो सकता है। तनाव होने के बाद कुछ लोगों में संक्रमणकालीन अवसाद के लक्षण भी दिखाई देते हैं। हालांकि तत्‍कालीन प्रभाव के लिए अवसाद के कुछ समस्‍याओं को दूर करने के लिए ये दवायें फायदेमंद भी हो सकती हैं। लेकिन अवसाद के हर प्रकार में इनका सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से सही नहीं।

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    अवसाद के प्रकार
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    सही चिकित्‍सक से परामर्श

    अवसाद होने लोग सामान्‍य चिकित्‍सक के पास जाकर उनके सलाह के आधार पर दवायें लेते हैं। जबकि अवसाद की स्थिति के आधार और उसके लक्षण के अनुसार ही दवा लेना चाहिए। इसके लिए व्‍यक्ति को साइकियाट्री यानी मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।

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    सही चिकित्‍सक से परामर्श
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    औषधियों का प्रभाव

    अवसादरोधी दवा की शुरूआत करने के बाद रोगी को राहत मिलती है, और शुरूआत में इसके दुष्‍प्रभाव नहीं दिखाई देते हैं। जिन दवाओं में शुगर की मात्रा भी मौजूद होती है यानी शुगरयुक्‍त अवसादरोधी दवायें अधिक और जल्‍दी फायदा करती हैं और रोगी को लगता है कि उसे राहत मिल रही है। जबकि वास्‍तविकता यह है कि ये केमिकल युक्‍त दवायें तुरंत फायदा करती हैं लेकिन इनके साइड इफेक्‍ट भी होते हैं।

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    औषधियों का प्रभाव
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    संघर्ष से बचें

    व्‍यक्तिगत कारणों से कुछ लोगों को अवसाद के इस दौर से निकल पाना थोड़ा मुश्किल लगता है। इस स्थिति में जरूरत है इच्‍छाशक्ति से मनोभावों पर काबू पाया जाये। इन स्थितियों का मुकाबला करने के लिए साहस जुटायें और अवसाद से बाहर निकलने की कोशिश करें।

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    संघर्ष से बचें
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    मनोचिकित्‍सक से सलाह

    मनोचिकित्‍सक आपको अवसाद से बाहर निकलने में आपकी मदद कर सकता है। मनोचिकित्‍सक आपको अवसाद के लिए जिम्‍मेदार वास्‍तविक स्थिति को सही तरीके से समझाकर उसपर काबू पाने के लिए आपको मानसिक तौर पर तैयार भी कर सकता है। तो क्‍यों न मनोचिकित्‍सक से सलाह लें।

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    मनोचिकित्‍सक से सलाह
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    थोड़ा समय दीजिए

    खुद के लिए समय निकालकर अवसाद और तनाव को दूर किया जा सकता है। क्‍योंकि काफी हद तक परीस्थितियां और आसपास का माहौल ही आपको इस स्थिति में लेकर आता है। तो क्‍यों न थोड़ा वक्‍त खुद को दें, प्रकृति के साथ थोड़ा समय बितायें, अच्‍छी और प्रेरणादायक किताबें पढ़ें, अपने बारे में सोचें।

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    थोड़ा समय दीजिए
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    मेडीटेशन और योग

    योग और ध्‍यान के जरिये आप शारीरिक और मानसिक विकार दूर सकते हैं। क्‍योंकि ध्‍यान और योग प्राकृतिक उपचार हैं जिनका साइड-इफेक्‍ट शरीर पर नहीं पड़ता है। कुल मिलाकर यह हर तरीके से फायदेमंद है। तो क्‍यों न सुबह के वक्‍त थोड़ा वक्‍त व्‍यायाम और ध्‍यान के लिए निकालें।

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    मेडीटेशन और योग
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    इनके साइड-इफेक्‍ट

    अवसादरोधी दवाओं का सेवन हम बिना किसी सलाह के लेते हैं तो इसके कई प्रकार के साइड इफेक्‍ट दिखाई देते हैं। इनके कारण अनिद्रा, तनाव, रात में साते वक्‍त पसीना आना, थकान, हड्डियों के कमजोर होने जैसी समस्‍यायें होने लगती हैं।

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    इनके साइड-इफेक्‍ट
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