प्‍यार और वासना के बारे में जानें

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 04, 2014

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प्‍यार और वासना दोनों मस्तिष्‍क से जुड़े हैं और ये दोनों भावनायें व्‍यक्ति के दिमाग में एक साथ आती हैं, एक ही समय में प्‍यार किसी और के साथ और वासना किसी और के प्रति हो सकती है।
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    प्‍यार और वासना

    प्‍यार और वासना दोनों एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं, लेकिन एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हैं। क्‍योंकि व्‍यक्ति को प्‍यार किसी से और वासना किसी दूसरे से एक साथ हो सकता है। डेली मेल ने 3000 लोगों पर एक सर्वे कराया, जिसमें यह बात सामने आयी कि प्‍यार और वासना एक साथ भी हो सकते हैं और एक-दूसरे से पृथक भी, इसमें लगभग 5 प्रतिशत लोगों ने यह माना कि उनको एक साथ प्‍यार किसी और से और वासना किसी और के प्रति थी। image source - getty

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    क्‍यों मिलते हैं दोनों एहसास

    यौवन की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही एक अजीब सा अहसास होने लगता है। कोई हमउम्र अच्‍छा लगने लगता है। इस वक्‍त कोई चाहने लगे तो पेट में तितलियां उड़ने लगती है। यह अहसास प्रकृति की अनुपम भावना है, जो किशोरावस्‍था से शुरू होकर जीवन पर्यंत तक रहती है। इस अवस्‍था में शरीर में स्‍थाई परिवर्तन होते हैं। हार्मोंस का प्रबल वेग भावनात्‍मक स्‍तर पर अनेक उलझने खड़ी कर देता है। प्‍यार, संवेदना, लगाव, वासना, घृणा और अगलाव की विभिन्‍न भावनाएं सभी के जीवन में आती हैं।

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    दिमाग का अहम रोल

    चिकित्‍सा विज्ञान का मानना है कि मानव शरीर प्रकृति की एक जटिलतम संरचना है। इसे नियंत्रित करने के लिए नर्वस सिस्‍टम का एक बड़ा जाल भी है, जो स्‍पर्श, दाब, दर्द की संवेदना को त्‍वचा से मस्तिष्‍क तक पहुंचाता है। किशोरावस्‍था में विशिष्‍ट रासायनिक तत्‍व निकलते हैं जो नर्वस सिस्‍टम द्वारा शरीर के विभिन्‍न हिस्‍सों तक पहुंचते हैं। इन्‍हीं में शामिल प्‍यार के कई रसायन भी हैं जो उम्र के विभिन्‍न पड़ावों पर इसकी तीव्रता या कमी का निर्धारण भी करते हैं।

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    वासना यानी लालसा

    प्‍यार होने के साथ-साथ उम्र के इस पड़ाव पर वासना यानी इच्‍छा या लालसा की भावना भी पैदा होती है। इस अवस्‍था में विपरीत लिंग को देखकर वासना का भाव उत्‍पन्‍न होता है, जो दो तरह के हार्मोन से नियंत्रित होता है। पुरुषों में यह ‘टेस्‍टोस्‍टेरॉन’ तथा महिलाओं में यह ‘एस्‍ट्रोजेन’ हार्मोन के कारण होता है, जो वासना की आग भड़काते हैं। वासना या लालसा का दौर कुछ पल के लिए हो सकता है।

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    आकर्षण भी होता है

    वासना की तीव्रतर लालसा के बाद आकर्षण या प्रेम का चिरस्थायी दौर शुरू होता है जो व्यक्ति में अनिद्रा, भूख न लगना, अच्छा न लगना, प्रेमी को तकते रहना, यादों में खोए रहना, लगातार बातें करते रहना, दिन में सपने देखना, पढ़ने या किसी काम में मन न लगना जैसे लक्षणों से पीड़ित कर देता है। इस स्थिति में डोपामिन, नॉर-एपिनेफ्रिन तथा फिनाइल-इथाइल-एमाइन नामक हार्मोन रक्त में शामिल होते हैं।

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    डोपामिन हार्मोन का असर

    डोपामिन हार्मोन को ‘आनन्द का रसायन’ भी कहा जाता है क्योंकि यह ‘परम सुख की भावना’ पैदा करता है। नॉर-एपिनेफ्रिन नामक रसायन उत्तेजना का कारक है जो प्यार में पड़ने पर आपकी हृदय गति को भी तेज कर देता है। डोपामिन और नॉर-एपिनेफ्रिन मन को उल्लास से भर देते हैं। इन्हीं हार्मोनों से व्‍यक्ति को प्यार में ऊर्जा मिलती है, वह अनिद्रा का शिकार होता है। प्रेमी को देखने या मिलने की अनिवार्य लालसा प्रबल हो जाती है।

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    ऑक्‍सीटोसिन हार्मोन का असर

    व्‍यक्ति के शरीर में डोपामिन एक अत्यन्त महत्वपूर्ण हार्मोन ‘ऑक्सीटोसिन’ के स्राव को भी उत्तेजित करता है। जिसे ‘लाड़ का रसायन’ (स्पर्श) कहा जाता है। यही ऑक्सीटोसिन प्रेम में आलिंगन, शारीरिक स्पर्श, हाथ में हाथ में हाथ थामे रहना, सटकर सोना, प्रेम से दबाने जैसी निकटता की तमाम घटनाओं को संचालित और नियन्त्रित करता है। इसे ‘निकटता का रसायन’ भी कहते हैं।

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    हमेशा जुड़े रहने की भावना

    एक और रसायन है फिनाइल-इथाइल-एमाइन, यह प्रेमी से मिलने के लिए उकसाता है। यही रसायन प्यार में पड़ने पर सातवें आसमान के ऊपर होने की सन्तुष्टिदायक भावना भी प्रदान करता है। इसी रसायन के प्रेमी-प्रमिका हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहना चाहते हैं, और लगातार बातें करने के बावजूद भी वे ऊबते नहीं।

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    एड्रीनेलिन भी है

    नॉर-एप्रिनेफ्रिन इस अवस्था में एड्रीनेलिन का उत्पादन करता है जो प्रेमी के आकर्षण में ब्‍लड प्रेशर को बढ़ाता है। यह हथेली में पसीने छुड़वाता है, दिल की धड़कन बढ़ाता है, शरीर में कंपकंपी भर देता है और कुछ कर गुजरने की आवश्यक हिम्मत भी देता है, ताकि आप जोखिम उठाकर भी अपने प्रेमी को मिलने चल पड़ें। भयानक कारनामें कर गुजरने की चाहत इसके हार्मोन के कारण ही होती है।

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    हार्मोन का स्‍तर और संबंध

    शरीर में इन हार्मोंस तथा रसायनों का आवश्यक स्तर बना रहने से आपसी सम्बंधों में उष्णता यानी गर्मजोशी कायम रहती है। शरीर में स्वाभाविक रूप से किशोरावस्था, यौवनावस्था या विवाह के तुरन्त पूर्व व बाद में इन रसायनों व हार्मोंस का उच्च स्तर कायम रहता है। उम्र ढलते-ढलते इनका स्तर घटने लगता है और धीरे-धीरे वासना समाप्‍त होने लगता है, लेकिन प्‍यार जीवन पर्यंत बना रहता है।

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    प्‍यार कमर के ऊपर और वासना कमर के नीचे

    प्यार और वासना की भावना एक साथ जीवन के साथ चलती है। इसीलिए कहा गया है कि प्यार, कमर के ऊपर है और वासना कमर के नीचे। लेकिन दोनों का ही नियन्त्रण दिमाग से ही होता है। प्यार अंधा है, प्यार नशा है या प्यार शुद्ध कविता है इसकी विभिन्न परिभाषायें हैं, लेकिन इस भावना के महत्व को जीव-रसायन से समझाकर कम नहीं किया जा सकता। प्यार एक शुद्ध रासायनिक कविता है जो प्रेमी को ऊर्जावान, निडर और साहसी बना देती है।

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