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एड्स : मिथक और तथ्‍य

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 01, 2012
एड्स के बारे में सही और गलत धारणाएं कौन सी है।
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    मिथक : एड्स और एचआईवी दोनों अलग ही हैं

    तथ्‍य : एचआईवी (ह्यूमन इम्‍यूनोडिफिसिएंशी वायरस) एक प्रकार का सेल है जो बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। इसे सीडी4 इम्‍यून सेल्‍स कहते हैं। एचआईवी पॉजीटिव होना और एड्सग्रस्‍त होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। उपचार द्वारा एचआईवी को रोका जा सकता है। जबकि एड्स (एक्‍वायर्ड इम्‍यूनोडिफिसिएंशी सिंड्रोम) एचआईवी संक्रमण के कारण होता है।

    मिथक : एड्स और एचआईवी दोनों अलग ही हैं
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    मिथक : एचआईवी/एड्स एक संक्रामक बीमारी है

    तथ्‍य : एचआईवी/एड्स संक्रामक बीमारी नही है। यह छूने से, पसीने से, आंसुओं से, साथ बैठने से, खाने से नही फैलता। यह संक्रमित रक्‍त चढ़ाने से, संक्रमित सुई इस्‍तेमाल करने से, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से या फिर मां के दूध से फैलता है।

     मिथक : एचआईवी/एड्स एक संक्रामक बीमारी है
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    मिथक : मच्‍छर के काटने से एचआईवी होता है

    तथ्‍य : लोगों में यह भ्रम है कि मच्‍छरों के काटने से एचआईवी फैल सकता है। जबकि ऐसा नहीं है। मच्‍छर अगर एचआईवी ग्रस्‍त आदमी को काटने के बाद स्‍वस्‍थ्‍य व्‍यक्ति को काटता है तो उसे एचआईवी नहीं हो सकता। क्‍योंकि किसी भी कीट के अंदर कोई भी वायरस बहुत ही कम समय के लिए होता है।

    मिथक : मच्‍छर के काटने से एचआईवी होता है
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    मिथक : एचआईवी/एड्स से ग्रस्‍त आदमी की उम्र बहुत कम होती है।

    तथ्‍य : कुछ लोगों के साथ ही ऐसा होता है, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस के कारण कमजोर हो जाती है। एचआईवी से ग्रस्‍त आदमी कई सालों तक सामान्‍य जीवन जी सकता है।

    मिथक : एचआईवी/एड्स से ग्रस्‍त आदमी की उम्र बहुत कम होती है।
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    मिथक : एचआईवी का इलाज है

    तथ्‍य : नहीं, अभी तक एड्स लाइलाज बीमारी है। इसका कोई उपचार नही है। लेकिन दवाओं का प्रयोग करके इस वायरस के असर को कम किया जा सकता है।

    मिथक : एचआईवी का इलाज है
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    मिथक : एचआईवी का पता लक्षणों से चलता है

    तथ्‍य : एचआईवी संक्रमण होने बाद भी कुछ लोगों में कई सालों तक उसके लक्षण दिखायी नहीं देते हैं। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट एपेडेमिक यानी खामोश महामारी कहा जाता है। एचआईवी संक्रमण का पता लगाने के लिए जांच की जानी बहुत जरूरी होती है।

    मिथक : एचआईवी का पता लक्षणों से चलता है
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