गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़े मिथक और गलत अवधारणायें

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 10, 2015

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अनचाहे गर्भ से छुटकारा दिलाने के लिए बाजार में कई तरह की गर्भनिरोधक गो‍लियां मौजूद हैं, लेकिन अगर इसका सही तरीके से प्रयोग न हो तो समस्‍या हो सकती है, ऐसे में इससे जुड़े कई भ्रम भी हैं जो कि पूरी तरह गलत हैं।
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    गर्भनिरोधक गोलियां

    अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए महिलायें गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करती हैं। मिश्रित गर्भनिरोधक गोलियों (कंबाइंड बर्थ कंट्रोल पिल्स) में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टिन नाम के दो हार्मोन होते हैं। ‘मिनी पिल’ या ‘प्रोजेस्टिन ओनली पिल’ में केवल प्रोजेस्टिन हार्मोन होता है। कंबाइंड पिल का पूरा नाम, कम्बाइन्ड ओरल कंट्रासेप्टिव पिल या सीओसीपी है। ‘मिनी पिल’ का पूरा नाम प्रोजेस्टिन ओनली पिल या पीओपी है। लेकिन अधिकांशतः लोग दोनों ही को ‘गर्भनिरोधक गोली’ या ‘पिल’ कहते हैं। इनको लेकर कई तरह के मिथक और गलत अवधारणायें हैं, इनके बारे में जानिये।

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    मिथक - गर्भनिरोधक गोलियां पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं

    सच - अगर सही तरीके से गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग किया जाये तो इससे गर्भनिरोध की संभावना सत-प्रतिशत होती हैं। स्‍कॉटलैंड में 2007 में हुए एक शोध की मानें तो महिलायें चिकित्‍सक की सलाह का पालन पूरी तरह से नहीं करती हैं जिसके कारण यह लगभग 8 प्रतिशत मामलों में सफल नहीं हो पाता है।

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    मिथक - पीरियड नि‍यमित रहते हैं

    सच - महिलाओं को लगता है कि गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से पीरियड नियमित रहते हैं और इसके कारण मेंस्‍ट्रुअल साइकल प्रभावित नहीं होता है। जबकि सच्‍चाई यह है कि गर्भनिरोधक गोलियों में पाये जाने वाले हार्मोन के कारण पीरियड प्रभावित हो जाता है।

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    मिथक - वजन बढ़ाता है

    सच - गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से पहले वजन बढ़ने की संभावना अधिक रहती थी। लेकिन वर्तमान में प्रयोग की जानें गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से वजन बढ़ने की संभावना बहुत कम रहती है। हालांकि इसमें पाये जाने वाले प्रोजेस्टिन हार्मोन के कारण भूख बढ़ती है जिससे वजन बढ़ सकता है।

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    मिथक - गर्भनिरोधक से इंफर्टिलिटी की संभावना

    सच - महिलाओं के अंदर यह गलतफहमी है कि गर्भनिरोधक का अधिक सेवन करने से इंफर्टिलिटी की संभावना बढ़ जाता है। जबकि सच्‍चाई यह है कि अगर आपकी उम्र 30 से कम है तो कोई समस्‍या नहीं होती, कुछ मामलों में 30 की उम्र के बाद की महिलाओं को गर्भ धारण करने में समस्‍या हो सकती है।

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    मिथक - कैंसर का कारण

    सच - गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने और कैंसर के बीच के सीधे संबंध पूरी तरह से साबित नहीं हुए हैं। लेकिन जो महिलायें गर्भनिरोधक के चक्‍कर में कंडोम का प्रयोग करने से बचती हैं उनको पैपीलोमा वॉयरस (यह प्रकार का यौन संचारित रोग) होने की संभावना अधिक रहती है।

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    मिथक - गर्भपात हो सकता है

    सच - कांट्रासेप्टिव पिल्‍स ठहर चुके गर्भ पर कोई प्रभाव डालने में सक्षम नहीं है। ये हार्मोन्स अण्डोत्सर्ग को विलम्बित करने का काम करते हैंI इस प्रकार गर्भाशय नाल में विसर्जित शुक्राणु को अन्डो से मिलने से रोक दिया जाता है और गर्भ नहीं ठहरताI यदि कोई महिला गर्भवती हो चुकी है, तो ये गोलियां कोई प्रभाव नहीं डाल पाएंगीI गर्भावस्था या शिशु पर भी इनका कोई बुरा असर नहीं होगा।

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    मिथक - गोलियां अगली सुबह लेनी चाहिए

    सच - गर्भनिरोधक गोलियों को सेक्स के बाद जितना जल्दी लिया जाये उतना बेहतर है, लेकिन आमतौर पर ये सेक्स के 72 घंटे बाद भी प्रभावशाली हो सकती हैं। जितना ज़्यादा समय निकलेगा गर्भ ठहरने की सम्भावना भी उतनी ज़्यादा बढ़ जाएगी। इन गोलियों को अगर सेक्स के 24 घंट के भीतर लिया जाये तो ये 95 फीसदी तक असरदार होती हैं। 24 से 48 घंटो के बीच 85 फीसदी और 49 से 72 घंटो के बीच 58 फीसदी तक ये असर कर सकने में संभव हैं।

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