ऑटोइम्यून डिजीज को दूर करने के 9 प्राकृतिक उपाय

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 14, 2015

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वैसे तो शरीर की इम्‍यूनिटी बाहरी दुश्मनों से शरीर की रक्षा करने के लिए बनी है, लेकिन अगर कोई ऐसा रोग शरीर को घेर ले, जिसमें यह रक्षा तंत्र ही शरीर का दुश्मन बन जाए तो स्थिति तकलीफदेह हो सकती है। इस रोग को चिकित्सकीय भाषा में ऑटोइम्यून डिजीज कहते है।
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    ऑटोइम्‍यून डिजीज से बचने के उपाय

    मानव शरीर कुदरत की देन है। इसलिए इसमें रोग प्रतिरोधी प्रणाली का भी समावेश होता है। और यह किसी भी प्रकार के इंफेक्‍शन से शरीर का बचाव करती है, लेकिन जब यह प्रणाली, अपने शरीर और संक्रमण के बीच का भेद या फर्क को न समझ पाये और अपने ही शरीर के स्वस्थ टिशूज पर ही आक्रमण शुरू कर दें, तो एक गंभीर रोग का रूप धारण कर लेती है। इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में ऑटोइम्यून डिसीज कहते है। ऑटो इम्यून डिजीज में शरीर में मौजूद प्रतिरक्षण प्रणाली उसके खिलाफ ही कार्य करने लगती है। इस रोग से शरीर का कोई भी अंग प्रभावित हो सकता है जैसे जोडों का रोग, त्वचा, रक्त नलिकाओं और नर्वस सिस्टम आदि। हालांकि ऑटो इम्यून रोगों के शुरुआती दौर में ही इलाज करने से काफी अच्छे परिणाम देखने को मिलते है। लेकिन कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद से आप ऑटोइम्‍यून डिजीज को दूर कर सकते हैं। आइए ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में जानते हैं।
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    जीवनशैली में बदलाव

    यदि आपको पता चल जाये कि इस बीमारी से आप ग्रस्‍त हैं तो सबसे पहले आप चिकित्‍सक से संपर्क करें और इसके उपचार के बारे में सलाह लें। इसके अलावा तुरंत अपने खानपान में बदलाव करें, और ऐसे आहार का सेवन करें जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हों। इसके लिए सबसे साबुत अनाज का सेवन अधिक मात्रा में करें, इसमें मौजूद लेक्टिन आपकी प्रतिरोधक क्षमता को तुरंत बढ़ायेगा। खाने में ताजे फल और सब्जियों को शामिल कीजिए। इसके अलावा नियमित व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या बनाइए।
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    तनाव से दूर रहें

    तनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। तनाव से पाचन तंत्र प्रभावित होने के कारण इम्यून सिस्‍टम कमजोर होने लगता है। और आप ऑटोइम्‍यून डिजीज का शिकार होने लगते हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्‍थ के अनुसार, तनाव के कारण उत्‍पन्‍न कोर्टिसोल नामक हार्मोंन मोटापा, हृदय रोग, कैंसर और अन्य बीमारियों के जोखिम में डाल सकता है। इसलिए तनाव को दूर करने की कोशिश करें। तनावमुक्त होकर हंसने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
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    संतुलित आहार


    हम जैसा खाएंगे आहार वैसा ही बनेगा मन और शरीर। अगर हम पौष्टिक व संतुलित आहार लेते हैं तो शरीर में ऐसे लोगों के मुकाबले ज्यादा बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी जो संतुलित व पौष्टिक भोजन नहीं लेते। पौष्टिक और संतुलित आहार हमें रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। संतुलित आहार ऐसा आहार होता है जिसमें सब्जियों और प्रोटीन का अच्छा मिश्रण हो। और पौष्टिक आहार ऐसा आहार है जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन व मिनरल मौजूद हों ताकि शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता को मजबूत किया जा सके। जिन फूड्स में विटामिन ए, बी, सी व ई, फोलेट और कैरोनाइड्स व मिनरल जैसे जिंक, क्रोमियम व सेलिनियम होते हैं वे न केवल इम्यूनिटी बढ़ाते हैं बल्कि स्वस्थ इम्यून सिस्टम के लिए भी जरूरी हैं।
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    विटामिन डी


    विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्‍व है जो 200 से अधिक जीनों से प्रभावित होता है। इसकी जिम्‍मे‍दारियों में से एक बहुत अधिक सूजन और ऑटोइम्‍यून डिजीज सहित संक्रमण से लड़ने के लिए आपके शरीर की क्षमता को विनियमित करना है। विटामिन डी की पर्याप्‍त मात्रा ऑटोइम्‍यून डिजीज को रोकने और इलाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। और विटामिन डी लेने का सबसे सुरक्षित तरीका नियमित रूप सूरज की रोशनी में कुछ देर बिताना है।
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    अपने शरीर को आराम दें


    ऑटोइम्‍यून डिजीज होने पर बीमारी से उबरने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में शारीरिक आराम के महत्‍व को नजरअंदाज न करें। सीधे शब्‍दों में कहें तो जितना आप अधिक आराम करेगें आपको शरीर को उतनी ही अधिक एनर्जी प्राप्‍त होगी और आपका शरीर पाचन तंत्र सहित क्षतिग्रस्‍‍त हिस्‍सों की मरम्‍मत में खुद का समर्पित कर पायेगा।
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    खाने की आदतों में परिवर्तन


    अपने भोजन को अच्‍छी तरह से चबाने से आपके पाचन तंत्र को बहुत राहत मिलती है। वैसे तो आपको अपना भोजन तब तक चबाना चाहिए, जब तक कि वह लिक्विड में न बदल जाये। भोजन को अच्‍छी तरह से चबाने से पाचन तंत्र भोजन को प्रभावी ढंग से छोटी आंत की दीवार के माध्यम से ब्‍लड में पारित होने में मदद करता है। इसके अलावा भोजन को अच्‍छी तरह चबाने से स्‍लाइवा और पाचन एंजाइम फूड के साथ अ‍च्‍छी तरह से मिश्रित होकर आपके पाचन प्रक्रिया को सहज बनाता है। और पाचन तंत्र में मजबूत आने से आप ऑटोइम्‍यून डिजीज को आसानी से दूर कर सकते हैं।
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    जरूरत से ज्‍यादा प्रोटीन लेने से बचें

    ऑटोइम्‍यून डिजीज के महत्‍वपूर्ण कारणों में एंटीजेन-एंटीबॉडी का जटिल गठन भी शामिल है। जो खून में बहकर ऊतकों में जमा होकर अक्‍सर बेचैनी के साथ-साथ सूजन का कारण भी बनता है। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि क्‍या प्रतिरक्षा परिसरों के गठन का कारण बनता है? इसके लिए आप रक्‍त में अधूरे पचे प्रोटीन को दोषी ठहरा सकते हैं। इसलिए भोजन को अच्‍छी तरह से चबाने के साथ-साथ आवश्‍यकता से अधिक प्रोटीन लेना भी महत्‍वपूर्ण होता है।
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    ग्रीन टी और मछली के तेल का सेवन

    ग्रीन टी ऑटोइम्‍यून अर्थराइटिस के खिलाफ रक्षा करने के लिए जाना जाता है। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनोलिक नामक तत्‍व में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह अर्थराइटिस से संबंधित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा मछली के तेल में महत्वपूर्ण ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है। ये फैट शरीर में सूजन को कम करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कम करने में मददगार होता है।
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