8 लक्षण बताते हैं कि आपको डर हैं कि लोग क्‍या सोचेंगे

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 04, 2015

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जिंदगी आपकी है और इसे अपने तरीके से जीने और समझने का का आपका पूरा अधिकार है। इसलिए इस बात पर बिलकुल ध्‍यान न दें कि लोग आपके बारे में क्‍या सोचते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनपर लोग क्‍या सोचेंगे का बहुत असर पड़ता है।
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    क्‍यों लोगों की सोच से डरते हैं हम

    मनुष्‍य सामजिक प्राणी है और उसे परिवेश के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक दूसरे पर न केवल भरोसा करना पड़ता है साथ ही दूसरे लोग जो उसके बारे में कहते हैं उसका भी ध्‍यान रखना पड़ता है। इसके लिए लोग दिखावा भी करते हैं और खुद को ऐसा दिखाते हैं जैसे उसके अंदर बुराई नहीं है। लेकिन सच यह है कि जिंदगी आपकी है और इसे अपने तरीके से जीने और समझने का पूरा अधिकार आपका है। इसलिए इस बात पर बिलकुल ध्‍यान न दें कि लोग आपके बारे में क्‍या सोचते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनपर दूसरों की सोच का असर अधिक पड़ता है, यदि आप भी उनमें से एक हैं तो आपके अंदर इस तरह के लक्षण हो सकते हैं।
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    सच बोलने में असफल

    कितनी बार स्‍वयं को कुछ भी कहने से सिर्फ इसलिए रोक लेते हैं कि कहीं आपकी नौकरी खतरे में न पड़ जाये, या आपका पार्टनर आपसे रूठ न जाये या आपका दोस्‍त आपसे विमुख न हो जाये। कितनी बार आप अपने सच को (अपनी ईमानदारी, आत्म-सम्मान, और प्रामाणिकता के साथ) निगल लेते हैं। लेकिन अगर हर बार आप अपनी बात को कहने में असमर्थ होते हैं तो तनाव प्रतिक्रिया सक्रिय होकर शरीर की प्राकृतिक आत्म चिकित्सा तंत्र कमजोर होने लगता है और आपका स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम में पड़ सकता है। इसके अलावा, आप अपनी आत्मा का भी उल्लंघन करते है। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपको भी लोगों क्‍या कहेंगे क्‍या डर सताता है।
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    समाज की चाटुकारिता करना

    आप ऐसे कई लोगों को जानते होगें जो भीड़ में आने के बाद हर समय खुद को साबित करने के लिए अपनी धुन, उपस्थिति, पसंद और राजनीतिक दल को बदल लेते हैं। इस तरह से लोग क्‍या सोचेंगे इस बात का ध्‍यान रखने वाले लोग भी अक्‍सर भीड़ में आकर खुद को साबित करने के लिए खुद को बदलने लगते हैं।
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    आप झूठ भी बोलते हैं

    झूठ बोलने की एक और वजह है, डर। लोग या तो सच बोलने के नतीजे से डरते हैं, या फिर इस बात से कि सच बोलने पर दूसरे उनके बारे में क्या सोचेंगे। हर इंसान में यह चाहत होती है कि दूसरे उसे पसंद करें या उसे अपना दोस्त मानें। इसलिए अगर आपको लगता है कि आपके सच को लोग पसंद नहीं करेंगे तो आप झूठ बोलने लगते हैं।  
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    बात-बात पर माफी मांगना

    बिना किसी गलती के भी आप दूसरों से माफी मांगने लगते हैं। अगर आपको लगता है कि आपकी छोटी से बात से दूसरे लोग आपको पहचानने, हंसने या मान्‍यताएं बनाने लगते हैं तो आप अपनी इच्‍छा के विरूद्ध खुद को उन लोगों के साथ सहमत होने का नाटक करने लगते है।
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    सामाजिक स्थितियों से बचना

    आपको अपने अंतर्मुखी होने पर गर्व हैं, इसलिए आप पार्टियों में जाने के इच्‍छुक नहीं होते। लेकिन अंतर्मुखी लोग समाज के डर और समुदाय की लालसा के कारण सामाजिक वातावरण में जाते हैं। लेकिन हमारे बीच में से सबसे बहिर्मुखी सामजिक स्थितियों से बचते है और दूसरे उनके बारे में क्‍या सोचेंगे इसकी चिंता करने में व्‍यस्‍त रहते हैं।
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    अपनी विशिष्टता को छिपाना

    अगर आप इस डर में जीते हैं कि लोग आपके बारे में क्‍या सोचते हैं तो आप भीड़ का अनुसरण करने में दबाव महसूस करते है। यहां तक कि आप अपने अंदर की विशष्टिता को भी छिपाने लगते है। ऐसा करने से तनाव प्रतिक्रियाओं के सक्रिय होने से आपमे बीमारी होने की आंशका अधिक होती है। इसलिए आपकी अपने बारे में राय कहीं ज्यादा मायने रखती है बजाय दूसरों की राय (आपके बारे में) के, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी नजर में दूसरे कितने समझदार, ज्ञानी या नेकनीयत हैं।  
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    दूसरे व्यक्ति के बारे में अधिक सोचना

    अगर आप लगातार दूसरे के मन को पढ़ने की कोशिश में इतने व्‍यस्‍त रहते हैं तो आप वास्‍तव में इस पल में मौजूद नही हैं। आप आप निश्‍चित रूप से प्रकृति की देन इस सुंदर, अद्वितीय आत्‍मा की ओर ध्‍यान नहीं दे रहे हैं। जिंदगी का एक सच यह भी है कि आप लाख चाहें पर आप एक ही समय में हर किसी को खुश नहीं रख सकते हैं, कोई न कोई तो आपसे असंतुष्ट तो रहेगा ही। ऐसे में अगर आप हर किसी को खुश रखने और मनाने में लगे रहेंगे तो कभी भी अपनी जिंदगी शांति और सुकून के साथ नहीं जी पाएंगे। और आपकी आत्‍मा हमेशा परेशान ही रहेगी।
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    खुद को परफेक्‍ट बनाने की कोशिश करना

    सामान्‍यतया हम अपने दिमाग का 4-5 पतिशत ही प्रयोग कर पाते हैं, इसका मतलब यही है कि हम अपने दिमाग का पूरा इस्‍तेमाल नहीं कर पाते। जब हम अपने दिमाग का पूरा इस्‍तेमाल कर ही नहीं पाते तो पूर्ण कैसे हो सकते हैं, इस बात को सोचना बहुत जरूरी है। इसलिए अगर आप यह कोशिश कर रहे हैं कि आप परफेक्‍ट हो जायेंगे तो आप गलत हैं।
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