एंटीबॉयटिक के साइड इफेक्ट से लड़ने में मददगार हैं ये 8 तरीके

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 13, 2015

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एंटीबॉयटिक जितनी जल्‍दी दर्द दूर करता है, बीमारियों से बचाता है उतना ही बुरा असर इसका शरीर पर पड़ता है, इसके साइड इफेक्‍ट बहुत ही खतरनाक भी हो सकते हैं। आइए जानें एंटीबॉयटिक के साइड इफेक्‍ट किस तरह से बचा जा सकता हैं।
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    एंटीबॉयटिक का सेवन ठीक नहीं

    एंटीबॉयटिक्‍स की खोज ने दुनिया के नजरिये को बदल दिया, धीरे-धीरे लोग इसके आदी हो गये और इतने आदी हो गये कि हर तरह के दर्द और सामान्‍य समस्‍या में इसका सेवन करने लगे। लेकिन यह जितनी जल्‍दी दर्द दूर करता है, बीमारियों से बचाता है उतना ही बुरा असर इसका शरीर पर पड़ता है, इसके साइड इफेक्‍ट बहुत ही खतरनाक भी हो सकते हैं। जैसा की नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि एंटीबॉयटिक बैक्‍टीरिया को मारता है, लेकिन ये ऐसे अनुकूल बैक्‍टीरिया को भी मार देता है जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत मूल्‍यवान होते हैं। एंटीबॉयटिक के साइड-इफेक्‍ट के बारे में विस्‍तार से जानें।

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    बनायें एंटीबॉयटिक से दूरी

    हमारी आंतों में अनुकूल बैक्‍टीरिया और यीस्‍ट एक से दो किलो तक पूर्ण रूप से मौजूद होते हैं। यह अनुकूल बैक्‍टीरिया न केवल पाचन में सहायता करते हैं बल्कि विटामिन बी को बनाने में भी मददगार होते हैं। यह खमीर को दूर कर संक्रमण से लड़ने में भी मदद करते हैं। लेकिन इसके अधिक सेवन से यीस्‍ट अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है, और डिबिओसिस की स्थिति आती है। इसके कारण प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर हो जाती है।
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    अधिक मात्रा में करें पानी का सेवन

    एंटीबॉयटिक के साइड इफेक्‍ट से बचने के लिए धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें। सभी प्रकार के सोडा से दूरी बनाकर रखें। साथ ही चॉकलेट, मीठे और स्‍टार्च वाले आहार को एक तरफ रख दें। इसके अलावा डेयरी उत्‍पाद, फैटी और मसालेदार भोजन, चाय और कॉफी का सेवन न करें। पानी का सेवन अधिक मात्रा में करें।
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    संतरे का जूस बहुत ज्‍यादा न लें

    संतरे के जूस का सेवन बहुत अधिक मात्रा में न करें। हालांकि संतरे से विटामिन सी बहुत अधिक मात्रा में प्राप्‍त किया जा सकता है। लेकिन इस जूस के माध्‍यम से लेने से अतिरिक्‍त चीनी की आपूर्ति होती है, जिससे की स्थिति और भी खराब हो जाती है।
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    प्रोबायोटिक्‍स को अपने आहार में शामिल करें

    जब भी आप एंटीबॉयटिक का कोर्स लेते हैं तब आपको नियमित आधार पर दही के रूप में प्रोबायोटिक्‍स भी लेना चाहिए। और कोर्स पूरा होने के बाद प्रोबायोटिक्‍स लंबे समय तक जारी रखना चाहिए। प्रोबायोटिक्स अपने आहार का नियमित हिस्सा बनाने कर एक अच्छा विचार है।
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    फाइबर युक्‍त आहार का सेवन हो कम

    एंटीबॉयटिक लेते समय आपको ऐसे आहारों से दूर रहना चाहिये जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक पाई जाती हो जैसे, बीन्‍स और हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां। इन सब्‍जियों से दवाई शरीर में ठीक तरह से अवशोषित नहीं होती और इसके साइड इफेक्‍ट ज्‍यादा देखने को मिलते हैं। इसकी जगह हल्का और कम फाइबर वाला भोजन लें जैसे चावल और दही।
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    आसानी से पचने वाला आहार लें

    एंटीबॉ‍यटिक के सेवन के दौरान या बाद में कई महीनों तक आपके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए आसानी से पचने वाला और हल्‍के भोजन का सेवन करना चाहिए।  
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    रसोई में भी उपलब्‍ध है समाधान

    एंटीबॉ‍यटिक के साइड इफेक्‍ट को कम करने के लिए आप आपकी रसोई में मौजूद लहसुन जैसे अद्भुत उपाय का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसमें मौजूद एलिसीन नामक तत्‍व शरीर में एंटीबॉयटिक के प्रभाव से छुटकारा मिलता है। विटामिन ए, सी, ई, जिंक और सेलेनियम भी बहुत मददगार होते हैं। और ऐलोवेरा जूस पेट के अस्तर की सुरक्षा करता है।
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    अन्‍य उपाय

    एंटीबॉ‍यटिक के साइड इफेक्‍ट को कम करने के लिए हल्‍की एक्‍सरसाइज को शामिल करना महत्‍वपूर्ण होता है। लेकिन इसे नियमित आधार पर करें। साथ ही इस बात का ध्‍यान रखें कि आपको कब्ज की समस्‍या न हो। इसके लिए इसबगोल की भूसी और अलसी के बीज को अपने आहार में शामिल करें। यह मल त्‍याग में सहायता करने के साथ-साथ अतिरिक्‍त पानी को अवशोषित कर डायरिया से भी राहत प्रदान करता है।
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