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सगाई के बाद इन सात चीजों पर जरूर करें बात

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 16, 2014
सगाई वह मुकाम होता है, जब आपका जीवनसाथी लगभग तय हो चुका होता है। इस मुकाम पर आप अपने भावी साथी के साथ आने वाली जिंदगी के बारे में चर्चा कर सकते हैं। कुछ मुद्दों पर एक जेसी राय होना आपके भविष्‍य को सुखद और आरामदेह बना सकता है।
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    बात है जरूरी

    अकसर रिश्‍ते टूटने की वजह बातचीत का अभाव होता है। सगाई के बाद हम सब बातें करते हैं, हनीमून से लेकर नये घर तक। लेकिन, बावजूद इसके कई जरूरी बातों पर चर्चा नहीं जाती। ये बातें बाहरी और आप दोनों से जुड़ी हुई भी हो सकती हैं। दुनिया के हर मसले का हर बातचीत है। और हर रिश्‍ते की शुरुआत और आधार भी बातचीत ही है। आइये जानते हैं कुछ ऐसी बातें जिन्‍हें सगाई के बाद हर कपल को करनी चाहिये।

    बात है जरूरी
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    पैसा

    शादी के बाद पैसों का हिसाब किताब कैसे होगा। संपत्ति, पे चैक, कैश आदि का हिसाब कैसे रखा जाएगा। क्‍या होगा अगर अचानक आखिर आपकी नौकरी चली जाए। शादी का अर्थ है कि अब आप एक टीम हैं। और आप दोनों के आर्थ‍िक हित भी आपस में जुड़े हुए हैं। यह एक बड़ा और लगातार चलने वाला सवाल है। कई जोड़ों में यह अलगाव की वजह भी बनता है। लंबे समय के साथ के लिए इस विषय पर सद्भाव होना जरूरी है।

    पैसा
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    बच्‍चे

    आप परिवार कब बढ़ाएंगे। आपको कितना बड़ा परिवार चाहिये। अपने बच्‍चों के लिए आपके मन में क्‍या विचार हैं। आप उन्‍हें कैसी शिक्षा देना चाहते हैं। बच्‍चों की देखभाल कैसे होगी। अगर आप संयुक्‍त परिवार में नहीं रहते तो फिर बच्‍चे की देखभाल के लिए आप अपने करियर से कैसे तालमेल बैठायेंगे। सिर्फ, हमें बच्‍चे चाहिये से बात नहीं बनने वाली।

    बच्‍चे
  • 4

    वर्कलोड

    यह घर के सारे कामों पर लागू होता है। कामों का बंटवारा कैसे होगा। शादी से पहले इस विषय पर बात करनी जरूरी है। अगर आप इस पर बात नहीं करेंगे या इन मुद्दों को नहीं सुलझाएंगे तो इससे आपके लिए परेशानी हो सकती है। घर की साफ*सफाई से लेकर अन्‍य जरूरी कामों में कौन किसका हाथ बंटायेगा।

    वर्कलोड
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    माता-पिता और ससुराल की जिम्‍मेदारी

    अकसर परिवार में इन बातों को लेकर लड़ाई होती है। भले ही आप ट्वेंटीज में शादी करते हों, लेकिन यह उम्र भर के लिए होती है। और ऐसे में यह बात कभी भी आपके सामने आ सकती है। 40 की उम्र में शामिल लोगों को 'सैंडविच जनरेशन' कहा जाता है। वे अपने छोटे बच्‍चों और बूढ़े होते मां-बाप दोनों की देखभाल की जिम्‍मेदारी संभालते हैं। आप अपने माता-पिता और ससुराल के साथ कैसे संबंध रखेंगे या रखना चाहेंगे इस मुद्दे पर चर्चा की जानी जरूरी है।

    माता-पिता और ससुराल की जिम्‍मेदारी
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    प्राथमिकतायें

    आप दोनों के लिए क्‍या ज्‍यादा मायने रखता है। आपकी प्राथमिकतायें क्‍या हैं। क्‍या आप सेटल होना चाहते हैं या फिर आपके सपने साथ घूमकर दुनिया देखने के हैं। क्‍या आप वॉलिंटर बनना चाहते हैं या फिर नौ से पांच की नौकरी कर सामान्‍य जीवन जीना चाहते हैं। अपनी आकांक्षाओं और लक्ष्‍यों के बारे में बात करें। और तय करें कि आखिर आप किस तरह का जीवन साथ बिताना चाहते हैं।

    प्राथमिकतायें
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    झगड़ा

    क्‍या आपके साथी वीकएंड पर अपने दोस्‍तों के साथ मौज-मस्‍ती करना चाहते हैं। देर रात पार्टी करके घर आना चाहते हैं। क्‍या वह पूरा-पूरा दिन सिर्फ ऑर सिर्फ काम में लगे रहते हैं। क्‍या उसकी आदत बेकार के कामों में पैसा उड़ाने की है। क्‍या वे सबके साथ फ्लर्ट करते हैं। और क्‍या एक दूसरे को बार-बार परेशान करने की आदत आपके रिश्‍ते के लिए अच्‍छी नहीं।

    झगड़ा
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    तेरा साथ

    मुश्किल वक्‍त में आपको एक दूसरे का साथ देना चाहिये। कहते हैं तो मुश्किल में आपका साथ देता है वही सच्‍चा साथी होता है। जरूरी है कि आप एक दूसरे की जरूरतों को समझें। एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करें। आप जानें कि आपके साथी को किस बात से नाराज होता है और कौन सी बात उसे खुशी देती है। सामंजस्‍य, सम्‍मान और संतुलन ये तीन चीजें किसी भी रिश्‍ते के लिए अहम होती हैं।

    तेरा साथ
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