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नेपाल भूकंप में बचे लोगों का इन 7 स्वास्थ्य चुनौतियों से होगा सामना

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 02, 2015
नेपाल में भूकंप के कारण हुई तबाही के बाद जिंदगी अभी भी पटरी पर लौटी नहीं बल्कि लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य की चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं, जो लोग भूकंप में बच गए हैं वो उनका इन स्‍वास्‍थ्‍य चुनातियों से सामना होगा।
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    भूकंप के बाद अब सेहत का खतरा

    नेपाल में आए भयानक भूकंप से पूरा विश्व हिल गया है। भूकंप के कुछ सैकेंड्स के झटकों ने नेपाल के कई इलाकों, खासतौर पर राजधानी काठमांडू को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे उबरने में उस देश को ना जाने कितने साल लग जाएंगे। हज़ारों लोग इस भूकंप में अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, जो लोग भाग्यशाली थे और इस भयंकर आपदा में बच गए, उनके सामने स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। आइये जानते हैं ऐसी ही 7 चुनौतियों के बारे में जिनका सामना करना आसान नहीं होगा।

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    भूकंप के बाद अब सेहत का खतरा
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    स्वच्छ पेयजल की कमी

    स्वच्छ पेयजल हर इंसान की बुनियादी जरूरत है। लेकिन कोई भी प्राकृतिक आपदा आने पर इसी की कमी का सामना सबसे पहले करना पड़ता है जो कि एक गंभीर समस्या बन जाती है। नेपाल में भी यही हाल है। वहां लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि नेपाल ताजा जल के लिए बड़े पैमाने पर टैंकरों और कुओं पर निर्भर है। भूकंप के बाद जलापूर्ति बाधित हो गई और कई कुएं क्षतिग्रस्त हो गए जिससे जल जनित रोगों जैसे कि डायरिया, पीलिया, उल्टी-दस्त, फूड-पॉइजनिंग जैसी कई समस्याओं की आशंका बढ़ गई।  

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    स्वच्छ पेयजल की कमी
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    विषाणु जनित रोगों का खतरा

    इतनी गंभीर आपदा के बाद अब नेपाल में लोगों के ऊपर विषाणु जनित रोगों का भी खतरा मंडरा रहा है। कई शव अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं और सड़ गए हैं। ऐसे शवों के आसपास अगर जीवित व्यक्ति रहते हैं तो वो गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

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    विषाणु जनित रोगों का खतरा
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    अस्पतालों में जगह नहीं

    भूकंप में काठमांडू और आसपास के इलाकों के कई अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। जो बचे हैं, वहां क्षमता से अधिक घायल मरीज इलाज के लिए पड़े हुए हैं। काठमांडू सहित जिला मुख्यालयों में अस्पताल खचाखच भरे हुए हैं और मेडिकल आपूर्ति एवं सुविधाओं का अभाव है। कुछ लोगों का इलाज तो सड़कों पर किया जा रहा है। ऐसे में घायलों को सही इलाज मिल भी पाएगा या नहीं, ये कोई नहीं कह सकता।

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    अस्पतालों में जगह नहीं
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    खुले में रहने की मजबूरी

    एक अनुमान के मुताबित गोरखा ज़िले जैसे इलाकों में 90 प्रतिशत तक घर जमींदोज हो चुके हैं। ज्यादातर लोग खुले में सो रहे हैं। जिन लोगों के घर सुरक्षित हैं या दरारें आई हैं वो भी आफ्टरशॉक्स की वजह से घर में नहीं रहना चाहते। खुले में रहने से असुरक्षा बढ़ जाती है और बहुत सारे स्वास्थ्य के खतरे होते हैं। खासतौर पर, खुले में रहते हुए शौच के लिए भी खुले में जाना पड़ता है। ये वातावरण को प्रदूषित करके आपको ही नुकसान पहुंचाता है। नेपाल में अब यही हालात बनने लगे हैं।

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    खुले में रहने की मजबूरी
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    कुपोषण की समस्‍या

    भूकंप जब इतने बड़े पैमाने पर लोगों की ज़िंदगियों को प्रभावित करता है तो खाने-पीने की कमी होना लाजमी हो जाता है। राहत सामग्री में पहुंच रही देरी, सब कुछ खो जाना, दुकानें वगैरह टूट जाना आदि कारणों से लोगों को खाने पीने के लिए ठीक से नहीं मिल पा रहा। ऐसे में जरूरी पोषण मिलना तो दूर पेट भरना भी एक चुनौती है। ये आपदा कुपोषण का कारण भी बन रही है।

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    कुपोषण की समस्‍या
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    वैक्सीनेशन में देरी

    दुनिया के सभी देशों में कोई न कोई सेहत से जुड़ा कैंपेन चल रहा है। इसी तरह नेपाल में भी कई कैंपेन चल रहे थे। इन्हीं में से एक बड़ा कैंपेन वैक्सीनेशन का भी था। मीसल्स जैसी जानलेवा बीमारियों सेबचाने के लिए बच्चों को वैक्सीन दी जा रही थी लेकिन भूकंप आने के बाद देश की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। यूएन ने ये आशंका जताई है कि मीसल्स/रूबैला वैक्सीन कैंपेन इससे प्रभावित हो सकता है।

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    वैक्सीनेशन में देरी
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    नींद से जुड़ी बीमारियां

    नेपाल में आई त्रासदी इतनी भयानक है कि जिन लोगों ने उसे झेला है वो सालों साल उसे भूल नहीं पाएंगे। लगातार तीन दिन आए आफ्टर शॉक्स की वजह से भी लोग डर गए थे। ऐसे में लोग वहां सो नहीं पा रहे हैं। जान तो बच गई लेकिन सिर से छत छिन गई, और इस वजह से आंखों से नींद भी छिन गई है। ठीक से न सोने की वजह से पीड़ित लोगों को बहुत सी मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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