इन 5 तरीकों से अपने शहर में बंगाल के दुर्गा पूजा का करें अनुभव

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 07, 2015

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दुर्गा पूजा का नाम सुनते ही आपके मन में जो छवि बसती है वह है बंगाल की, लेकिन अगर इन बातों का ध्‍यान रखें तो आप कहीं भी बंगाल के दुर्गा पूजा का अनुभव कर सकते हैं।
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    भव्‍य दुर्गा पूजा और बंगाल

    शारदीय नवरात्र यानी दुर्गा पूजा की तैयारियां और दशहरा। इसके लिए दुर्गा पूजा की तैयारियां जगह-जगह पूरे भारत देश में कई महीने पहले शुरू हो जाती है। लेकिन पूरे भारत में अगर सबसे अलग तरीके और भव्‍यता से दुर्गा पूजा कहीं मनाया जाता है तो वह है बंगाल। इसलिए सब दुर्गा पूजा के लिए बंगाल ही जाना चाहते हैं। लेकिन यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिसे आजमाकर आप अपने शहर में ही बंगाल के दुर्गा पूजा का अनुभव कर सकते हैं।

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    मूर्तियां होती हैं तैयार

    शहर के उन जगहों में जाइए जहां पर मूर्तियां तैयार हो रही हैं। बंगाल में गली-गली में इस समय मूर्तियां तैयार होना शुरू हो जाती हैं। इसी के तर्ज पर भारत के अन्य शहरों में भी मूर्तिकार अपने-अपने मोहल्ले के पंडालों के लिए भव्य मूर्तियां तैयार करते हैं। तो उन जगहों पर आप एक बार जरूर जायें।

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    मेला, झूले और स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन

    षष्ठी से शहर के पंडालों में मेला लगना शुरू हो जाता है जिसमें तरह-तरह के झूले लगे होते हैं और खाने की चीजों की दुकान लगी रहती है। साथ ही कई तरह की लाइटों से जगमगाते हुए शहर का नजारा आंखों के सामने कलकत्ता का प्रतिबिंब बना देता है।

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    बोधन, आमंत्रण एवं प्राण प्रतिष्ठा

    षष्ठी के दिन शहर के पंडालों में दुर्गा देवी का बोधन, आमंत्रण एवं प्राण प्रतिष्ठा आदि का आयोजन किया जाता है। उसके उपरांत सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी के दिन प्रातः और सायंकाल दुर्गा की पूजा में व्यतीत होते हैं। जो माहौल को भक्तिमय बना देते हैं।

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    बलि और खान-पान

    नवमी के दिन मां को बलि चढ़ाई जाती है। जिसके बाद प्रसाद वितरण किया जाता है और लोग अपना नवरात्रि का व्रत तोड़ते हैं। इसे देखने के लिए आप अपने मोहल्‍ले के पंडाल में जा सकते हैं। बिल्कुल बंगाल का नजारा आपको अपने आंखों के सामने नजर आ जाएगा ।

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    मूर्ति विसर्जन और सिंदूर खेला

    आजकल हर शहर में बंगालियों की उपस्थिती ने इसे हर भारतीयों के सबसे रोचक और पसंदीदा प्रथा में बदल दिया है। अंतिम दिन मूर्ति के विसर्जन के समय शादी-शुदा महिलाएं मां को सिंदूर चढ़ाती हैं और एक-दूसरे के साथ सिंदूर खेलती हैं। उसके बाद मां की मूर्ति को गाड़ी में विसर्जित करने के लिए नदी ले जाया जाता है। आप चाहें तो उनकी इस प्रथा में हिस्‍सा ले सकती हैं।

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