बुजुर्गों के लिए कुर्सी पर बैठकर किये जाने वाले 5 योगासन

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 11, 2016

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उम्र के साथ शरीर का कमजोर होना लाज़िमी है। लेकिन शरीर का पूरी तरह से कमजोर होना या ना होना आपके हाथ में है। ये 5 योगासनकर आप बड़ी उम्र में भी खुद को रख सकते हैं फिट।
  • 1

    बुजुर्गों के लिए योगा

    अब ये सर्वविदित है कि योगा सबके लिए फायदेमंद है। लेकिन क्या योगा सब लोग कर सकते हैं? बुजुर्ग, विक्लांग, चोटिल आदि सभी? जी, हां! आप कुर्सी पर बैठे बैठे भी योगा कर सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही योग मुद्राओं की चर्चा की जा रही है।

  • 2

    हाथों को उठाना (उध्र्व हस्तासन)

    सांस लेते हुए अपने हाथों को कान से छुआते हुए ऊपर की ओर ले जाएं। पैरों को जमीन पर समतल रखें। अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। चेयर पर बैठे बैठे किये गए इस आसन की बदौलत रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक असर पड़ता है।

  • 3

    सीधे होकर बैठना (सुखासन)

    सामान्यतः हम सुखासन, वज्रासन आदि में सीधे होकर बैठते हैं। सीधे होकर बैठने से हम कई किस्म की समस्याओं से मुक्त हो जाते हैं। खासकर पीठ, कमर और गर्दन के दर्द। इसके लिए सिर्फ आपको इतना करना है कि सीधे होकर बैठते हुए अपनी सांसों पर नियंत्रण रखें। लम्बी सांसें लें और छोड़ें।

  • 4

    माउंटेन पोज़

    माउंटेन मुद्रा को समस्थिति भी कहा जाता है। इस मुद्रा के जरिये हम अपने शरीर के ऊपरी भाग से तनाव घटा सकते हैं। इसमें आपको सिर्फ इतना करना होता है कि कुर्सी पर सीधे होकर बैठें। हाथों को ढीला छोड़ें। फिर सांस लेकर हाथों को ऊपर की ओर खींचे और नज़रें दो हाथों के बीच के गैप की ओर हो। ऐसा पांच बार करें।

  • 5

    छाती की सेहत

    दोनों हाथों की अंगुलियों को लाक करके हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाएं। हाथों को जितना संभव हो स्ट्रेच करें। इस दौरान सांस लेने की गति पर ध्यान दें। धीरे धीरे सांस लें और छोड़ें। ऐसा बाई और दाईं तरफ भी करें। इस योगा मुद्रा से आपकी छाती और कंधों को आराम मिलता है। यही नहीं अंगुलियों को भी दर्द से राहत मिलती है।

  • 6

    सिर पीछे की ओर झुकाएं

    जिस तरह कंधों और गर्दन की राहत के लिए सिर आगे की ओर झुकाया जाता है। ठीक इसी तरह सिर पीछे की ओर भी झुकाया जाता है। लेकिन सिर पीछे की ओर झुकाते वक्त ध्यान रखें कि पेट स्ट्रेच हो। पेट पर झुकाव कतई नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से सीने में बाहर की तरफ उभार होता है। हाथ जांघों के ऊपर रखें। इस दौरान अपनी सांसों की गति पर नियंत्रण करें। ऐसा कम से कम पांच बार करें।

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