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21वीं सदी की 12 चुनौतीपूर्ण संक्रामक बीमारियां

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 16, 2014
च‍िकित्सा विज्ञान ने एक ओर काफी तरक्की कर ली है, वहीं दूसरी ओर इसके सामने कई नयी चुनौतियां भी आ रही हैं। 21वीं सदी की ऐसी ही कुछ खतरनाक संक्रामक बीमारियों की जानकारी।
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    घातक बीमारियां

    चिकित्सा विज्ञान जैसे-जैसे तरक्की कर रहा है, वैसे-वैसे इनसानी जीवन के लिए घातक नये-नये वायरस सामने आते रहे हैं। संक्रामक बीमारियां लगातार इनसानी जिंदगी के लिए खतरा बनी हुई हैं। और विज्ञान के सामने इनसे पार पाने की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। आइये जानने का प्रयास करते हैं 21वीं सदी के सबसे खतरनाक संक्रामक रोगों के बारे में। और जानते हैं कब कब इन्होंने इनसानी जिंदगी के लिए खतरा पैदा किया। Image Courtesy- Getty Images

    घातक बीमारियां
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    मर्स (MERS)

    मिडिल ईस्ट रेस्प‍िरेटरी सिंड्रोम सॉर्स की तरह एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है।  यह बीमारी स्तनधारियों में सांस संबंधी तकलीफ पैदा करती है। 2012 में इस बीमारी का पता तब चला जब एक व्यक्ति की सॉर्स जैसी बीमारी के कारण मौत हो गई। मर्स में निमोनिया और किडनी फैल्योर जैसे प्राणघातक असर हो सकते हैं। इस बीमारी के 60 फीसदी मरीज जान गवां देते हैं। मर्स अब तक सामने आए अन्य कोरोनवायरस से ज्यादा खतरनाक है।

    मर्स (MERS)
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    सॉर्स

    सवेयर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी सॉर्स सांस संबंधी बीमारी है। यह सॉर्स कोरोनावायरस से फैलती है। यह सामान्य निमोनिया से लेकर घातक रूप ले सकती है। नवंबर 2002 में सॉर्स चीन से फैलना शुरू हुआ और वहां से हॉन्गकॉन्ग में फैल गया। इसके बाद 2003 तक यह 37 देशों में फैल चुका था। आधिकारिक तौर पर इस बीमारी के 8273 मरीज सामने आये और मौत का आंकड़ा रहा 775।

    सॉर्स
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    स्वाइन फ्लू

    स्वाइन फ्लू इस प्रकार का इंफ्लूएंजा है जो सुअरों को प्रभावित करता है। 2009 में पहली बार एच1एन1 वायरस का नाम सामने आया। सुअरों से इनसानों में इस बीमारी का फैलना सामान्य तौर पर नहीं लिया गया। लेकिन लगातार सुअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों में इस बीमारी से संक्रमित होने का खतरा काफी अधिक रहा। 2010 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आधि‍कारिक तौर पर इस बीमारी के खत्म होने की घोषणा की।

    स्वाइन फ्लू
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    बर्ड फ्लू

    बर्ड फ्लू एक प्रकार का रोग है, जो पक्ष‍ियों को प्रभावित करता है। खासतौर पर पॉल्ट्री फॉर्म में रहने वाली मुर्गियों को। यह बीमारी मनुष्यों को भी हो सकती है। आमतौर पर यह बीमारी बहुत घातक है। एच5एन1 वायरस एशिया में 2003 में फैलना शुरू हुआ। इसके बाद यहां से यह बीमारी 2006 में यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका में फैली। चीन में 2012 में बर्ड फ्लू के कारण दूसरी मौत हुई।

    बर्ड फ्लू
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    मेड कॉव डिजीज (Mad cow disease)

    बोविन स्पोनगिफॉर्म एन्सेफालॉपैथी (Bovine spongiform encephalopathy) को आम बोलचाल की भाषा में मेड काउ डिजीज कहा जाता है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में स्पॉन्जी अध:पतन के कारण होता है। यह बीमारी बहुत घातक है। अकेले यूके में इस बीमारी ने 1 लाख 80 हजार से ज्यादा जानवर संक्रमित हुए। वहीं करीब 44 लाख जानवर को बीमारी के कारण मारना पड़ा। यह बीमारी आसानी से मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि कोई मनुष्य संक्रमित भोजन का सेवन कर ले, तो उसमें में इसके जीवाणु प्रवेश कर सकते हैं। अक्टूबर 2009 तक यूके में इस बीमारी के कारण 166 लोगों ने अपनी जान गवांयी वहीं अन्य इलाकों में यह आंकड़ा 44 रहा ।

    मेड कॉव डिजीज (Mad cow disease)
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    एचआईवी/एड्स

    ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम के नाकाम होने के कारण होती है। इससे इनसान को हर छोटी-मोटी बीमारी प्रभावित करने लगती है। अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज न किया जाये, तो एचआईवी संक्रमण एड्स में तब्दील हो सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण शरीर को कई संक्रमण और बीमारियां होने का खतरा होता है। एचआईवी शरीर में रक्त, वीर्य और यौनिक द्रव्य और स्तन दुग्ध के जरिये फैलता है। संयुक्त राष्ट्र की एड्स रिपोर्ट के मुताबिक 2001 से दुनिया भर में एचआईवी सं‍क्रमित बच्चों की संख्या में 52 फीसदी कमी आई है और वहीं बच्चों और व्यस्कों में मिलाकर 33 फीसदी कमी आई है।

    एचआईवी/एड्स
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    डेंगू

    डेंगू वायरस के कारण फैलता है। यह वायरस मच्छरों में रहता है। किसी भी इनसान को डेंगू तभी हो सकता है, जब उसे डेंगू वायरस वाले मच्छर ने काटा हो। इसके अन्य लक्षणों के अलावा तेज बुखार और जोड़ों में दर्द देखा जाता है। इसके साथ ही डेंगू के कारण होने वाले बुखार का अगर इलाज नहीं किया जाए, तो यह प्राणघातक भी हो सकता है। डेंगू दुनिया के करीब 110 देशों में फैल चुका है और इसके इलाज के लिए सटीक दवा बनाने का काम चल रहा है।

    डेंगू
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    मलेरिया

    मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है। यह बैक्टीरिया से फैलता है। इस मच्छर का वायरस पारासाइट के लिए एनोफेलस मच्छर वाहक का काम करता है। इसमें तेज बुखार और ठण्ड लगने जैसी परेशानियां होती हैं। इसके साथ ही इसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होती जाती है। यह कटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय इलाकों में अधिक देखी जाती है।

    मलेरिया
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    कोलेरा (Cholera)

    यह छोटी आंत में होने वाली बीमारी है। यह रोग दूषित पानी पीने से फैलता है। इसके कारण उल्टी, डायरिया और आमतौर पर मौत भी हो सकती है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में इस बीमारी से हर बरस 30 से 50 लाख लोग प्रभावित होते हैं और करीब एक लाख लोगों की मौत होती है। इसके इलाज में ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी और एंटीबैक्टीरियल दवाओं का सेवन किया जाता है। Image Courtesy- TopNews.in

    कोलेरा (Cholera)
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    एबोला वायरस डिजीज (Ebola virus disease)

    एबोला फीवर यह संक्रमित और घातक बीमारी है। इसमें बुखार और अंदरूनी रक्तस्राव की परेशानी हो सकती है। यह बीमारी शरीर के संक्रमित तरल पदार्थों से संपर्क के कारण होता है। इस बीमारी में मौत की आशंका 90 फीसदी तक होती है। यह बीमारी आमतौर पर अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में देखने को मिलती है। दुर्भाग्य से इस बीमारी का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है।

    एबोला वायरस डिजीज (Ebola virus disease)
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    वेस्ट नाइल वायरस (West Nile virus)

    डब्ल्यूएनवी मच्छरों में पैदा होने वाला वायरस है, जो मनुष्यों में भी फैल सकता है। इस वायरस को पहले पहल नील नदी के पश्चिम में युगांडा में 1937 में देखा गया। लेकिन 1994 में अल्जीरिया में यह बीमारी बहुत घातक रूप में फैली। यहां से यह अमेरिका, कनाडा, कैरीबियाई द्वीपों और लातिन अमेरिकी देशों में भी फैल गई। इसके लक्षणों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द से लेकर नौजिया तक हो सकते हैं।

    वेस्ट नाइल वायरस (West Nile virus)
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    एंथ्रेक्स

    एंथेक्स एक बैक्टीरिया भेड़ों और जानवरों में पायी जाने वाली बैक्टीरियल बीमारी है। यह बैक्टीरियम बेकील्लूस एंथ्राकिस के कारण होती है। यह बैक्ट‍ीरिया हमारी त्वचा और फेफड़ों को प्रभावित करता है। मनुष्यों में यह बैक्टीरिया स्किन अल्सर का कारण बन सकता है। इस बीमारी का प्रभाव बहुत घातक होता है, हालांकि अब इसके लिए इलाज के लिए दवायें मौजूद हैं। एंथेक्स सांस या छूने से फैलने वाले जीवाणुओं के जरिये फैलता है।

    एंथ्रेक्स
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