आलोचनाओं को स्‍वीकार करना सीखें

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 13, 2014

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आपको तारीफ तो पसंद होगी, लेकिन आलोचना शायद हर कोई पसंद नहीं करता। लोग आलोचना को आत्‍मसम्‍मान से जोड़ लेते हैं। जबकि आलोचना पूरी तरह से इसके उलट होती है। स्‍वस्‍थ आलोचना किसी व्‍यक्ति को बेहतर इनसान बनाने में मदद करती है।
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    क्‍या आप आलोचना स्‍वीकार कर सकते हैं

    तारीफ तो सभी को पसंद होती है, लेकिन आलोचना सुनना हर किसी को पसंद नहीं होता। हर व्‍यक्ति आलोचना को सम्‍मान के साथ स्‍वीकार नहीं कर पाता। लोग आलोचना को आत्‍मसम्‍मान से जोड़ लेते हैं। जबकि आलोचना पूरी तरह से इसके उलट होती है। स्‍वस्‍थ आलोचना किसी व्‍यक्ति को बेहतर इनसान बनाने में मदद करती है।

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    आलोचक पहुंचा रहा है आपको नुकसान

    यदि आप अपने आलोचक पर विश्वास करते हैं। आपको मालूम है कि उसकी आलोचना आपकी बेहतरी के लिए है, तो उसे स्‍वीकार करें। लेकिन, यदि उस व्‍यक्ति के दिल में आपके लिए अच्‍छी भावनायें नहीं हैं, तो बिन-बुलायी आलोचना को अस्‍वीकार करना आपका अधिकार है। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप आक्रामक होकर उसका जवाब दें। यदि कोई बिन-बुलाया आलोचक लगातार आपकी आलोचना करता रहता है, तो आप उसे कह सकते हैं कि किसी मधस्‍थ के सामने बात करना ही बेहतर होगा। यदि आप रिश्‍ता नहीं रखना चाहते हैं, तो यह आपका अधिकार है कि आप उसकी बातों को अनसुना कर दें। लेकिन, ऐसे लोगों की आलोचनाओं का स्‍वागत किया जाना चाहिए, जो आपकी मदद करना चाहते हों।

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    ध्‍यान से सुनें

    जब आपका अहं सुरक्षात्‍मक और दुखी अनुभव कर रहा हो, उस समय किसी दूसरे की बात सुनना मुश्किल हो जाता है। इस वक्‍त आप बीच में बोलकर स्‍वयं को बचाने में लग जाते हैं। कई बार दूसरे व्‍यक्ति की बात खत्‍म भी नहीं हुई होती और आपका पूरा ध्‍यान दूसरे व्‍यक्ति की बात को काटने में होता है। इस आदत से बचें। बात पूरी हुए बिना बीच में बोलना सभ्‍य आदत नहीं। किसी की बात नहीं काटनी चाहिए, भले ही वह आपका आलोचक ही क्‍यों न हो। पूरे ध्‍यान से उस व्‍यक्ति की बात सुनें और अपनी बात कहने से पहले उसकी बात खत्‍म होने का इंतजार करें।

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    शांत रहें

    कोई व्‍यक्ति सिर्फ इसलिए बुरा नहीं हो जाता कि वह आपकी आलोचना करता है। बेशक, आप बेहतरीन इनसान हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि आप में सुधार की गुंजाइश ही न हो। अपनी गलती स्‍वीकार करने में झिझकें नहीं।

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    असहमति न होने पर भी आलोचना सुनें

    आपके आलोचक ने जो कहा है उसे स्‍वीकार करना सीखें। अपने आलोचक के उसकी प्रशंसा करें कि उसने आपको आपकी गलती बताने का साहस किया। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपनी आलोचना को मान ही लें, लेकिन आपको आलोचना करने वाले के लिए माकूल माहौल बनाना चाहिए। आलोचना करने वाले को इस बात का डर नहीं होना चाहिए इसका असर आपके रिश्‍ते पर पड़ सकता है। यदि किसी आलोचक ने मन में किसी भी प्रकार का बैर रखे बिना आपसे कोई बात कही है, तो आपको प्रसन्‍न होना चाहिए कि आपके पास एक ऐसा व्‍यक्ति है जो आपको, खुश, सेहतमंद, अधिक राचनात्‍मक और जीवन में अधिक संतुलित बनाना चाहता है। अचेतन में बैठी आदतों से इतनी आसानी से छुटकारा पाना आसान नहीं होता। इसके‍ लिए आपको ऐसे ही शुभचिंतक आलोचकों की जरूरत होती है।

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    आलोचना को सत्‍य से परखें

    आलोचना को यूं ही स्‍वीकार न करें, लेकिन इसे यूं ही दरकिनार भी न कर दें। किसी भी आलोचना को स्‍वीकार करने या उसे भूल जाने से पहले जरूरी है कि आप उसे सत्‍य के धरातल पर परख लें। आप जान लें कि आपके बारे में जो कुछ भी कहा गया है, वह सच है या नहीं। इसके लिए गहरे तटस्‍थ आत्‍म-विश्‍लेषण की जरूरत होती है। अपने अहं को भूलकर आलोचना को सुनें और तय करें कि क्‍या यह वाकई सही बात है अथवा नहीं। और इसके बाद जो बात सही लगे उसे मानें, और जो सही न हो उसे भूल जाने में ही बेहतरी है।

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    अनुमानों का आकलन करें

    कई बार लोग आपकी आलोचना करने के चक्‍कर में अपनी आलोचना करने लगते हैं। उन्‍हें अपनी जो बातें पसंद नहीं होतीं, वे आप पर उन बातों का ठीकरा फोड़ने लगते हैं। वे उन कमियों को आपमें गिनाने लगते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप एक ऐसी नौकरी छोड़ना चाहते हैं, जिसमें आप खुश नहीं हैं, तो कोई दूसरा व्‍यक्ति जो स्‍वयं उस नौकरी से नाखुश है, आप पर गैर-जिम्‍मेदार होने का तमगा लगा सकता है। जबकि यह आपके बारे में नहीं है, यह उसके बारे में है।

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    जो बेकार हो उसे फेंक दें

    यदि कोई बेमतलब आपकी आलोचना करता रहे या यदि आपको लगे कि यह आलोचना केवल उसके नजरिये पर निर्भर करती है, उसे भूल जाएं। इस बेमतलब और कुटिल आलोचना को अपने व्‍यक्तित्‍व पर हावी न होने दें। यदि आपका बॉस अथवा क्‍लाइंट आपकी आलोचना कर रहा है, तो आपके पास सिवाय सुनने के कोई दूसरा विकल्‍प नहीं होता है। लेकिन, यदि कोई आपका करीबी आपकी किसी बात पर आलोचना करता है, जो आपकी नजर में ठीक नहीं है, तो बड़े आराम से अपनी बात उसे बता दें।

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    जो सही लगे उसे स्‍वीकार करें

    यदि आपका आलोचक सही है, तो उसकी बात को मानने में कोई परहेज नहीं। आलोचना से मिली सीख आपको बेहतर इनसान बनने में मदद करेगी। इसके साथ ही आपकी आलोचना करने वाले को इस बात को लेकर संतुष्टि होगी कि उसकी बात सुनी और मानी गयी है।

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    ग्‍लानि न करें

    यदि आपका आलोचक यही है, तो उसकी बात को स्‍वीकार करें। खुद में बदलाव लाने का प्रयास करें। लेकिन, इसके लिए आत्‍म-ग्‍लानि न करें। आलोचना को लेकर खुद पर शर्म महसूस न करें, इससे आपको कोई फायदा नहीं होगा।

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    आलोचनायें बनायें बेहतर

    आलोचना के बाद आपका अहं जरूर चोटिल महसूस कर रहा होगा। ऐसे में स्‍वयं को सहज महसूस कराने के लिए सार्थक पहल करें। फुट मसाज करें, नहायें। अच्‍छी किताब पढ़ें या फिर कोई मजेदार फिल्‍म देखें। किसी नजदीकी दोस्‍त को फोन करें और अपने दिल की बात कहकर हल्‍का महसूस करें। आलोचना सुनने के बाद भी अपना संयम बनाये रखने के लिए खुद को तोहफा दें।  जब हम अपनी आलोचना को शांति से स्‍वीकार करते हैं, तभी हम बेहतर इनसान बनते हैं।

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