कैंसर के लिए जिम्‍मेदार इन 10 आहारों से बनायें दूरी

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 01, 2015

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हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए नियमित आहार में क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं इसपर ध्‍यान देना बहुत जरूरी है,क्‍योंकि बहुत से आहार के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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    आहार से कैंसर का खतरा

    भारत में पिछले दो दशकों में कैंसर के मामलों में लगभग दो तिहाई से अधिक की वृद्धि हुई है और प्रति वर्ष लगभग 17 लाख नये मामले प्रकाश में आ रहे हैं। कैंसर से होने वाली मृत्यु-दर भारत में अनेक कारणों से पाश्चात्य देशों की अपेक्षा अधिक है। इसके कारणों में से अनियमित आहार भी शामिल है। कैंसर के मरीजों में लगातार हो रही बढ़त कुछ हद तक हमारे खाने-पीने की चीजों पर भी निर्भर करती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पेट, प्रोस्‍टेट, आंत, लंग और गर्भाशय कैंसर आहार में फैट की मात्रा अधिक होने के कारण विकसित होते हैं। इसलिए इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए हमें नियमित आहार में क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं, इस पर ध्‍यान देना चाहिए। आइए ऐसे ही कुछ आहार के बारे में जानते हैं जिनके सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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    रेड मीट की लालसा

    हालांकि वाइट मीट की तुलना में रेड मीट को देखते ही हम ललचाने लगते हैं। और कम मात्रा में सेवन से यह कुछ तरह के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मदद करता है। लेकिन विभिन्‍न अध्‍ययनों के अनुसार, रेड मीट के सेवन से कैंसर से होने वाली मृत्‍यु का खतरा लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। रेड मीट में वैसे तो लिनोलिक एसिड का गुण होता है। लेकिन इसे हर रोज खाना बहुत खतरनाक होता है और इसके लगातार सेवन से कैंसर का जोखिम बढ जाता है। यह स्तन, बड़ी आंत एवं प्रॉस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ाने में भी सहायता करता है। यह सलाह दी जाती है कि सप्ताह में 300 ग्राम से अधिक रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए।
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    आर्टिफिशियल शुगर मतलब मीठा जहर

    चीनी के ज्‍यादा सेवन करना नुकसानदेह होता है, और इसके ज्‍यादा सेवन से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है, और वजन में भी लगातार बढ़ोतरी होने लगती है। यह बात तो हम सभी जानते है। लेकिन क्‍या आज जानते हैं कि चीनी की जगह इस्‍तेमाल किये जाने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर एक तरह का केमिकल है। आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वाद चीनी की तरह ही होता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यह किसी मीठे जहर से कम नहीं है। ओहियो यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर और चेयरमैन डॉक्टर राल्फ वॉटसन के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर से सिरदर्द, याददाश्त की कमी, अचानक चक्कर आकर गिर पड़ना और कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसके सेवन से मस्तिष्क ट्यूमर की संभावना बनी रहती है।
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    रिफाइंड शुगर का असर

    कैंसर कोशिकाओं को रिफाइंड शुगर पसंद होता है, जो इंसुलिन के स्‍तर को बढ़ाकर, कैंसर के विकास को बढ़ावा देती है। इसके लिए हाई फ्रूक्‍टोज कॉर्न सिरप सबसे बड़ा अपराधी माना जाता है और यह किसी भी मिठाई में पाया जा सकता है। इसके सेवन करने से कैंसर की संभावनाएं बनी रहती है। यह कैंसर कोशिकाओं में आसानी से जगह बना लेता है।
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    प्रोसेस्‍ड सफेद आटा भी है नुकसानदेह

    सफेद आटा आपकी सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता, क्‍योंकि वह प्रोसेस्‍ड होने के कारण सफेद होता है और इसमें सैचुरेटेड फैट की बहुत अधिक मात्रा में होती है। सैचुरेटेड फैट का संबंध कैंसर से होता है। इसमें अधिक केमिकल और क्लोरीन गैस होती है। इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। सफेद चावल भी अम्लीय खाद्य पदार्थ की सूची में आते है, क्योंकि इसमें ब्राउन चावल की तुलना में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। अगर किसी को कैंसर के शुरुआती लक्षण दिखें तो इसे खाने से बचना चाहिए।  
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    कहीं आप भी आलू चिप्स के शौकीन तो नहीं

    आलू के चिप्स या फेंच फ्राई जैसी चीजो के शौकीन लोगों को सावधान हो जाना चाहिए क्‍योंकि अभी तक तो ये केवल मोटापे और दिल के रोगों को बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार माने जाते थे लेकिन अब यह माना जा रहा है कि ये कैंसर का कारण भी है। स्वीडन में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, स्टार्च वाले कुछ खाद्य पदार्थों में ऐक्रिलामाइड नामक एक केमिकल पाया जाता है। ऐक्रिलामाइड एक ऐसा तत्व है, जो 120 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक तापमान पर पकाए, तले अथवा ग्रिल किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में उपस्थित होता है। और कैंसर से संबधित होता है। स्टॉकहोम विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कार्बोहाइड्रेट से भरे आलू या चावल आदि को पकाया जाता है तो ऐक्रिलामाइड बनता है।
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    टाइम पास माइक्रोवेव पॉपकॉर्न से बचें

    हर कोई पॉपकार्न खाने के लिए उतावला रहता है। चाहे मूवी हॉल हो या घर में दोस्‍तों के साथ मैच देखने का प्रोग्राम, इस समय पॉपकॉर्न को सभी खाना पसंद करते हैं। यह एक टाइम पास, सस्ता और स्वादिष्ट आहार है। और इसे माइक्रोवेव में बनाना बहुत आसान और सुविधाजनक होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इसको बनाते समय इसमें एक (PFOA) केमिकल डाला जाता है जो बहुत खतरनाक होता है। इसके खाने से लोगों का किडनी, मूत्राशय, लीवर और आंत कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एक अध्‍ययन के अनुसार माइक्रोवेव में बने पॉपकार्न का प्रयोग करने से फेफड़ों के कैंसर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।    
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    एल्कोहल भी है घातक

    एल्कोहल के अधिक सेवन से डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है। जो लोग शराब पीते हैं और दो वंशानुगत कैंसर जीन उनमें हैं तो शराब से पैदा होने वाले एक उपात्पाद के कारण उनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आजकल महिलाएं भी इसका आनंद लेने में पीछे नहीं रह गयी है। लेकिन एक ताजा स्टडी के अनुसार एल्कोहल पीने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की दर में 30 प्रतिशत की वृद्दि हुई है।
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    डोनट्स खाने को मन ललचाये

    खाने और देखने में कमाल डोनट्स की लालसा आपको अपनी ओर खींच ही लेती हैं। लेकिन डोनट्स कैंसर के खतरे को एक से अधिक प्रकार से बढ़ा सकता है। डोनट्स सफेद आटे, चीनी और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल से बनता है और इसमें उपस्थित चीनी की मात्रा शरीर में इंसुलिन की मात्रा को प्रभावित करती है और कैंसर इन कोशिकाओं की वृद्धि तथा विभाजन को प्रोत्साहित करती है, खासकर अग्नाशय के कैंसर में। इसलिए कैंसर से बचने के लिए इस आहार की लालसा को छोड़ना ही बेहतर है।
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    हॉट डाग्स और सॉस

    हॉट डाग्स और सॉस में बहुत अधिक मात्रा में नमक और केमिकल होता है। इसमें सोडियम नाइट्रेट स्मोक्टड होता है। जिससे कैंसर की उत्पत्ति होती है। अध्‍ययन के अनुसार, इसका नियमित सेवन करने वाले लोगों में सामान्य लोगों के मुकाबले 43 प्रतिशत लोगों की मौत में वृद्धि हुई है।
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    डिब्बा बंद टमाटर और टमाटर से बनी चीजें

    हालांकि टमाटर और टमाटर से बने उत्‍पाद में लाइकोपिन नामक तत्‍व पाये जाने के कारण यह प्रोस्टेट के स्वास्थ के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन डिब्‍बा बंद टमाटर और टमाटर से बने उत्‍पाद से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। टिन के डब्बे की परत में एक सेंथेटिक एस्ट्रोजन बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) पाया जाता है। चूंकि टमाटर एसिडिक होता है, इसलिए बिस्फेनॉल-ए इसमें घुल सकता है। इसलिए आपको डिब्बा बंद टमाटर के उत्पाद से बचना चाहिए।
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