नो स्मोकिंग डे: सेकंड हैंड स्मोकिंग से बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को होते हैं ये 5 खतरे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 14, 2018
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Quick Bites

  • सेकंड हैंड स्मोकिंग से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को होता है
  • सेकंड हैंड स्मोकिंग से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • ज्यादातर लोग समझते हैं कि सिगरेट से सिर्फ फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है।

कई बार लोग खुद को धूम्रपान नहीं करते हैं मगर धूम्रपान करने वाले दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवारजनों के बीच रहकर सेकंड हैंड स्मोकिंग यानि दूसरों के धूम्रपान के धुंए का सेवन करते हैं। ऐसे लोगों को भ्रम हो सकता है कि उन्हें कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा इसलिए नहीं है क्योंकि वो तो सिगरेट पीते ही नहीं। मगर आपको बता दें कि सेकंड हैंड स्मोकिंग भी उतनी ही खतरनाक है जितनी कि फर्स्ट हैंड स्मोकिंग यानि खुद सिगरेट पीना। सेकंड हैंड स्मोकिंग से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को होता है क्योंकि उनके फेफड़े और अंग नाजुक होते हैं और प्रदूषण, धुंए या धूम्रपान के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है जिनके मां-बाप या इनमें से कोई एक स्वयं धूम्रपान करता है।
धूम्रपान से तात्पर्य सिर्फ सिगरेट पीने से नहीं है बल्कि इसके अंतर्गत बीड़ी, तम्बाकू युक्त पदार्थ, सिगार और पाइप भी शामिल हैं। तम्बाकू में लगभग 4000 केमिकल कंपाउंड होते हैं, जिनमें से लगभग 250 केमिकल्स आपकी जान ले सकते हैं। सेकंड हैंड स्मोकिंग के कारण किसी और की गलती की सजा आपको भुगतनी पड़ सकती है। जरूरी नहीं कि आपको कैंसर ही हो, बल्कि कैंसर के अलावा भी कई खतरनाक बीमारियां हैं जो पैसिव स्मोकिंग की वजह से आपको हो सकती हैं।

शिशुओं को खतरा

सेकंड हैंड स्मोकिंग से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को होता है क्योंकि उनके फेफड़े और अंग नाजुक होते हैं और प्रदूषण, धुंए या धूम्रपान के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है जिनके मां-बाप या इनमें से कोई एक स्वयं धूम्रपान करता है। धूम्रपान के संपर्क में रहने से बच्चों को दांतों संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। इसके बच्चों में कैंसर, शुगर, सांस संबंधी कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

प्रेगनेंसी में है खतरनाक

प्रेगनेंट औरत के लिए सेकंड हैंड स्मोकिंग उसके और उसके बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। स्मोकिंग के धुंए के प्रभाव से बच्चे का डेवलपमेंट रुक सकता है और गर्भपात भी हो सकता है। धूम्रपान के धुंए की वजह से SIDS (सडेन इंफैंट डेथ सिन्ड्रोम) का खतरा बढ़ जाता है। इस रोग में पैदा हुए बच्चों की एक साल के अंदर बिना किसी कारण के मौत हो सकती है। कई बार बच्चा समय से पहले पैदा हो सकता है यानि प्री-मेच्योर डिलिवरी हो सकती है, बच्चे का वजन सामान्य से कम हो सकता है, बच्चे की मानसिक क्षमता सामान्य से कम हो सकती है, उसके सीखने और समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अगर मां खुद धूम्रपान करती है तो ये सारे खतरे कई गुना तक बढ़ जाते हैं।

दिली की बीमारियां

पैसिव स्मोकिंग या सेकंड हैंड स्मोकिंग से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान के धु्ंए से आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके धुंए से रक्त की धमनियों में कार्टिसोल जम जाता है और इससे रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। इसकी वजह से आपको हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉक और गंभीर स्ट्रोक का खतरा होता है। लागातार सेकंड हैंड स्मोकिंग के प्रभाव में रहने से दिल के दौरे की संभावना 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

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अस्थमा का खतरनाक अटैक

सेकंड हैंड स्मोकिंड से अस्थमा के सामान्य से लेकर जानलेवा स्तर तक के अटैक का खतरा बढ़ जाता है। हमारे श्वसन नली में छोटे-छोटे रोंए जैसी संरचना होती है जिसे सिलिया कहते हैं। ये हमारे शरीर में धूल और म्यूकस को रोकते हैं और अलग करते हैं। स्मोकिंग के कारण सिलिया पर एक तरह की पर्त जम जाती है जिसके कारण हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और इसके कारण कई बार अस्थमा का जानलेवा अटैक भी आ सकता है।

जानलेवा कैंसर का खतरा

ज्यादातर लोग समझते हैं कि सिगरेट से सिर्फ फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। ये बात सच है कि इससे सबसे ज्यादा फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है लेकिन धूम्रपान या किसी दूसरे के धूम्रपान के धुंए के प्रभाव में रहने से अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा भी 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

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सेकंड हैंड स्मोकिंग से जुड़ी अन्य बीमारियां

इन बीमारियों के अलावा भी सेकंड हैंड स्मोकिंग से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जिनमें किसी और की गलती की सज आपको भुगतनी पड़ सकती है। किसी दूसरे के धूम्रपान के धुंए से आपको रेस्पिरेटरी इंफेक्शन्स जैसे ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, जानलेवा खांसी रोग, कान का इंफेक्शन, फेफड़ों का इंफेक्शन आदि हो सकती हैं।

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