गर्मी में खतरनाक है अल्‍ट्रावॉयलेट किरणों का बढ़ता स्‍तर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 26, 2016
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यूवी किरणों के अधिकतम 10 मानक तक रहने पर खतरनाक नहीं होतीं, लेकिन जैसे ही इसका स्‍तर 12 तक पहुंच जाता है तो यह खतरनाक हो सकती हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 44 डिग्री की गर्मी के साथ-साथ दोपहर में पड़ रहीं अल्ट्रावॉयलेट किरणें खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी मौसम विज्ञान एजेंसी एक्यूवेदर के अनुसार, रायपुर में यह 12 के स्तर तक पहुंच गई हैं। जो शरीर के लिए घातक हो सकता है।

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क्लाइमेटालॉजिकल एक्सपर्ट डॉक्‍टर ए.एस.आर.ए.एस. शास्त्री के अनुसार, एसी का इस्तेमाल बढ़ने और अन्य वजहों से जमीन से करीब 45 किलोमीटर ऊपर ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचा है। यही लेयर यूवी किरणों को सोखती है, लेकिन जहां यह कमजोर हैं, वहां यूवी किरणें ज्यादा बरसने लगती हैं। डॉक्‍टर शास्त्री का कहना है कि इस माह के दूसरे पखवाड़े में छतीसगढ़ समेत पूरा मध्य भारत खुले आसमान के साथ-साथ बेहद गर्म पश्चिमी हवा की चपेट में है। अप्रैल के आखिरी दिनों और मई में तापमान के 44-45 डिग्री तक पहुंचने पर यह और खतरनाक हो सकती हैं।


तेज धूप में इन्हीं किरणों के कारण त्वचा में जलन महसूस होती है, और ज्यादा संपर्क में रहने से त्वचा के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकता है। इसीलिए पर्यावरण विशेषज्ञों ने राजधानी सहित प्रदेशभर में चेतावनी जारी कर दी है। आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने के साथ यह 14 के स्तर तक पहुंचने का खतरा है, जो शरीर के लिए घातक होने लगेगा। एक्यूवेदर ने हाल में देशभर के अलग-अलग हिस्से में अल्ट्रावॉयलेट किरणें गिरने के स्तर की ताजा रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार, मध्य भारत यानी छत्तीसगढ़ और आसपास के हिस्से में यह किरणें 12 मानक पर हैं, जबकि 10 मानक से ऊपर की मात्रा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानी गई है।


अमेरिकी मौसम विज्ञान विभाग की यह एजेंसी सालभर अल्ट्रावॉयलेट किरणों का स्तर मापकर जारी करती है। गर्मी में भारत के लिए यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में सभी जगह तापमान सामान्य से तीन-चार डिग्री तक अधिक है। अगले 24 घंटे के दौरान कहीं-कहीं पर लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। दिन का तापमान 44 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।


क्या हैं यूवी किरणें : यूवी किरणों का मुख्य स्रोत सूर्य हैं। इसके अलावा टेनिंग लैंप और बेड से भी यूवी किरणें निकलती हैं। यूवी किरणें त्वचा-कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाती हैं, इसलिए सर्वाधिक खतरा त्वचा को है. इसी वजह से त्वचा पर लाल चकते पड़ने लगते हैं।


Image Source : Getty

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