दुनिया के आधे बच्‍चे होंगे एलर्जी के शिकार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2013
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बच्‍चों में एलर्जी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भविष्‍यवाणी की है कि अगर यही हाल रहा तो सन् 2050 तक दुनिया के लगभग आधे बच्‍चों को किसी न किसी प्रकार की एलर्जी होगा। यह चलन विकासशील और विकसित दोनों तरह के देशों में देखा जा रहा है।

 

बच्‍चे अब पहले के मुकाबले ज्‍यादा एलर्जी के शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने अपनी जांच में यह पाया है। नाक को प्रभावित करने वाली रायनाइटिस एलर्जी आमतौर पर केवल किशोरों में देखी जाती है। लेकिन, अब बड़ी संख्‍या में स्‍कूली बच्‍चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। श्वास में एलर्जी धूल, मिट्टी, रसायनों व अन्‍य कई कारणों से हो सकती है।

 

बीते एक दशक में बच्‍चों में खाने से होने वाली एलर्जी भी काफी बढ़ गयी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे आम दमा, एक्जिमा, पित्ती (त्वचा पर चकत्ते) और भोजन से संबंधित हैं। विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी इस मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो वर्ष 2050 में दुनिया के पचास फीसदी बच्‍चों को किसी न किसी प्रकार की एलर्जी जरूर होगी।

 

इस मामले में एक बात और देखने में आयी है, वह यह है कि 30 से 50 फीसदी मामलों में बच्‍चों को एलर्जी अपने माता-पिता से मिलती है। पहले के उलट अस्थमा और उससे मिलते-जुलते लक्षण अब एक वर्षीय शिशुओं में भी पाये जाते हैं। आमतौर पर ये लक्षण दो वर्ष या उससे अधिक के बच्‍चों में ही नजर आते थे।

 

हालांकि एक्जिमा का मुख्य कारण शुष्‍क मौसम होता है। लेकिन, लगभग एक तिहाई बच्‍चों में एक्जिमा के साथ फूड एलर्जी होने का खतरा भी रहता है। डॉक्टरों के अनुसार किसी अन्‍य भोजन की तुलना में अंडों से एक्जिमा का खतरा आठ गुना बढ़ जाता है।

 

आमतौर पर पश्चिमी देशों में दूध, नट्स और समुद्री भोजन, जिसमें मछली भी शामिल है, को ऐसे खाद्य उत्पादों को एलर्जी के कारण जाना जाता है लेकिन भारत में एलर्जी के कारण फल और दालें भी है। फूड एलर्जी की समस्या एनआरआई परिवारों के बच्चों में अक्सर देखने को मिलती हैं।

कुछ दवाएं और कीड़े भी एलर्जी कारकों के रूप में कार्य करते हैं। बच्चों में एलर्जी के अन्‍य कारक कारण हैं:
 

• जीवन शैली बदलने से

• प्रदूषण




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