बार्डरलाइन डायबिटीज के बारे में जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 24, 2014
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Quick Bites

  • बॉर्डरलाइन डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है।
  • संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है।
  • हर रोज व्यायाम की मदद से आप इस समस्या से बच सकते हैं।
  • स्वस्थ जीवशैली अपनाएं, जल्दी सोएं और जल्दी उठें।

बॉर्डरलाइन डायबिटीज अथवा प्री-डायबिटीज उस स्थिति को कहा जाता है जब रक्‍त में ग्‍लूकोज का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होता है, पर इतना अधिक नहीं होता कि उसे डायबिटीज कहा जा सके। बॉर्डरलाइन डायबिटीज से ग्रस्‍त अधिकतर लोगों में किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन उन्‍हें हृदय रोग होने का खतरा काफी अधिक होता है।

precaution in diabetesहमारा शरीर इनसुलिन हार्मोन का स्राव करता है, जो भोजन में पाये जाने वाली ऊर्जा (ग्‍लूकोज) को इस्‍तेमाल करने में मदद करता है। डायबिटीज में या तो शरीर पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता या फिर निर्मित हो रहे इनसुलिन का पर्याप्‍त इस्‍तेमाल नहीं कर पाता। जब रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह किडनी, हृदय, आंखों और नर्वस सिस्‍टम में मौजूद रक्‍तवा‍हिनियों को नुकसान पहुंचा सकता है।


कुछ तो गड़बड़ है

प्री-डायबिटीज में ग्‍लूकोज और इनसुलिन का संतुलन हलका सा बिगड़ जाता है। पेनक्रियाज ग्रंथि पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाती जिससे रक्‍त से ग्‍लूकोज की अतिरिक्‍त मात्रा को 'हटा पाना' संभव नहीं हो पाता। या कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं। जब कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं, वे इनसुलिन को रक्‍त में से ग्‍लूकोज  ले जाने से रोकने लगती हैं। रक्‍त में बहुत अधिक शर्करा हो जाने को हाई ब्‍लड शुगर अथवा हायपेरग्‍लासिमा कहा जाता है, लो ब्‍लड शुगर को हायपोग्‍लासिमा कहा जाता है।


बढ़ जाता है हृदय रोग का खतरा


अगर आप प्रीडायबिटीज की श्रेणी में आ चुके हैं, तो आपको टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही आपको कई अन्‍य गंभीर चिकित्‍सीय परेशानियां भी हो सकती हैं, जिनमें ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक आदि शामिल हैं। प्री डायबिटीज के साथ आपको सामान्‍य लोगों की अपेक्षा हृदय रोग और स्‍ट्रोक होने का खतरा 50 फीसदी बढ़ जाता है।


कैसे होता है निदान

यह पता लगाने के लिए कि क्‍या आपका प्रीडायबिटीज है, आपका डॉक्‍टर कई प्रकार की रक्‍त जांच कर सकता है। फास्टिंग प्‍लाजमा ग्‍लूकोज जांच, ओरल ग्‍लूकोज टोलरेंस टेस्‍ट अथवा हीमोग्‍लोबिन ए1सी (एवेरज ब्‍लड शुगर) जांच आदि।


कितना सामान्‍य है प्री-डायबिटीज

एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में 20 वर्ष की आयु से ऊपर के करीब आठ करोड़ लोग प्रीडायबिटीज के शिकार हैं। प्री डायबिटीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आने वाली गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यह आपके दिल, किडनी, आंखों, नर्वस सिस्‍टम और आंखों को होने वाले संभावित नुकसान का इशारा हो सकता है।


कैसे लाएं जीवन में बदलाव

जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाकर आप प्री‍डायबिटीज के खतरे को टाल सकते हैं और यहां तक कि डायबिटीज होने के खतरे को भी रोक सकते हैं। डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए आपको सबसे पहले अपने वजन को काबू में रखना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना व्‍यायाम और संतुलित आहार भी आपकी दिनचर्या का हिस्‍सा होना चाहिए।

डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम के तहत यदि आप अपनी जीवनशैली में इस प्रकार का बदलाव लेकर आते हैं, तो आपको तीन वर्षों में डायबिटीज का खतरा 58 फीसदी कम हो जाता है। 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों में को 71 फीसदी से भी अधिक लाभ‍ मिलता है।


वजन काबू

मोटे और अधिक वजन वाले लोगों में प्रीडायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरार काफी अधिक होता है। कुछ अतिरिक्‍त वजन को घटाकर आप टाइप टू डायबिटीज होने की आशंका को काफी कम कर सकते हैं। केवल पांच से दस फीसदी वजन कम करना भी डायबिटीज से बचे रहने में आपकी मदद कर सकता है।


व्‍यायाम

शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोजाना महज 30 मिनट का मद्धम व्‍यायाम, जैसे साइक्लिंग, तैराकी और तेज चलना आदि भी डायबिटीज से बचाने अथवा उसे नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। एरोबिक्‍स व्‍यायाम भी आपके दिल की धड़कनों को संतुलित रख आपको टाइप टू डायबिटीज से बचाने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही आपकी प्रीडायबिटीज को टाइप टू डायबिटीज में बदलने से भी रोकता है। एक्‍सरसाइज प्‍लान अपनाने और अपनी शार‍ीरिक गतिविधियां बढ़ाने से पहले एक बार अपने डॉक्‍टर से जरूर बात कर लें।


आहार

संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है। एक संतुलित आहार में लो-फैट प्रोटीन, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं, जो प्रीडायबिटीज को डायबिटीज के स्‍तर तक नहीं जाने देते। अपने आहार में कैलोरी की मात्रा कम कर, प्रोटीन और लो शुगर खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर और लो कॉर्बोहाइड्रेट युक्‍त आहार का संतुलित मेल आपके लिए सही रहेगा। आपको पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर का सेवन भी करना चाहिए।

इन उपायों को आजमाकर आप स्‍वयं को हृदय रोग, उच्‍च रक्‍तचाप और स्‍ट्रोक के खतरे से बचा सकते हैं। आमतौर पर डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों में उच्‍च रक्‍तचाप  कीशिकायत होती है।

इसके साथ ही आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कम करने के लिए धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। यह आपके दिल की सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता।

आप एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाकर प्रीडायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर प्री‍डायबिटीज, टाइप टू डायबिटीज में बदल जाए, तो वजन कम करना, व्‍यायाम करना, पोषण युक्‍त आहार लेना और रक्‍तचाप को नियंत्रित करके आप डायबिटीज  के साथ भी स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। एक स्‍वस्‍थ जीवनशैली दवाओं और इनसुलिन पर आपकी निर्भरता को भी कम और नियंत्रित करती है।

 

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