कई बार आपको मजबूत बनाता है तनाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 27, 2014
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Quick Bites

  • हम तनाव से दूर रहने का करते हैं प्रयास।
  • कुछ तनाव हमारे लिए होते हैं बेहतर।
  • अपनी रोजमर्रा के जीवन मे कीजिये बदलाव।
  • स्‍वयं के लिए रोज नयी चुनौतियां कीजिये पेश।

फ्रेडरिक नीत्शे ने कहा था, 'जो चीज हमें मारती नहीं है, वह हमें मजबूत बनाती है।' और हालिया शोध इस बात को साबित करते हैं। तनाव का सही अनुपात संक्रमण, बीमारी और मुश्किलों से लड़ने की हमारी क्षमता में बढ़ोत्‍तरी करता है।

हालांकि आमतौर पर तनाव को सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है, लेकिन ताजा स्‍टडी ने इस विचार को पूरी तरह पलट दिया है। असल में हम चिंता और तनाव से बचते हैं। और बहुत थोड़ी चिंता असल में हमारी सबसे बड़ी परेशानी हो गयी है। हालांकि यह सुनने में अटपटा लगता है, लेकिन हकीकत तो यही है। हम भूल जाते हैं कि थोड़ा बहुत तनाव वास्‍तव में हमारी सेहत के लिहाज से बेहतर ही होता है।

तनाव हमारी सेहत पर क्‍या असर डालने वाला है यह काफी कुछ तनाव के स्‍तर और मात्रा पर निर्भर करता है।

stress in hindi
हर व्‍यक्ति के लिए तनाव का स्‍तर और प्रभाव भी दूसरे से अलग होता है। यह काफी कुछ हमारे विकासक्रम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हममें से ज्‍यादातर लोगों को अपनी रोजी-रोटी के लिए ज्‍यादातर लोगों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। सर्दी-गर्मी की परवाह किये बिना काम करना पड़ता है। यह सब हमें बिना नागा करना पड़ता है। असल में यही परिस्थितियां इनसानी विकासक्रम का हिस्‍सा होती हैं। और इन्‍हीं के अनुरूप यह तय होता है कि तनाव के दौरान हम कैसे बर्ताव करेंगे।

कुछ लोग तनाव में अधिक निखरकर सामने आते हैं। तनाव उनके लिए उत्‍प्रेरक का काम करता है। यह उन्‍हें भीतरी तौर पर प्रकाशवान और ऊर्जा प्रदान करता है। हालांकि कई बार तनाव के मूल में समाहित भावनात्‍मक चोट का दर्द कई वर्षों तक बना रहता है।

मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के शोधकर्ताओं ने पता लगाने का प्रयास किया कि आखिर क्‍यों तनावपूर्ण परिस्थिति में लोग एक जैसा व्‍यवहार नहीं करते। इस शोध में सामने आया कि समान तनावपूर्ण परिस्थिति में लोगों का व्‍यवहार तीन मुख्‍य अनुवांशिक गुणों पर निर्भर करता है। और इनका संबंध पूर्व में अवसाद से जोड़ा जाता है।


ये अनुवांशिक रूप तनाव के इस प्रकार के मुद्दों पर हमारी प्रतिक्रिया और मस्तिष्‍क के 'हिप्‍पोकैम्‍पस' पर उसके प्रभाव का निर्धारण करते हैं। हिप्‍पोकैम्‍पस' मस्तिष्‍क का वह हिस्‍सा होता है जिसे ' सेंट्रल स्‍ट्रेस इंटरफेस' कहा जाता है। दबाव के स्‍तर और अनुपात के अनुसार इसमें आवश्‍यक बदलाव आते रहते हैं। जब आप अपनी सुरक्षा को लेकर अत्‍यंत गंभीर होते हैं, तब य‍ह सिकुड़ जाता है। वहीं रोमांचक सामाजिक परिस्थितियों में होने वाले तनाव के कारण इसका आकार बड़ा हो जाता है।

stress affect in hindi

अवसाद और दर्दनाक हादसों के बाद 'हिप्‍पोकैम्‍पस' सामान्‍य से छोटे आकार का हो जाता है। इस खोज को कई बीमारियों के लक्षण के तौर पर भी पहचाना जाता है।

आधुनिक जीवनशैली के चलते हम अधिक कैलोरी का उपभोग करते हैं। इसके साथ ही घर, दफ्तर, कार आदि में तापमान का स्‍तर भी सामान्‍य ही रहता है। शारीरिक स्‍तर पर हमारी क्रियाशीलता में भी पहले की अपेक्षा काफी कमी आ चुकी है। इन परिस्थितियों को विकास की प्रक्रिया का आवश्‍यक अंग माना जाता रहा है, किंतु अब इनके दूसरे पक्ष पर भी चर्चा होने लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि यही आधुनिक जीवनशैली के चलते मोटापे, डायबिटीज, हायपरटेंशन और हृदय रोग जैसे कई रोग हमारे जीवन का अंग बनते जा रहे हैं। हम यह जानते हैं कि आधुनिक तकनीक से लैस ये उपकरण और आदतें वास्‍तव में धीरे-धीरे हमें मौत का ग्रास बना रही हैं।

असल में हमने अपने जीवन से फिटनेस प्रदान करने वाले तनाव के कारकों को निकाल दिया है। भोजन के लिए मेहनत करना, तापमान में बदलाव, और रोज किये जाने वाले शारीरिक श्रम, स्‍वास्‍थ्‍य प्रदान करने वाले तनाव को उत्‍पन्‍न करते हैं।

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