ग्लूकोमा के प्रति जागरूकता आपकी आंखों को बचा सकती है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 14, 2012
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Glaucoma Ke Prati Jaagrukta ग्लूकोमा को काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है जो कि बहुत आम है। यह आंखों में होने वाली बीमारी है और आमतौर पर 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही होती है। दुनिया में अंधापन के कारणों में ग्लूकोमा दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत में लगभग 1 करोड़ बीस लाख लोग इस बीमारी से पीडि़त हैं।


आमतौर पर ग्लूकोमा के प्रारंभिक लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है यह हमारी आंखों की ऊपरी सतह और देखने की क्षमता पर दुष्प्रभाव डालता है। कई बार काला मोतिया बढ़ जाता है तो इससे अंधापन भी आ जाता है। हालांकि इस बीमारी पर तब तक ध्यान नहीं जाता जब कि एक आंख खराब नहीं हो जाती या फिर दिन पर दिन आपकी कार्यक्षमता प्रभावित करने लगती है और आपको देखने में अलग-अलग तरह की समस्याएं होने लगती हैं।
काला मोतिया या मोतियाबिंद के दौरान आंख की ऑप्टिक तंत्रिकाओं कि मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं वो बहुत प्रभावित होती है और उसकी कार्यक्षमता धीमी हो जाती है। इससे दूसरी आंख पर अधिक दबाव पड़ता है जो कि बहुत खतरनाक स्थिति होती है।


यह बात बहुत महत्वपूर्ण हैं कि आप ग्लूकोमा की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही कर लें क्योंकि एक बार ग्लूकोमा होने के बाद इसको ठीक करना बहुत मुश्किल है लेकिन समय रहते यदि ग्लूकोमा के लक्षणों को पहचान लिया जाए तो मरीज को नेत्रहीन होने से बचाया जा सकता है।


ग्लूकोमा का शुरूआती अवस्था में पता लगाने के लिए जरूरी है कि आपको समय-समय पर आंखों की जांच करवानी चाहिए और 40 की उम्र के बाद आपके लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप किसी अच्छे नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की नियमित रूप से जांच करवाएं। नियमित जांच के दौरान आपको विजन टेस्ट भी करवाना चाहिए इसके अलावा आई प्रेशर मेजरमेंट और कम रोशनी में आंखों के रेटिना, ऑप्टिक नर्व इत्यादि का परीक्षण करवाना चाहिए। यदि आपको ग्लूकोमा बीमारी को लेकर शंका है तो आपको डॉक्टर से सलाह कर कुछ विशेष टेस्ट करवाएं जैसे गोनियोस्कोपी, कम्यूटराइज्ड फिल्ड टेस्ट, सेंट्रल कॉर्नील थिकनेस और नर्व फाइबर इत्यादि करवाने चाहिए।


हालांकि ग्लूकोमा किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह 40 की उम्र पार कर चुके लोगों को ही होता है। कुछ प्रमुख कारण हैं जिनसे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है। ये हैं- 40 से अधिक की उम्र, परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा हुआ हो, डायबिटीज और अत्यधिक तनाव, आंखों में पहले कभी घाव हुआ हो या कोई जख्म रहा हो, कभी स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया हो या कम उम्र में नजर के चश्मे का उपयोग। यदि मरीज इनमें से किसी एक कारण से गुजर चुका हो जो उसे नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


ग्लूकोमा के उपचार के तहत मुख्यतः आई ड्रॉप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है जिसे रोजाना या फिर लंबे समय तक प्रयोग में लाया जाता है। कुछ विशेष स्थितियों में ग्लूकोमा के लिए सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है। सभी तरह के उपचारों का लक्ष्य ग्लूकोमा को बढ़ने से रोकना, ग्लूकोमा के दौरान हुए आंखों के नुकसान को ठीक करना और उपचार इस तरह से करना कि यह बीमारी दोबारा ना पनप सकें।


यह बहुत जरूरी है कि साइलेंट किलर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए और इस आम बीमारी से आंखों को सुरक्षित किया जाएं जिससे आंखों की बीमारियों को बढ़ने से पहले समय पर रोका जा सकें. वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक हर साल मार्च में लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए मनाया  जाता है। इस वर्ष नोएडा के आईकेयर आई हॉस्पिटल में डॉक्टर रीना चौधरी भारत की ग्लूकोमा सोसाइटी के साथ 11 मार्च सुबह नौ बजे एक अभियान चला रही हैं जिसके तहत लोगों को ग्लूकोमा के लिए जागरूक किया जाएगा और एक रैली निकाली जाएगी। इसके साथ ही आईकेयर आई हॉस्पिटल में 2 से 4 बजे तक 12 मार्च से 17 मार्च पूरे सप्ताह तक ग्लूकोमा के लिए फ्री आई स्क्रीनिंग टेस्ट कर रहा है।

Write a Review
Is it Helpful Article?YES10 Votes 12313 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर