घर पर ब्लड शुगर टेस्ट कैसे करें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 01, 2012
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ghar par blood sugar test kaise kareआप अपने घर पर ही ब्ल‍ड शुगर का स्तर जान सकते हैं। इससे आपको आपकी नियमित देखभाल में फायदा होता है और  आप उसी हिसाब से अपनी देखभाल कर सकते हैं। घर पर ब्लड शुगर का टेस्ट करने से आप ब्लड शुगर के स्तर को जांच सकते हैं। घर पर ब्लड शुगर की जांच करने के तरीके को आसानी से सीखा जा सकता है। आइए हम आपको बताते है कि घर पर ब्लड शुगर की जांच कैसे करें।



ब्लड शुगर जांच के लिए एक अच्छी मशीन लेकर इन स्टेप्स को अपनाएं :

  • सबसे पहले गर्म पानी से अपने हाथ को धुल कर साफ तौलिए या काटन से पोछ लीजिए।
  • अपनी उंगली से खून की एक बूंद निकालकर सूई को उसके डिवाइस में रख दीजिए।
  • उसके बाद जांच के लिए एक कांच की पट्टी बॉटल से लीजिए। पट्टी में खून की बूंद का नमूना डालने के बाद तुरंत बॉटल को बंद कर लीजिए ताकि कोई अन्य टेस्टिंग स्ट्रिप या नमी उससे मिले ना।
  • टेस्टिंग डिवाइस के लेवेल पर लगे निर्देशों को पढकर ब्लड शुगर मीटर को तैयार रखिए।
  • रूई के साफ टुकडे को लेकर लैंसेट (खून निकालने के लिए एक प्रकार की निडिल) को उंगली में चुभोइए।
  • खून निकालने के बाद यह निश्चित कर लीजिए कि खून जांच करने के बिंदु पर ही डाला गया है या नहीं। उसके बाद अच्छी तरह से परीक्षण करने वाले क्षेत्र को कवर कर दीजिए।
  • उंगली के जिस भाग से आपका खून निकला है, वहां रूई लगाइए जिससे ज्यादा खून न निकले।
  • ब्लड शुगर का परिणाम जानने के लिए कुछ वक्त तक इंतजार कीजिए। मीटर कुछ सेकेंड में यह रिजल्ट दे देता है।

 

नए मीटर से आप उंगली के अलावा शरीर के अन्य स्थानों से खून लेकर जांच कर सकते हैं। इसके लिए बांह, अंगूठा और जांघ से खून के नमूने लिए जा सकते हैं। हालांकि यह हो सकता है कि शरीर के अन्य भाग जांच के दौरान ब्‍लड शुगर के स्तर का परिणाम उंगली से अलग दे सकते हैं। शरीर के अन्य जगहों की अपेक्षा उंगली पर ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा संवेदनशील होता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के एफडीए (फूड एंड ड्रग एड्मिनिस्ट्रेशन) ने 1998 में खून निकालने के लिए दर्द रहित मीटर को मंजूरी दी थी। यह एक लेजर मीटर था जो कि शरीर की त्वचा में घुसे बिना लेजर के बीम से खून का नमूना निकलता था। इससे दर्द कम होता था और आराम मिलता था।

ग्लूकोज को नापने के लिए निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम का भी विकास किया गया। इस उपकरण में बहुत छोटी प्लास्टिक की नलिका (बहुत छोटी ट्यूब) होती थी। यह त्वचा के नीचे डाली जाती थी। इसमें बहुत कम मात्रा में खून का नूमूना इकट्ठा होता था और 72 घंटे में शुगर स्तर का मूल्यांकन हो जाता था। एफडीए ने 2001 में डायबिटीज की जांच के लिए घडी के जैसे उपकरण को मंजूरी दी। इसके जरिए मधुमेह के मरीज अपने ब्लड शुगर के स्तर की जांच इलेक्ट्रानिक तरंगों से कर सकते थे।

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