गर्भावधि मधुमेह को कैसे करें नियंत्रित

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 18, 2011
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • नाश्‍ते से पहले और खाने के बाद शुगर की जांच करें।
  • डॉक्‍टरी सलाह का नियम से पालन करना चाहिए।
  • इन्‍सुलिन लेने के दौरान भी अपनी रीडिंग की जांच करें।
  • हाइपोग्लायसीमिया का होना भी है एक गंभीर समस्‍या।

रक्‍त की दो बूंद से आप घर पर ही ग्लूकोजमीटर से शुगर की जांच कर सकती हैं। यदि आपको इसे चलाना नहीं आता तो आप डॉक्‍टर या परिजन से इसमें मदद ले सकती हैं। डॉक्टर की सलाह को मानते हुए अपनी रक्‍त शर्करा की जांच पर ध्यान दें और इसका रिकार्ड रखें।

gestational diabetes
सुबह में नाश्‍ते से पहले और खाने के दो घंटे बाद या दिन में किसी भी समय आप अपनी ब्‍लड शुगर की जांच कर सकती हैं। ब्‍लड शुगर की नियमित रूप से ली गई रीडिंग के रिकॉर्ड से डॉक्टर आपको ब्‍लड शुगर नियंत्रण के लिए सुझाव देगा। डॉक्‍टरी परामर्श के मुताबिक आपको इन्‍सुलिन या अन्‍य दवाईयों का सेवन करना चाहिए। कई महिलाओं में गर्भावधि मधुमेह का कारण गर्भावस्था में अधिक हार्मोन होते हैं। आहार और व्यायाम से रक्‍त शर्करा का स्तर सामान्य बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।


यदि आपने इन्‍सुलिन के इंजेक्‍शन लेना शुरू कर दिया है, तो अपको अपनी सही रीडिंग की जानकारी होनी चाहिए। जांच परिणामों के आधार पर चिकित्‍सक आपको इन्‍सुलिन की मात्रा बढ़ाने या घटाने की सलाह देगा। इन्‍सुलिन को प्रयोग करने का महत्वपूर्ण जोखिम कम रक्‍त शर्करा प्रतिक्रिया हाइपोग्लाइसीमिक है। यदि आप सही प्रकार से खा नहीं पाती या आपने खाना कम कर दिया है या समय पर खाना नहीं खा पाती या आपको व्‍यायाम करने में परेशानी होती हैं, तो आपको हाइपोग्लायसीमिया की समस्‍या हो सकती है।

हाइपोग्लायसिमिय के लक्षण

 

  • चक्कर महसूस होना
  • शरीर में कमजोरी रहना
  • सिरदर्द की समस्‍या
  • अचानक भूख लगना
  • ज्‍यादा पसीना आना


हाइपोग्लायसीमिया को कम रक्‍त शर्करा भी कहते हैं, यह एक गंभीर समस्या है। इसका इलाज जल्‍द से जल्‍द कराना चाहिए। यदि आपको भी अपने शरीर में कम रक्‍त शर्करा के लक्षण लग रहे हैं, तो अपने रक्‍त जांच करा लें। गर्भावस्था में महिलाओं को गर्भावधि मधुमेह के साथ कीटोन के लिए मूत्र की जांच कराने की सलाह दी जाती है। कीटोन की कम मात्रा भ्रूण के लिए नुकसानदेह नहीं होती, लेकिन इसकी ज्‍यादा मात्रा घातक हो सकती है। इसकी ज्‍यादा मात्रा अम्ल रक्‍तता का कारण भी हो सकती है। डॉक्‍टर कीटोन के लिए मूत्र जांच की सलाह देगा।


अधिकतर महिलाएं गर्भावधि मधुमेह के साथ संपूर्ण गर्भावस्था में बिना किसी समस्या और योनी मार्ग से प्रसव कर सकती हैं। गर्भावधि मधुमेह से ग्रस्‍त महिलाओं में उच्च रक्‍तचाप का खतरा बना रहता है। मधुमेह नियंत्रण न होने पर उच्च रक्‍तचाप या प्रीक्लेमपासिय का खतरा बढ़ जाता है। प्रीक्लेमपासिय टोक्सीमीय ऐसी स्थिति है जिसमें मूत्र में प्रोटीन के साथ उच्च रक्‍तचाप अचानक बढ़ने लगता है।


उच्च रक्‍तचाप और प्रीक्लेमपासिय टोक्सीमीय मां और बच्चे दोनों को प्रभावित कर सकता है। यदि आपके शरीर में भी उच्च रक्‍तचाप या प्रीक्लेमपासिय विकसित हो रहा है तो अपने डॉक्टर के पास नियमित रूप से जांच कराने के लिए जरूर जाए। गर्भावस्था में उच्च रक्‍तचाप के नियंत्रण के लिए, मां और बच्चे की स्वास्थ्य जांच, जीवनशैली में बदलाव, और कुछ दवाईयों को शामिल करें। आहार, व्यायाम और दवाईयों के सेवन के लिए डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर ही पालन करें।

 

 

 

 

Read More Articles on Gestational Diabetes in Hindi

Write a Review
Is it Helpful Article?YES2 Votes 12523 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर