गर्भकालीन मधुमेह के कारण और लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 15, 2012
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Quick Bites

  • आवश्यकता से अधिक वज़न होने पर हो सकती है जेसटेशननल डाईबीटिज।
  • परिवार में मधुमेह का इतिहास भी हो सकता है गर्भकालीन मधुमेह का कारण।
  • अधिक प्यास लगना, अधिक पेशाब आना और थकावट हो सकते हैं लक्षण।
  • अधितक महिलाओं में प्रसव के बाद रक्तशर्करा हो जाती है सामान्य।

गर्भकालीन मधुमेह गर्भवती महिलाओं में विकसित होने वाले उन बदलावों का परिणाम होता है जो उन्हें गर्भावस्था के समय होते हैं। गर्भावस्था में कॉर्टिसोल, एस्ट्रोजन जैसे हॉर्मोन की बढ़ोतरी से शरीर में रक्त शर्करा के प्रबंधन में बाधा उत्पन्न होती है। इस अवस्था को "इंस्युलिन रेसिस्टेन्स" यानी कि इंसुलिन प्रतिरोध के नाम से जाना जाता है।

Gestational Diabetes Causes and Symptoms

मधुमेह तीन टाइप 1 डाईबीटिज , टाइप 2  डाईबीटिज  और जेसटेस्न्ल डाईबीटिज यानि गर्भकालीन मधुमेह, इन तीन प्रकार का होता है। टाइप 1 डाईबीटिज और टाइप 2  डाईबीटिज खतरनाक होते हैं। जिन पर सिर्फ नियंत्रण पाया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से जल्दी ठीक नहीं होते और ये किसी को भी हो सकता हैं। जबकि जेसटेस्न्ल डाईबीटिज यानि गर्भकालीन मधुमेह सिर्फ गर्भवती महिलाओं को होता है। जिस पर नियंत्रण पा लेने पर बच्चे के जन्म के बाद यह ठीक हो जाता है। लेकिन यदि इसमें उपचार में लापरवाही बरती जाए तो यह बच्चे के जन्म के बाद भी परेशानी का कारण बन सकता है।

गर्भकालीन मधुमेह के कारण

शरीर में इंस्युलिन निर्माण करने वाले अंग जिन्हें पैन्क्रीआस के नाम से भी जाना जाता है, उनमे इंस्युलिन प्रतिरोध द्वारा इंस्युलिन में आई कमी की भरपाई करने की क्षमता होती है। अगर आप के पैन्क्रीआस में बढ़े हॉर्मोन के कारण हुए प्रभाव इंस्युलिन का पर्याप्त निर्माण करने में असमर्थ हो जाती हैं, तो आपकी रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है और आप गर्भाकालीन मधुमेह से ग्रसित हो जाती हैं।     



गर्भाकालीन मधुमेह होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन नीचे दिए गए हैं कुछ कारण जिनसे आप गर्भाकालीन मधुमेह की शिकार हो सकती हैं -


  •     अगर आपका वजन आवश्यकता से अधिक है।
  •     अगर आपने इससे पहले 4।5 किलो से अधिक वज़न के बच्चे को जन्म दिया है।
  •     अगर पिछली गर्भावस्था में आप गर्भाकालीन से ग्रसित रही हैं।
  •     अगर आपके परिवार में मधुमेह का इतिहास रह चुका है। 
  •     अगर आप उच्च रक्तचाप या किसी और चिकित्सा संबधी समस्या से ग्रसित है।
  •     अगर आपका पहला बच्चा मृत या किसी दोष के साथ पैदा हुआ था।
  •     अगर आपकी उम्र 30 वर्ष से अधिक है।

 

गर्भाकालीन मधुमेह के लक्षण

अधिकांश गर्भवती महिलाएं गर्भाकालीन मधुमेह के लक्षण महसूस नहीं कर पातीं। हांलाकि, कभी कभी गर्भाकालीन मधुमेह के कारण उन्हें अधिक प्यास लगने और अधिक पेशाब और थकावट की शिकायत होती है। अगर समय रहते गर्भकालीन मधुमेह का उपचार नहीं किया जाए तो होने वाले बच्चे को भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर जिन गर्भवती महिलाओं ने गर्भाकालीन मधुमेह का उपचार नहीं करवाया होता है, उनके बच्चे अधिक वजन वाले पैदा होते हैं। और अधिक वजन वाले बच्चे को जन्म देने के लिए अधिकांश मामलों में आपको सिजेरियन का सहारा लेना पड़ेगा। साथ ही जन्म के बाद बच्चे की रक्त-शर्करा में आकस्मिक गिरावट आ सकती है। जिसकी आपूर्ति इंजेक्शन के द्वारा करनी पड़ती है। साथ ही आपके बच्चे में पीलिया और सांस संबधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। लेकिन गर्भाकालीन मधुमेह के कारण होने वाले बच्चे में जन्म संबधी दोष विकसित नहीं होते, क्योंकि गर्भाकालीन  मधुमेह गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद होता है, और तब तक भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है।  



अगर गर्भाधान से पहले आप मधुमेह के रोग से ग्रसित थीं जिसका निदान समय पर नहीं किया गया था, तो पर बच्चे में जन्म संबधी दोष होने के खतरे बढ़ सकते हैं। और एक बात ध्यान में रहे कि अगर आप गर्भकालीन मधुमेह से ग्रसित हैं तो यह जरूरी नहीं है कि आपके नवजात शिशु में टाइप 1 मधुमेह होने का ख़तरा बढ़ जाएगा। हां आगे जाकर उसमे टाइप २ मधुमेह होने का खतरा हो सकता है।


अधिकांश महिलाओं में प्रसव के बाद रक्तशर्करा सामान्य हो जाती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान अगर आप गर्भाकालीन मधुमेह से ग्रसित हैं, तो संभव है कि अगली गर्भावास्थाओं में भी आप इस रोग से ग्रस्त हों।



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