गर्भावस्‍था में आयरन युक्‍त आहार रखे मां और गर्भस्‍थ शिशु का खयाल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 29, 2012
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Quick Bites

  • खून की कमी के कारण थकान, कमजोरी, नाखून, आंखें और होंठ पीला होना।
  • जन्म लेने वाले शिशु में कमजोरी और एनीमिया का कारण बनती है आयरन की कमी।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को रोज 30 मिलीग्राम आयरन लेना चाहिए।
  • मूंगफली की पट्टी, रेवड़ी आदि में आयरन की भरपूर मात्रा होता है।

गर्भावस्‍था के दौरान महिला को अपनी और अपने होने वाले बच्‍चे की सेहत के लिए कई पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। ये तत्‍व महिला को कमजोरी से दूर रख्‍ाते हैं साथ ही जिससे इस दौरान उस महिला को कमज़ोरी ना हो, और ना ही होने वाले बच्‍चे को कोई नुकसान हो।

iron rich foods are necessary during pregnancy

 

अक्‍सर ऐसा देखा जाता है कि गर्भवती महिलाओं में इस दौरान खून की कमी हो जाती है, जिस कारण थकान, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, नाखून, आंखें और होंठ पीले होने लगते है। इसके चलते होने वाले बच्‍चे को भी कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। शरीर में आयरन की सही मात्रा होना बहुत जरूरी है। इसलिए गर्भावती महिलाओं को डॉक्‍टर अक्‍सर आयरन की गोलियां खाने की सलाह देते हैं।

 

गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से होने वाले‍ नुकसान

आयरन की कमी तब होती है जब लाल रक्त कोशिकाओं से शरीर में ऑक्सीजन वहन करने के लिए पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं होता। गर्भावस्था के दौरान सबसे ज्‍यादा होने वाली समस्या हीमोग्लोबिन की कमी है। गर्भावस्था में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती हैं। आयरन की कमी, जन्म लेने वाले शिशु में कमजोरी और एनीमिया का कारण बनती है। गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी को रक्त जांच में होने वाले हीमोग्लोबिन टेस्ट से पता लगाया जा सकता है।

 

गर्भावस्था में क्यों जरुरी है आयरन

  • आयरन की कमी से होने वाले बच्चे के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है। बच्चे के वजन पर असर पड़ सकता है। बच्चे को सांस संबंधी बीमारियां या फिर एनीमिया की शिकायत हो सकती है।
  • गर्भावस्था में रक्त की कमी के सबसे आम लक्षण हैं सांस लेने में कठिनाई एवं थकान होना।
  • गर्भवती महिला के शरीर को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक रक्त की मात्रा चाहिए होती है। अत: गर्भवती महिला की आयरन की आवश्यकता भी उसी हिसाब से बढ़ जाती है।
  • महिलाओं में आयरन की जरूरत हीमोग्लोबिन बनाने के लिए होती है। यह प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों तथा ऊतकों में ऑक्सीजन वहन करने का काम करता है।
  • एनीमिया से समय से पहले डिलवरी और कम वजन या अल्पविकसित शिशु पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • दूसरे और तीसरे माह में एक गर्भवती महिला के होने वाले बच्‍चे को आयरन की अधिक की जरूरत होती। इसलिए गर्भावती महिलाओं को ज्‍यादा आयरन की जरुरत होती है।

 

आयरन की मात्रा

  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को रोज 30 मिलीग्राम आयरन लेना चाहिए।
  • एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को रोज 120 मिलीग्राम आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए।
  • ‘विटामिन-सी’ आपके शरीर में भोजन से आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए दाल, पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, धनिया और पुदीना जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। संतरे के जूस से भी आप हीमोग्लोबिन की कमी से बचा जा सकता हैं।
  •  इसके अलावा कच्चे नारियल के कुछ टुकड़े, मेवे, किशमिश तथा खजूर खाएं। मूंगफली की पट्टी, रेवड़ी आदि में आयरन की भरपूर मात्रा होती है।

 

 

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