गर्भावस्था के दौरान उदरीय व्यायाम करने से मां और होने वाला शिशु दोनों रहते हैं स्‍वस्‍थ

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 17, 2012
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Quick Bites

  • उदरीय व्यायाम करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं।
  • ये मांसपेशियां गर्भस्थ शिशु को मदद करती हैं सुरक्षित रखने में।
  • उदरीय व्‍यायाम हफ्ते और महीने के हिसाब से ही करना चाहिए।
  • प्रेग्‍नेंसी के 5 महीने बाद इस एक्सरसाइज को दीवाल के सहारे करें।

गर्भावती महिला के लिए खुद को फिट रखना बहुत ही चुनौतीभरा काम होता है। खासकर उदर को लेकर बहुत सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। गर्भावस्था में व्यायाम करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। यही मांसपेशियां गर्भस्थ शिशु को सुरक्षित रखने में बहुत मदद करती हैं।

pregnant abdominal exerciseगर्भावस्था के दौरान उदरीय व्यायाम करते वक्त बहुत ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि अगर आपसे हल्की सी भूल हो जाए तो इसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है। पेट पर ज्यादा दबाव डालने वाला व्यायाम करने से बचिए। इसके अलावा ऐसा व्यायाम भी मत कीजिए जिसमें बार-बार झुकना पड़े। आइए गर्भावस्था के दौरान किये जाने वाले कुछ उदरीय व्यायाम के बारे में जानें।

ऐसे करें उदरीय व्याययाम

  • गर्भावस्था में हफ्ते और महीने के हिसाब से व्यायाम करना चाहिए। क्योंकि जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है आपके उदर का भार उसी के हिसाब से बढ़ भी जाता है।
  • गर्भावस्था के पहले चार महीनों में पीठ की साइड में लेटकर आप व्यायाम कर सकती हैं।
  • इसके लिए सबसे पहले अपनी पीठ के बल लेट जाइए, दोनों हाथों को साइड में कीजिए और दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा करके फैला लीजिए।
  • उसके बाद अपने सिर में हाथों का सहारा देकर सीने को छूने की कोशिश की‍जिए। इस अवस्‍था में कम से कम तीन सेकेंड तक रहिए, उसके बाद सामान्य स्थिति में आ जाइए।
  • इस व्यायाम को हर रोज कम से कम तीन से पांच बार कीजिए। यदि आप हर रोज सही तरीके से इस व्यायाम का अभ्यास करती हैं तो इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • इसके अलावा सीधे जमीन पर सीधे लेट जाइए, अपने घुटनों को अपनी तरफ खींचिए। इस अवस्था को भी हर रोज चार से पांच बार दोहराइए।
  • गर्भावस्था के पांच महीने बाद इसी एक्सरसाइज को जमीन के बजाय दीवाल का सहारा लेकर कर सकती हैं।


व्यायाम करने के फायदे

  • अक्सर महिलाएं इस गलतफहमी में रहती हैं कि अगर पेट का व्यायाम किया जाए तो गर्भ में पल रहे शिशु को चोट पहुंचती है। जबकि गर्भावस्था के दौरान अगर सावधानी पूर्वक व्यायाम किया जाए तो यह मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद रहता है।
  • गर्भावस्था में पेट की मांसपेशियों का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि पेट में आपके शिशु का अतिरिक्त‍ भार होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से पेट व उसके आस-पास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मांसपेशियां मजबूत होने से आपका शिशु और ज्यादा सुरक्षित रहता है।


गर्भावस्था के दौरान खान-पान के अलावा फिटनेस पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर आप गर्भावस्था के दौरान व्याययाम या योगा के द्वारा फिट रहना चाहती हैं तो किसी योगा के एक्‍सपर्ट या‍ फिर चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

 

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