गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ने से बच्चे पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 18, 2012
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Quick Bites

  • प्रेग्नेंसी के बाद वजन सामान्यतया 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ता है। 
  • वजन ज्यादा होने से मां को हो सकती है प्री-एक्लेम्पसिया की समस्या।
  • ज्यादा वजनी महिलाओं के बच्चे का वजन भी सामान्य से ज्यादा होता है।
  • मोटी महिलाओं में गर्भ संबंधी मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भवती होने के बाद महिला वजन बढना स्वाभाविक है। लेकिन इसका भी एक मानक होता है। गर्भवती होने के बाद महिला का वजन सामान्यतया 30 से 40 प्रतिशत तक ही बढ़ता है, लेकिन यदि आपका वजन इससे ज्यादा बढ़ रहा है तो यह आपके और बच्चे लिए नुकसानदेह है।

Dangers Of Excess Weight During Pregnancyगर्भावस्था के दौरान वज़न बढ़ने के लिए अतिरिक्त आहार की जरूरत जिम्मेदार है। क्योंकि आप अपने आपको और अपने पेट में पल रहे बच्चे के पोषण के लिए अधिक खुराक का सेवन करती हैं। पर दो के लिए खाने के मायने यह नहीं कि आप जितना चाहें उतना ठूंसते जाएं। वे महिलायें जो गर्भावस्था के दौरान अपना वज़न बढ़ा देती हैं, उनके बच्चे अपने शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी लेकर पैदा होते हैं।

 

क्या कहता है शोध

हाल में हुए अध्ययनों के अनुसार, अमरीका में आधे से ज्यादा स्थूलकाय महिलाएं अपने चिकित्सक द्वारा सुझाये गए वज़न से अधिक वज़न बढ़ा देती हैं। यह एक खतरनाक प्रवृति मानी जाती है, क्योंकि आवश्यकता से अधिक खाने से कैलारीज भ्रूण में स्थानांतरित हो जाती हैं। हालांकि गर्भावस्था में  कई महिलाएं अपना वज़न काबू में रखने में कामयाब होती हैं, लेकिन ऐसी भी महिलाएं हैं जो ऐसा नहीं कर पातीं, जिसके कारण गर्भावस्था और बच्चे के पैदा होने के बाद अपना वजन कम करने के लिए इन्हें काफी वर्ष लग जाते हैं।

कई चिकित्सकों का यह मानना है कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप कितना वज़न बढ़ाती हैं, महत्वपूर्ण यह है कि आप वज़न किस तरह से बढ़ाती हैं। गर्भवती महिला के वज़न बढ़ने के दो तरीके होते हैं, एक तो पेट में पल रहे बच्चे के कारण और दूसरा आवश्यकता से अधिक खाने से। चर्बीयुक्त आहार का सेवन करने से वज़न तेज़ी से बढ़ता है। उच्च कैलोरी युक्त आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर को उचित पोषण और ऊर्जा नहीं मिल पाती इसलिए वह बहुत जल्द थकावट महसूस करती है। गर्भावस्था में आवश्यकता से अधिक वज़न बढाने से या गर्भ धारण करने से पहले मोटापे की अवस्था से, बच्चे और मां की सेहत पर प्रतिकूल रूप से असर पड़ सकता है।

 

गर्भावस्था में वजन बढ़ने से खतरे


प्री-एक्लेम्पसिया

इस अवस्था में उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। इसके कारण नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इससे शरीर के कई अंग, जैसे कि फेफड़े और गुर्दा प्रतिकूल तरीके से प्रभावित हो सकते हैं। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो यह अवस्था मां या बच्चे के लिए घातक साबित हो सकती है।

 

गर्भ संबधी मधुमेह

इस अवस्था में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन प्रसव के बाद सामान्य स्तर पर आ जाता है। यह अवस्था कम जोखिम भरी होती है, पर यह आगे जाकर बच्चे की मां में टाइप २ के मधुमेह के होने के खतरे बढ़ा देती है।

 

वज़नी बच्चा

एक अध्ययन के अनुसार जो गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान आवश्यकता से अधिक वज़न बढ़ा देती हैं, उनके द्वारा पैदा किये गए बच्चे उन बच्चों से अधिक वज़नदार होते हैं, जिन्हें अपना वज़न सही तरीके से प्रबंध करनेवाली महिलाएं जन्म देती हैं।  

 

कुछ भी हो, आवश्यकता से अधिक खाने की आदत से किसी महिला को लज्जित होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपनी इस आदत के लिए उसे अपने चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। और गर्भवती महिला को न सिर्फ अपनी सेहत के बारे में बल्कि अपने होने वाले बच्चे की सेहत के बारे में सोचना चाहिए।

 

 

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