गर्भपात पर विवाद

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 23, 2012
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Quick Bites

  • लिंग पता करने के बाद गर्भपात करवाना गलत है।
  • महिलाओं में किसी स्वास्थ्य समस्या के चलते गर्भपात होने की संभावना होती है।
  • गर्भावस्था के शुरुआती दौर में गर्भपात आम है।
  • गर्भपात से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

difrences on miscarriage

गर्भपात के विषय में वाद-विवाद लंबे समय से है और यह प्रश्न करते है, की नैतिक क्या है? मनोविश्लेषण निश्चित रूप से अपनी विवादास्पद प्रकृति की तुलना में गर्भपात के खिलाफ अहंकारी नैतिकतायें अधिक है। बहस धार्मिक प्रकृति और नैतिक मकसद से बहुत दार्शनिक हो गयी है। गर्भपात के खिलाफ निम्न में कुछ नैतिक तर्क सूचीबद्ध किये हैं:

 

गर्भपात के लिए और खिलाफ नैतिक वाद- 

 

  • गर्भपात के बिषय पर बहस काफी विशाल है और कोई भी वास्तव में एक विशेष नैतिक स्थिति का बचाव नही कर सकता क्योंकि बहस की प्रकृति और विस्तार परिपूर्ण नही हैं।
  • लोग के सवाल गर्भपात की प्रकृति के बारे में और वह कितना जानबूझकर किया है, इसपर होता हैं। इसमे माँ के इरादे, उद्देश्य और शर्तें शामिल हैं। धार्मिक व्याख्याओं ने अक्सर भ्रूण को लेकर नैतिक जिम्मेदारी का एक जवाबी तर्क उत्पादित किया है।
  • गर्भपात कराने की कोई उम्र नहीं हैं। जैसे ही लड़की यौवनावस्था में पहुंचती हैं, वह गर्भपात के अधिकार का आज़ादी से उपयोग कर सकती हैं । जबकि जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण बोर्ड गर्भपात की पहल करते है, नैतिक बहस गर्भपात की योजना बना रही महिलाओं के इच्छाओं और प्राथमिकता पर सवाल उठाते हैं। विकासशील देशों में विशेष रूप से भारत में भ्रूण के लिंग निर्धारण के बाद  कई गर्भपात होते हैं। हालांकि लिंग निर्धारण एक दंडनीय अपराध है, रूढ़िवादी समुदाय के लोगों को अभी भी अपनी राह बंद दरवाजों के पीछे से कामयाब रुप में मिल रही हैं। कई गर्भपात, योजित और अनियोजित गर्भावस्था के बाद  माँ के गर्भ के एक बालिका को समाप्त करने के लिये होते  है जो कि अत्यंत अनैतिक हैं।
  • कई बहस अत्याधिक दार्शनिक रुप लेती है और भ्रूण के अधिकारों का पता लगाती है, जैसे भ्रूण में एक इंसान की नैतिक स्थिति होती है?यदि भ्रूण में नैतिक स्थिति है,, तो एक महिला किन परिस्थितीयों के कारण गर्भपात करा सकती है, यह निश्चित कराके, गर्भपात उचित कानून और शर्तों के तहत संविधानात्मक होने चाहिए। दार्शनिक जांच का प्रयोजन भ्रूण को नैतिक मूल्य और मानव जीवन की श्रेणी देना है।
  • कई चिकित्सा वाद विवादों ने महिला के गर्भ के बाहर के भ्रूण के अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ी है। इससे भ्रूण को जीवन का अधिकार मिलेगा। इसका कारण है, क्योंकि कुछ भी जिवित के साथ समान सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए अन्यथा एक कीट के अंडे में और एक मानव अंडे के बीच में क्या अंतर रह जायेगा।
  • इसके विपरीत एक दृष्टिकोण है, जो गर्भावस्था के समापन का समर्थन करता है, अक्सर तर्क करता हैं, औरत को बच्चे को जन्म देते वक्त हो रहे मानसिक आघात और शारीरिक दर्द का, खासकर अगर एक गर्भावस्था अनियोजित होती है। यह सबसे गंभीर तर्क है, जो गर्भपात का चयन करनेवाली उन ज्यादातर महिलाओं के लिये किया जाता है, जो मानसिक रूप से जिम्मेदारियों को लेने के लिए तैयार नही होती हैं।
  • इसके अलावा कई ऐसे तर्क है, जो गर्भपात का समर्थन करते है, जो कि वास्तव में अवांछित गर्भावस्था को खतम करने का निर्णय लेने वाले दंपती के लिये फायदेमंद होते है । इसका कारण शराबी माता पिता हो सकता है,  जिनको एक बच्चे की योजना के पहिले पर्याप्त इलाज की जरूरत होती है, तलाक के लिए आवेदन देने वाले दंपती, या वित्तीय अस्थिरता जैसे अन्य कारण भी हो सकते है। ऐसे मामलों में, बच्चे को जन्म देना अनैतिक हो जाता है।

 

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