ज़ेन सिद्धांतों को जीवन में आत्‍मसात करने के 5 तरीके

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 02, 2015
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Quick Bites

  • ज़ेन सिद्धांतों को जिंदगी में लाने से बढ़ती है सकारात्मकता।
  • जिन चीजों पर आपका नियंत्रण नहीं उनकी आप न सोचें।
  • हमेशा दूर की सोचने की कोशिश की जानी चाहिए।
  • अपने लिए वक्त निकालने से जिंदगी बनती है आसान।

जेन का विकास चीन में लगभग 500 ईस्वी में हुआ। चीन से यह 1200 ईस्वी में जापान में फैला। ज़ेन बौद्ध धर्म का एक संप्रदाय है। जापान में बौद्ध धर्म का कोई संप्रदाय नहीं था किंतु धीरे-धीरे वह बारह सम्प्रदायों में बंट गया जिसमें जेन भी एक था। ज़ेन का शाब्दिक अर्थ 'ध्यान' माना जाता है।

जेन जीवन जीने के एक तरीका है। इसका मूल सिद्धांत है वर्तमान क्षण में जीना यानी आज में जीना। ये क्रोध, परेशानी, और तनाव आदि को दूर करने में आपकी मदद करता है। इसकी मदद से आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी सकारात्मक रवैये के साथ जी सकते हो। जेन का मानना है कि जिस चीज पर आपका नियंत्रण नहीं चलता उसे जानें दें, पकड़ कर न बैठें।
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जीवन में उतारें जेन के सिद्धांत

जेन के सिद्धांत और मूल विचार ऐसे हैं जिन्हें हर कोई अपने जीवन में उतारकर इससे लाभ ले सकता है। आइये जानते हैं किन तरीकों से जेन आपके जीवन में उतर सकता है।

जिस पर नियंत्रण नहीं उसकी न सोचें

आप सिर्फ अपने ऊपर ही पूरा नियंत्रण रखते हैं। लेकिन जिंदगी सिर्फ इसी से नहीं चलती। बहुत से लोग आपके साथ जुड़े हुए होते हैं। उन सबका कहीं न कहीं आपकी जिंदगी पर प्रभाव पड़ता है। पर आपका उनपर कोई नियंत्रण नहीं होता। आपके विचार, आपके कर्म और भावनाएं हीं हैं जिन्हें आप बदल सकते हैं। इसलिए दूसरे लोग क्या सोचते और करते हैं इस पर अपना ध्यान न लगाकर खुद पर ध्यान केंद्रित करें।
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दूर की सोचें

अगर कुछ गलत हो जाता है तो बजाय कि सिर्फ उसी के सोचते रहने के, आगे की सोचे। हो सकता है ऐसे में आप कुछ अच्छे मौकें छोड़ दें, क्योंकि आपका सारा ध्यान सिर्फ हो चुके नुकसान पर होता है। ये देखें कि दुनिया में क्या क्या बुरा हो रहा है। आपके साथ और ज्यादा बुरा भी हो सकता था। आप भाग्यशाली रहे कि कम नुकसान हुआ। ऐसे में स्थिति से उबरना आसान हो जाता है।

अपने गुस्से के बारे में सोचें

एक शांत कमरे में आराम से बैठ जाएं, जहां आपको कोई परेशान करने वाला न हो। अपनी आंखें बंद करें और गहरी सांस लें। अपने गुस्से के बारे में सोचें। आपके शरीर के किस हिस्से में आपका गुस्सा बसता है? क्या आप अपने दांत भींच रहे हैं? क्या आपका सिर दुखा? क्या आप अपने कंधों में कुछ महसूस कर रहे हैं? अब अपनी आंखें खोलें, और नाक से सांस अंदर लेकर मुंह से बाहर छोड़ें। उन चीजों के बारे में सोचें जिनसे आपको गुस्सा आता है। इनकी लिस्ट बनाएं। उसमें से सबसे ऊपर के तीन कारण चुनें और उनको दूर करने का तरीका ढूंढें। इससे आपका गुस्सा धीरे धीरे नियंत्रण में आने लगेगा।

अपने तनाव की सोचें

अपने तनाव पर ध्यान दें। जैसे आपने अपने गुस्से का पता लगाया वैसे ही अपने तनाव का पता लगाएं। ध्यान रखें कि तनाव आपको कितना नुकसान पहुंचा रहा है और अगर आपने इसे दूर नहीं किया तो आप आगे कुछ भी सकारात्मक नहीं कर पाएंगे।

अपने लिए वक्त निकालें

आज के वक्त की सबसे बुरी बात ये है कि लोग अपने लिए वक्त निकालना भूल गए हैं। कोई अपने आपको वक्त नहीं देता। अगर आपको अपना खयाल रखना नहीं आता तो आपके लिए जिंदगी आसान कभी नहीं हो पाएगी। इसलिए दिन में अपने लिए थोड़ा सा वक्त जरूर निकालें। अपनी मुश्किलों और उनसे निपटने के तरीकों को सोचें। खुद को कैसे खुश करना है ये प्लान करें। इससे आपकी जिंदगी सकारात्मक होगी।

Image Source - Getty Images

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