5 स्वास्थ्य चेक-अप जो हर पुरुष को कराने चाहिए

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 24, 2014
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Quick Bites

  • रक्‍त में अधिक कोलेस्‍ट्रॉल, दिल को बीमार कर सकता है।
  • आज-कल हर पांचवां व्‍यस्‍क उच्‍च रक्‍तचाप से पीड़ित है।
  • डा‍यबिटीज पीड़ित फास्टिंग ग्‍लूकोज टॉलरेंस जांच अवश्य कराएं।
  • सी-रेएक्टिव प्रोटीन यानी सीआरपी जांच भी करा सकते हैं।

सेहत कुदरत का दिया सबसे अनमोल खजाना है और यह खजाना कायम रहे, इसके लिए जरूरी है कि आप इस पर नियमित निगरानी रखें। घर, इमारत और कार की ही तरह आपके शरीर को भी मैनटेनेंस की जरूरत होती है। आइए जानते हैं पांच ऐसी जांच जो हर पुरुष को अवश्‍य करवानी चाहिए, ताकि उसकी सेहत सलामत रहे।

Health Checkups


कोलेस्‍ट्रॉल जांच

कोलेस्‍ट्रॉल एक फैटी प्रोटीन है। रक्‍त में अधिक कोलेस्‍ट्रॉल होना दिल को बीमार कर सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कितनी है। कोलेस्‍ट्रॉल दो प्रकार का होता है, एचडीएल यानी हाई डेंटिसिटी कोलेस्‍ट्रॉल और एलडीएल यानी लो डेंटिसिटी कोलेस्‍ट्रॉल। एचडीएल को गुड कोलेस्‍ट्रॉल कहा जाता है, जो आपके दिल को सेहतमंद बनाये रखता है। वहीं, एलडीएल यानी बैड कोलेस्‍ट्रॉल दिल की बीमारियां और स्‍ट्रोक दे सकता है।



आपके रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की कुल मात्रा 220 से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही ट्रिग्‍लाईकेरिडस की मात्रा भी 150 मिग्रा/डेलि से कम होनी चाहिए। यह रक्‍त में पायी जाने वाली वसा होती है, जो धमनियों में रक्‍त का प्रवाह अवरुद्ध कर सकती है।



कब करें शुरुआत - 20 की उम्र में।


कितने समय में करवायें - हर पांच वर्ष में। अगर आपके रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा सामान्‍य से अधिक पायी जाए, तो आपका डॉक्‍टर आपको हर छह महीने में जांच करवाने के लिए कह सकता है। अगर आपको हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास है, तो केवल कोलेस्‍ट्रॉल के स्तर की जांच ही काफी नहीं होगी। इसके लिए आप डॉक्‍टर से पूछकर अन्‍य जरूरी जांच भी करवा सकते हैं। लिपोप्रोटीन जांच इसी श्रेणी में आती है। यह जांच अधिक विशिष्‍ट होती है और यह कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर के साथ ही उसके अंशों की भी जांच करती है।

 

रक्‍त चाप की जांच

यह बात आपको काफी आसान लग सकती है। लेकिन, रक्‍तचाप की नियमित जांच से आप भविष्‍य में होने वाली कई बीमारियों से बच सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार हर पांचवां व्‍यस्‍क उच्‍च रक्‍तचाप से पीडि़त है। अगर आपका रक्‍तचाप 140/90 से अधिक हो, तो इससे आपके दिल पर अतिरिक्‍त दबाव पड़ता है। यह हृदयाघात और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है। कई जानकार 120/80 के रक्‍तचाप को सामान्‍य मानते हैं।


कब करें शुरुआत - किसी भी उम्र में शुरू किया जा सकता है। अच्‍छा रहे अगर इसकी शुरुआत बचपन में ही कर दी जाए।


कितने समय में करें - अगर आपका रक्‍तचाप सामान्‍य है तो वर्ष में एक बार ही जांच करना काफी माना जाता है। अगर आप रक्‍तचाप नियंत्रित करने की दवा ले रहे हैं अथवा आपका रक्‍तचाप सामान्‍य से अधिक है, तो डॉक्‍टर आपको हर छह महीने में जांच के लिए भी कह सकता है।

 

डा‍यबिटीज जांच

डायबिटीज आज के दौर की सामान्‍य किंतु खतरनाक बीमारी है। इसके लिए डॉक्‍टर आपके शरीर में ग्‍लूकोज अवशोषण की सहिष्‍णुता की जांच करता है। इससे पता चलता है कि आपका शरीर कितनी शक्‍कर पचा सकता है।


यह क्‍या है-
एक जांच मीठा पेय पीने के बाद की जाती है। वहीं फास्टिंग ग्‍लूकोज टॉलरेंस जांच के लिए जांच से नौ घंटे पहले कुछ नहीं खाना होता है।


कब करें शुरुआत -
अगर आपको कोई लक्षण और जोखिम कारक नहीं है तो 45 वर्ष की आयु में इसकी जांच शुरू कर दें। अगर आपका वजन सामान्‍य से अधिक है, आपको रक्‍तचाप की शिकायत है, अथवा डायबिटीज का कोई अन्‍य खतरा जैसे अनुवांशिक कारण वगैरहा है, तो अच्‍छा रहेगा कि आप कम उम्र में हीं जांच करवानी आरंभ कर दें।


कितने समय में करवायें जांच - हर तीन वर्ष, किंतु हर वर्ष करवाना बेहतर

 

थायराइड टेस्‍ट

थायराइड गर्दन में छोटी सी ग्रंथि होती है, जो आपके शरीर के मेटाबॉलिक स्‍तर को नियंत्रित करती है। अगर आपका थायराइड अधिक सक्रिय है, तो इस स्थिति को हायरपरथायराइडिज्‍म कहा जाता है, इसका अर्थ है कि आपकी मेटाबॉलिक दर काफी अधिक है। अनिद्रा, वजन कम होना और धड़कनों का तेज होना इसके सामान्‍य लक्षण हैं। वहीं हायपोथाराइड में थायराइड कम सक्रिय होता है। इसका अर्थ यह है कि आपका मेटाबॉलिज्‍म धीमा होगा। इससे आमतौर पर थकान, कब्‍ज और वजन बढ़ने की समस्‍या होती है। हालांकि महिलाओं में हायपोथायराइड की शिकायत अधिक होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पुरुषों को यह नहीं हो सकती। हायपोथायराइडिज्‍म के दुष्‍प्रभावों में स्‍तंभन दोष, सेक्‍स इच्‍छा में कमी और उत्तेजना संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

क्‍या होता है यह -
सबसे सामान्‍य जांच टीएसएच है। यह एक रक्‍त जांच है, जो थायराइड हार्मोन के स्‍तर की जांच करती है। यह स्‍तर 0.4 से 5.5 के बीच होना चाहिए। हालांकि कई विशेषज्ञ इस जांच की जगह टी4 जांच को अधिक प्रभावी मानते हैं।


कब करें शुरुआत - 35 की उम्र के बाद


कितने समय में करवायें जांच - अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन के अनुसार वर्ष में एक बार इसकी जांच अवश्‍य करवा लेनी चाहिए। कई डॉक्‍टर जब तक थायराइड के स्‍तर की जांच करवाने की सलाह नहीं देते, जब तक कि आपको इसके लक्षण नजर न आएं। हालांकि, 60 वर्ष की आयु के बाद थायराइड की जांच जरूर करवानी चाहिए।

 

स्‍क्रीनिंग फॉर मेटाबॉलिक सिंड्रोम

मेटाबॉलिक सिंड्रोम लक्षणों का ऐसा समूह होता है जो आपको डायबिटीज और हृदय रोग, दोनों होने का इशारा करता है। इसमें पहले लक्षणों की जांच पहचाने जाते हैं और अगर यह मौजूद हो, तो फिर जरूरत के हिसाब से जांच की जाती है। यदि किसी पुरुष में इन पांच में से तीन लक्षण नजर आएं, तो डॉक्‍टर उन्‍हें मेटॉ‍बॉलिक सिंड्रोम की जांच करने की सलाह देते हैं-

 

  • कमर का आकार 40 या उससे अधिक
  • गुड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा 40 मिग्रा/डेलि से कम
  • ट्रिग्‍लाईकेरिडस का स्‍तर 150 मिग्रा/डेलि से अधिक
  • रक्‍तचाप 130/85 से अधिक होना
  • फास्टिंग ग्‍लूकोज का स्‍तर 100 से अधिक होना

 

अगर आपको इनमें से कोई भी तीन लक्षण नजर आते हैं, तो आपका डॉक्‍टर सी-रेएक्टिव प्रोटीन यानी सीआरपी जांच भी कर सकता है। हृदय की सेहत पर नजर रखने का यह सबसे अच्‍छा तरीका माना जाता है।


यह क्‍या है- यह रक्‍त जांच है जिससे रक्‍तवाहिनियों में प्‍लाक जमने की स्थिति की जांच की जाती है।

कब से करवायें - 40 वर्ष की आयु के बाद

कितने समय में करवायें - हर तीन से पांच वर्ष में जांच करवानी चाहिए। इसके साथ ही कोलेस्‍ट्रॉल और डायबिटीज के स्‍तर की भी जांच की जानी चाहिए।

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