ऐसे रखें बच्‍चों की आखों का ख्याल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 27, 2015
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Quick Bites

  • बच्चों मे जन्मजात होती है मोतियाबिंद की समस्या।
  • आईफ्लू होने पर घबरायें नहीं, आम है ये शिकायत।
  • ड्रूपिंग आईलिड और सूजी पलकों पर रखें सावधानी।
  • डॉक्टर से तुरंत जांच करायें बच्चों की आखों की समस्या।

बच्‍चों की आँख में समस्या होने की संभावना बहुत होती है। जबकी कई बीमारियाँ कुदरती रूप से होती है और बच्चा उनसे अपने आप ही निजात पा लेता है जबकी कई बीमारियों में उपचार की ज़रूरत पडती है।बच्चों मे सबसे आम आँख की समस्या है आई फ़्लू या किसी जीवाणु द्वारा संक्रमण। अगर आप अपने बच्चे की आँख के गुलाबीपन  देखे तो तुरंत एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह ले। हालाँकि यह बहुत आम है पर कंजक्टिवाइटिस का इलाज ना किया गया तो ये बहुत ही खतरनाक हो सकता है।
Drooping Eyes

ड्रूपिंग आईलिड

टोसिस या पलक का नीचे गिरना एक अन्य आम दशा है ।आँख की मॉस पेशी पर नियंत्रण न रहने से ऐसा हो जाता है ।माध्यम स्तर का टोसिस द्रष्टि के साथ फेरबदल नहीं करता है और मात्र एक अंगराग की समस्या रह जाती है ।पर अगर ऊपरी पलक पर बहुत ज्यादा नियंत्रण खो गया हो तो उसको सही करने के लिए शल्य चिकित्सा की ज़रूरत पड सकती है ।क्योंकि टोडलरो  बहुत ज्यादा रोते हैं तो इसलिए उनकी अश्रु नलिकाए बाधित हो जाती है जो की उनके अंदर आंसू सूखने के कारण हो सकती हैं ।अगर बच्चे की आँख बार बार नहीं पोंछी गयी तो वे संक्रमण की जगह बन सकती हैं और वाहन पर अन्य समस्या भी हो सकती हैं ।इस बात का ध्यान रखे की जब भी आप बच्चे के आंसू पोछे तो बहुत ही नरमी से करे क्योंकि सूखे हुए आंसू की पपडी उसकी त्वचा को छील सकती हैं और वहाँ पर खून भी निकल सकता है।

Eyelid in Hindi

सूजी हुयी पलके

सूजी हुई पलके बाधित तेल ग्रंथियो के कारण होती हैं ।बच्चे की पलको के ऊपर पपडी बन सकती है , और उसे आँख के नादर सूजन और ऐसा महसूस हो सकता है की उसकी पलक और आँख के बीच में कोई चीज़ रगड खा रही हो ।सामान्य रूप से एक नेत्र रोग विशेषग्य आँख को साफ़ कर देता है और बहारी अंगों की मालिश करने को केटा है । ताकि वाहन पर स्वस्थ्य रक्त का संचार हो सके ।अगर एक संक्रमण वाहन पर हो गया है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक भी लिख सकता है । अपक्वता से ग्रस्त बच्चों में  आँख पूरी तरह से विकसित नहीं होती है ।जो हिस्सा विकसित नहीं हो पाटा है वाहन पर प्रपात ऊतक और रक्त वाहिनी जमा हो जाती हैं ।इसका परिणाम होता है कि उसकी द्रष्टि बिगड जाती है। सारे अपक्व बच्चों की जांच आँख की समस्या के लिए की जानी चाहिए ।रेटिनोपेथी में लेसर उपचार की ज़रूरत पडती है और प्राय इससे द्रष्टि वापस आ जाती है ।


छोटी छोटी खरोंचे आँखों में बहुत दर्द करा सकती हैं । क्रॉनिया में खरोंच का उपचार मलहम और एंटीबायोटिक लेकर किया जाता है ।एक नेत्र रोग विशेषज्ञ आपको आँख पर पट्टी बाँधने को ख सकता है ताकि आँख में सुधार की प्रक्रिया तेज हो सके ।

Image Source-Getty

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