इसलिए जरूरी है अपने भावनात्‍मक ज्‍वार को काबू रखना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 30, 2014
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Quick Bites

  • हर बात पर गुस्‍सा आना ठीक नहीं।
  • अपने गुस्‍से और उसके परिणामों को आंकिये।
  • गुस्‍से से अवसाद और अन्‍य कई बीमारियां होती हैं।
  • आपके रिश्‍तों पर नकारात्‍मक असर डालता है गुस्‍सा।

जरा सी बात पर हमें गुस्‍सा आ जाता है। घर पर जैम की शीशी खत्‍म हो गयी है। और इस बात पर वे ओवर‍रिएक्‍ट करने लगते हैं। लाइट नहीं आने से फ्रिज का पानी ठण्‍डा नहीं है, तो हम गुस्‍से में बर्ताव करने लगते हैं। कुछ मामलों में गुस्‍सा आना या प्रतिक्रिया देना समझ में आता है। लेकिन, बार-बार ऐसा करना ठीक नहीं।

 

किसी बात पर जरूरत से ज्‍यादा प्रतिक्रिया देना भावनात्‍मक रूप से अशांत कर सकता है। और इस वजह से गाहे-बगाहे हम दूसरों से उलझते भी रहते हैं। इसलिए अपने भावनात्‍मक तापमान को जांचते रहना जरूरी हो जाता है। जब आपको अपने भावनात्‍मक तापमान के बारे में सही जानकारी होती है, तो आप बेहतर काम कर सकते हैं।
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मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य

अगर आप भावनात्‍मक रूप से स्थिर हैं, तो इससे आपका मन और मस्तिष्‍क शांत रहते हैं। इससे उन्‍हें आराम मिलता है। गुस्‍सा फैसला लेने की हमारी क्षमता पर विपरीत असर डालता है। और इस दौरान लिये जाने वाले फैसलों पर हमें अकसर बाद में पछताना पड़ता है। गुस्‍सा आपके मन को अशांत कर देता है। उसमें हलचल मचती रहती है। कहते हैं ना कि जिस प्रकार खौलते हुए पानी में अपना प्रतिबिंब नहीं देखा जा सकता, उसी तरह अशांत मन से सही फैसले नहीं किये जा सकते। गुस्‍सा, अति प्रतिक्रिया अतिरिक्‍त तनाव को जन्‍म देती है। और तनाव धीरे-धीरे ही सही अवसाद का रूप ले लेता है। और तनाव और अवसाद हमें कितनी प्रकार की बीमारियां देता है, यह बताने की जरूरत नहीं। तनाव हमारे दिल और दिमाग को बीमार करता है। यूं ही तो चिंता को चिता समान नहीं कहा जाता।

 

सकारात्‍मक रहें

अपने भावनात्‍मक तापमान को शून्‍य से सौ के बीच मापिये। जहां जीरो का अर्थ है कि सब कुछ ठीक है। अगर आप सकारात्‍मक रहना चाहते हैं तो आपको जीरो के आसपास ही रहना चाहिये। जैसे ही आपको यह अहसास होता है कि आपके दिमाग का पारा बढ़ रहा है आप नकारात्‍मक महसूस करने लगते हैं। और यही वह मौका होता है जहां आपको रुक जाना चाहिये। इससे आपको सकारात्‍मक रहने में मदद मिलेगी।


गुस्‍से का असर रिश्‍तों पर

दिन कितना सुहाना है, लेकिन आप उसकी शुरुआत गुस्‍से से करते हैं। और इसी से शुरुआत होती है आपके खराब रिश्‍तों की। आपके आसपास के लोग आपसे कतराने लगते हैं। आपकी नकारात्‍मकता उन्‍हें भी प्रभावित करती है। वे आपसे बचना चाहते हैं। और ठीक उसी समय अगर आप अपने गुस्‍से को काबू कर स्‍वयं को शांत करने का प्रयास करते हैं आप बेहतर महसूस करने लगते हैं। आपको स्‍वयं को मौका देना चाहिये कि आप अपने मानसिक तनाव को माप सकें। आपको खुद को अंक देने चाहिये और फिर उसके असर को देखना चाहिये। जैसे ही आपको अहसास होगा कि आपके अंक बढ़ते जा रहे हैं, उसी समय आप खुद ब खुद रुक जाएंगे।

 

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यह अच्‍छा नहीं है

आपको अपने दिमागी पारे को इसलिए भी मापते रहना चाहिये क्‍योंकि गुस्‍सा किसी भी लिहाज से अच्‍छा नहीं कहा जा सकता। भावनात्‍मक रूप से इस प्रकार संवेदनशील होना आपकी और आपके करीबियों की खुशियों को तबाह कर सकता है। इसलिए, जरूरी है कि हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। और इस‍के लिए हमें अपने भावनात्‍मक तापमान को मापते रहना चाहिए।

उदासी के बादल

ऐसा पाया गया है कि जो लोग अधिक गुस्‍सा करते हैं उन्‍हें गंभीर अवसाद की परेशानी होती है। और अवसाद आपको किस हद तक बीमार कर सकता है यह तो आप जानते ही हैं। लगातार अवसाद में रहना आपको जीवन की सभी खुशियों से महरूम कर देता है। कई बार देखा गया है कि जो लोग भावनात्‍मक रूप से अस्थिर होते हैं वे खतरनाक रूप से कमजोर और उदास महसूस करते हैं। और यह परिस्थिति काफी खतरनाक हो सकती है।

बेसब्री

उतावलापन और बेसब्री ओवर-रिएक्‍शन का एक और 'तोहफा' है। और गुस्‍से के साथ अगर और सब आदतें मिल जाएं, तो आपको काफी परेशानी हो सकती है। और अगर आप अपने मस्तिष्‍क और भावनात्‍मक ज्‍वार को समझते हैं तो आपके लिए इन परिस्थितियों को नियंत्रित करना आसान होगा। आपको खुद से यह सवाल करना चाहिये कि आखिर आप कहां चूक कर रहे हैं। किन बातों पर आपको कितना खयाल देने की जरूरत है। और जब आपको इन सब सवालों के जवाब मिल जाएंगे। तब आपके लिए एक मजबूत भावनात्‍मक धरातल पर खड़ा होना आसान होगा।

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सब गड़बड़ हो जाता है

भावनात्‍मक रूप से अस्थिर होने से आप हर चीज पर और हर किसी बात पर उबलने लगते हैं। और आप न केवल खुद को बल्कि दूसरों को भी नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इसलिए आपको हर कीमत पर यह जानना जरूरी है कि आपको कब खुद पर काबू करना चाहिये। जैसे ही आपको इस बात का अहसास हो कि सब कुछ आपके काबू से बाहर हो रहा है, तो आपको फौरन रुक जाना चाहिये। आपको हर बात पर गुस्‍सा करने से बचना चाहिये। और इसे रोकने के लिए गहरी सांस लेकर शांत हो जाइए।

 

तो यदि आपको यह मालूम हो कि कब आपको अपनी भावनाओं पर काबू करना है, तो आपके लिए बहुत अच्‍छा होगा। इससे आप बेकार की कई परेशानियों से बचे रहेंगे।

 

Image Courtesy- Getty Imgesa

 

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