सोशल मीडिया का रिश्‍तों पर प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 09, 2013
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ब्रेकअप करते लड़का और लड़की

फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स और विभिन्‍न ऐप्‍लीकेशन आज लोगों की जिंदगी का हिस्‍सा बन गए हैं। यदि इन सभी से आदमी थोड़ी देर के लिए भी दूर होता है तो वह बेचैन हो जाता है। शुरूआत में सोशल मीडिया यानी न्‍यू मीडिया का मकसद लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ ही संचार माध्यम को मजबूती देना था। अपने इस मकसद में सोशल मीडिया को सफलता भी मिली। लेकिन साथ ही इसने सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित किया है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, दूसरे पहलू के रूप में सोशल मीडिया ने लोगों के संबंधों में दखल किया है। बात करते हैं सोशल मीडिया और इसके सामाजिक संबधों पर पड़ने वाले असर के बारे में।

 

 

 

सोशल मीडिया का समाज में दखल

सोशल नेटवर्किंग साइट अधिकांश लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। शुरूआत में इस तरह की वेबसाइटों ने आपसी संबंधों को मजबूती दी, लेकिन अब आकर यह रिश्‍तों में समस्‍या पैदा करने का भी कारण बन गई हैं। इसलिए लॉगइन करने से पहले और अपनी निजी जिंदगी को दुनिया के साथ साझा करने से पहले एक बार अपने साथी से बात कर लें। सोशल नेटवर्किंग किसी रिश्ते में असंतोष का कारण बन सकती है। जब आपका साथी आपसे ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट पर समय बिताता है तो आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है। ऐसे में इसका दुष्‍प्रभाव यह होता है कि व्‍यक्ति खुद को उपेक्षित महसूस करने लगता है।

 

 

आज हर उम्र के लोग फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट से जुड़े हैं। सोशल नेटवर्किग का दौर माई स्पेस से शुरू होकर फेसबुक व ट्विटर तक पहुंच चुका है। पहले इन साइट्स का इस्तेमाल पुराने स्कूल के दोस्तों को खोजने और परदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाने के लिये किया जाता था। हाल के वर्षों में इन्होंने हमारे करीबी संबंधों के सभी पहलुओं को घेर लिया है, विशेष रूप से हमारे जीवन और संबंधों को। फेसबुक और ट्विटर लोगों को उनके दोस्तों व रिश्‍तेदारों की पसंद-नापसंद और सामाजिक दायरे से जोड़ता है। इस पूरे कार्यक्रम में कोई प्रत्यक्ष वार्तालाप या मुलाकात शामिल नहीं होती है। फेसबुक पर किसी के बारे में लोग राय उसके द्वारा साझा की गई पोस्ट और टिप्‍पणियों के आधार पर करते हैं।

 

 

छवि प्रदर्शन के आधार पर प्रभाव

सोशल नेटवर्किंग साइट एक ऐसा प्‍लेटफार्म है जिसके द्वारा कोई भी व्‍यक्‍ित अपने विचारों को दूसरे व्‍यक्तियों के साथ साझा कर सकता है। फेसबुक और ट्विटर अन्‍य व्‍यक्तियों को हमारे दोस्‍तों को देखने की सुविधा देता है। इस बीच कई बार लोगों के विभिन्न समूहों (करीबी दोस्तों, परिवार, परिचितों, मित्रों के मित्रों, सहयोगियों और अजनबियों) को अपनी सही प्रस्तुति में चुनौतियां का सामना करना पड़ता है।

 

 

सोशल नेटवर्किंग साइट के संबंधों पर संभावित खतरे

युवा सोशल नेटवर्किंग साइट्स का उपयोग ना सिर्फ दोस्त बनाने के लिए बल्कि गर्ल-फ्रेंड और ब्वॉय फ्रेंड ढूंढने के लिए भी खूब कर रहे हैं। इतना ही नहीं सोशल नेटवर्किंग आज के जमाने में मैरिज काउंसलर तक की भूमिका में आ गया है। इसके साथ ही यह दो लोगों के आपसी रिश्‍तों में खटास पैदा करने का कारण भी बन रहा है। फेक प्रोफाइल इसका एक उदाहरण है। कम उम्र के लड़के और लड़कियों की आदत होती है कि उत्साह में प्रोफाइल पर अपनी सभी जानकारी साझा कर देते हैं। प्रोफाइल पर अपना फोन नंबर, घर का पता या फिर कोई भी प्राइवेट इनफार्मेशन शेयर करने से कई बार समस्या आ जाती है। ऑन लाइन होने पर कुछ लोग खुद को जैसा प्रदर्शित करते हैं वे वास्तविक जीवन में वैसे नहीं होते। बाद में हकीकत जानने पर रिश्ते में दरार आने लगती हैं।

 

 

 

 

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