धूम्रपान करना ही है तो बच्चों को बख्श दीजिए

By  ,  दैनिक जागरण
Feb 04, 2011
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धूम्रपान करना ही है तो बच्चों को बख्श दीजिए लंदन, प्रेट्र : धूम्रपान नहीं करना सबसे अच्छा है, लेकिन अगर आप इस बुरी लत के गुलाम हैं तो कम से कम बच्चों को बख्श दीजिए। अगली बार अपने घर में सिगरेट का धुआं उड़ाने से पहले कई बार सोचिएगा।

एक नए शोध से पता चला है कि बच्चों के नजदीक धूम्रपान करने वाले मां-बाप अपनी संतान को बीमार बना रहे हैं।
हांगकांग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि छह माह तक के बच्चों के मां-बाप उनके नजदीक अधिक धूम्रपान करते हैं तो बच्चों में आठ साल की उम्र तक संक्रामक बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक मां-बाप का अधिक धूम्रपान करना बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम कर देता है। इससे बच्चों को श्वसन संबंधी कई समस्याएं भी हो सकती हैं।


ब्रिटिश अखबार 'द डेली टेलीग्राफ' के मुताबिक यह अध्ययन हांगकांग में 1997 में जन्मे 7,402 बच्चों पर किया गया। इन बच्चों पर आठ साल की उम्र तक नजर रखी गई। शोधकर्ताओं के अनुसार जन्म के वक्त कम वजन वाले 75 प्रतिशत बच्चों पर तंबाकू का काफी दुष्प्रभाव दिखा। ऐसे बच्चों में आठ साल की उम्र तक संक्रामक बीमारी और श्वसन संबंधी तकलीफ की आशंका ज्यादा देखी गई। समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों पर तो तंबाकू का दुष्प्रभाव और भी अधिक पाया गया।

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