गर्भावस्था में फॉलिक एसिड और ऑयरन की कमी से हो सकती हैं विकृतियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 01, 2011
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Quick Bites

  • फॉलिक एसिड और आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है।
  • दर्दनिवारक दवाएं लेने से शिशु में बढ़ सकता है बांझपन का खतरा।
  • थायरॉयड और ब्‍लड प्रेशर के कारण गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
  • पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की वजह से हो सकता है मिसकैरेज।

गर्भावस्था के दौरान यदि ध्‍यान न रखा जाये तो जटिलताएं आना स्वाभाविक है। कई बार नवजात को भी इस कारण जन्मजात विकृतियों को झेलना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान लापरवाही बरतने या फिर बीमार रहने वाली महिलाओं के शिशुओं में जेनेटिकल विकृतियों की संभावना बढ़ जाती है। इससे भ्रूण के हार्मोंन असंतुलित हो जाते है।

disorders of pregnancyगर्भावस्था में हार्मोंस के बदलाव से गर्भावस्था की विकृतियां बढ़ भी जाती है। यदि गर्भधारण करने से पहले आपको कोई बीमारी है तो उसका असर आपकी प्रेग्‍नेंसी पर पड़ता है, इसलिए यदि आप गर्भावस्‍था की योजना बना रहीं हैं तो सबसे पहले अपनी बीमारी का ईलाज कराइए, उसके बाद ही गर्भधारण के बारे में सोचिये। आइए जानें गर्भावस्था की विकृतियों के बारे में।


गर्भावस्था के दौरान होने वाली विकृतियां

 

  • फॉलिक एसिड और आयरन की कमी से गर्भावस्था के दौरान एनीमिया हो सकता है जिससे प्लेसेंटा को ठीक से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और गर्भवती महिलाओं को थ्रोम्बोलसिस और अधिक ब्लीडिंग हो जाती हैं।
  • गर्भवती महिलाओं द्वारा दर्दनिवारक दवाएं लेने से होने वाले शिशु में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। शोधों में भी ये बात साबित हो चुकी है कि पैरासीटामोल, एस्प्रिन और आईबूप्रोफेन जैसी दवाओं का लम्बे समय तक इस्तेमाल से खासकर लड़कों में प्रजनन अंगों के विकास को नुकसान पहुंच सकता है।
  • कई बार किन्हीं कारणों, लापरवाही या किसी गंभीर बीमारी, अधिक एक्सरसाइज इत्यादि से गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता हैं या फिर जन्म के कुछ समय बाद ही बच्चे की मृत्यु हो जाती है।
  • गर्भावस्था में ठीक से खान-पान न करने के कारण कब्ज की शिकायत रहने लगती है जो कि महिला और होने वाले बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हैं।
  • थायरॉयड जैसी एंडोक्राइन प्रॉब्लम्स गर्भावस्था के दौरान हो सकती है। इससे गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। 
  • गर्भावस्था के दौरान डायबिटिक होने से इंसुलिन की मात्रा या फिर दवाईयां हर महीने बदली जा सकती है, क्योंकि इस दौरान शरीर से कुछ हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो भ्रूण के विकास में सहायक होते हैं, लेकिन ये हार्मोन्स इंसुलिन के प्रभाव को कम करते हैं।
  • पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हार्मोंनल गड़बड़ी से उत्पन्न होता है इससे गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। दरअसल ये सिड्रोंम एग की क्वॉलिटी खराब कर देता है।
  • गर्भावस्था़ के दौरान महिलाओं को कुछ और समस्याएं जैसे शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन बढ़ना, पीलिया होना, उच्च रक्तचाप होना, अधिक तनाव और  बैचैनी होना, शरीर के विभिन्न  हिस्सों में खुजली और जलन होना, शरीर में पानी की कमी होना इत्यादि भी हो सकते है।

 

विकृतियों के कारण

  • अधिक उम्र में गर्भधारण करने से भी कई विकृतियां हो सकती हैं।
  • पिछली गर्भावस्था के दौरान किसी तरह की जटिलताएं होने पर भी कई समस्याएं होने लगती हैं।
  • पहला प्रसव ऑपरेशन से होने से भी विकृतियां उत्पन्न होने लगती है।
  • गर्भावस्था के दौरान या पहले से उच्च रक्तचाप की समस्या हो।
  • गर्भ में एक से अधिक शिशु के होने पर।
  • यदि गर्भस्थ शिशु की स्थिति सही न हो।
  • पहले प्रसव का समय से पहले होने के कारण। 
  • शरीर पर सूजन आ जाने और खून की कमी होने पर।
  • गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग की शिकायत होने पर।
  • गर्भ के साथ किसी तरह का ट्यूमर होने पर।
  • गर्भावस्था के साथ किसी तरह की बीमारी होने पर जैसे डाइबिटीज या थाइरॉइड।
  • खान-पान और दवाईयों का ठीक तरह से ध्यान न रखना।
  • पौष्टिक आहार न लेना और समय पर डॉक्टर से चेकअप न कराना।
  • नशा और एल्कोकहल लेना।


    थोड़ी सी सावधानी और देखभाल से गर्भावस्था में होने वाली विकृतियों से बचा जा सकता है। लेकिन जरूरी है लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना, पौष्टिक आहार लेना, डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का सही-सही पालन करना और प्रतिदिन डॉक्टर की सलाह पर व्यायाम, योगा इत्यादि करना।

 

 

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