जानें कितने प्रकार के होते हैं व्यायाम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 04, 2011
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Quick Bites

  • स्वस्थ शरीर सन्तुलित आहार और व्यायाम का सम्मिश्रण होता है।
  • चलना एक मध्यम दर्जे का और सहज व लाभदायक व्यायाम होता है।
  • आयसोमट्रिक कसरत करने पर पेशियां काफी तेजी से बनती हैं।
  • योग में शारीरिक और मानसिक दोनों अनुशाषनों की ज़रूरत होती है।

स्वस्थ शरीर सन्तुलित आहार और व्यायाम का सम्मिश्रण से मिलता है। आजकल हम खाने के मामले में तो काफी सतर्क रहने लगे हैं लेकिन व्यायाम व शारीरिक श्रम के मामले अभी भी लापरवाह नज़र आते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि भोजन की ही तरह व्यायाम की भी नियमित जरूरत होती है। व्यायाम शरीर को गठीला व मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ उसे निरोग रखने में भी सहायक होता है। अलग-अलग चीजों को लिये भिन्न प्रकार के व्यायाम होते हैं। कुछ शरीर को स्वस्थ बनाते हैं तो कुछ इसे निरोग रखने में मदद करते हैं। वहीं योग के रूप में किये जाने वाले व्यायाम बौद्धिक स्वास्थ्य के लिये लाभकर होते हैं। तो चलिये विस्तार से जानें व्यायाम के प्रकार और इनकी जरूरत क्या हैं।

 

Exercise in Hindi

 

तंदुरुस्ती पाने के लिए व्यायाम के कुछ प्रकार

 


आयसोटोनिक व्यायाम

कुछ कसरतों में कुछ विशेष पेशियां नियमित तौर पर संकुचित और शिथिल होती हैं। इन कसरतों में पेशियों का तनाव बना रहता है, और पेशियों के तन्तुओं की लम्बाई कम व ज़्यादा होती रहती है। इस प्रकार की कसरतों को आयसोटोनिक (समतानी) कसरतें कहा जाता है। सीधे तौर पर समझा जाए तो
जिस कसरत में अधिक हलचल हो उसे आयसोटोनिक कसरत कहा जाता है। जैसे भागना, दौड़ना, तैराकी, पहाड चढ़ना, साइकिल चलाना, गेम जैसे फुटबाल, टेनिस, क्रिकेट आदि आयसोटोनिक व्यायाम के उदाहरण हैं।    

आयसोमट्रिक व्यायाम

जब हम काफी देर तक कोई भारी चीज़ उठाते हैं, या भार को हाथों से आगे-पीछे या ऊपर-नीचे धकेलते हैं, लेकिन पेशियों के तन्तुओं की लम्बाई पर कोई असर नहीं होता। ऐसी क्रिया को आयसोमट्रिक (सममितीय) व्यायाम कहा जा सकता है। इस कसरत में कुछ प्रतिरोध के साथ ज़ोर लगाया जाता है इसलिए बिना बहुत ज्यादा हलचल हुए ही पेशियों को काम करना पड़ता है। कसरत के इस प्रकार से पेशियों का बल और आकार जल्दी बढ़ता है। सप्ताह में तीन दिन भी ये कसरत करना मांसपेशियों के लिये काफी होता है। इसलिये इन्हें हर दिन करने की जरुरत नहीं होती। जिम के अलग अलग मशीनों में इसके काफी तरीके उपलब्ध होते हैं।

आयसोमेट्रिक और आयसोटोनिक दोनों

आयसोमट्रिक कसरतों से पेशियां तेजी से बनती हैं इसलिए शरीर की नुमाइश करने वाले लोग ये कसरतें अधिक करते हैं। वहीं आयसोटोनिक कसरतें पहलवानों और कम दूरी के धावकों के लिए ज़्यादा उपयोगी होती हैं, क्योंकि ये स्टेमिना बढ़ाती हैं। ज़्यादातर कसरतों में इन दोनों को ही शामिल किया जाता है। ताकि ताकत व सहन शक्ति दोनों को बढ़ाया जा सके। उदाहरण के तौर पर कुश्ती में हलचल और प्रतिरोध के खिलाफ बल लगाना होता है, लेकिन इसमें हलचल का प्रयोग कम होता है। जब कोई इंसान साइकल रिक्शा खींच रहा होता है या कोई मजदूर हाथ गाड़ी धकेलता है, तो ऐसे में उनके द्वारा पैरों से हलचल और हाथों से स्थाई बल लगाया जाता है। इसका अर्थ है कि यहां आयसोमेट्रिक और आयसोटोनिक दोनों का प्रयोग हो रहा होता है।बाजुओं को आयसोमेट्रिक और पैरों को आयसोटोनिक से फायदा होता है।

चलना

चलना एक मध्यम दर्जे का और सहज व्यायाम होता है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए (खासतौर पर दिल की बीमारियों से प्रभावित लोगों के लिए) काफी उपयोगी होता है। शारीरिक फायदों के अलावा चलने से स्फूर्ति और आराम मिलता है। एक किलोमीटर मध्यम गति से चलने पर करीब 50 कैलोरी उर्जा खर्च होती है। इसलिये जितना हो सके चलना चाहिये।

 

Exercises in Hindi

 

खेल

सामूहिक खेलकूद केवल कसरत करने से कहीं ज़्यादा उपयोगी होते हैं। खेलों में मज़ा तो आता ही है साथ ही शारीरिक कसरत भी हो जाती है। लेकिन सभी खेल एक जितने उपयोगी नहीं होते हैं। जैसे -
 
शरीर का कौन सा अंग उपयोग उपयोग हो रहा है आदि।
खेल की गति (फुटबॉल, हॉकी अधिक गतिमान, पर टेबल टेनिस उतना नहीं)
कितनी ताकत चाहिए (कुश्ती में ताकत का काम है, पर बैडमिन्टन में स्फूर्ती का)
पेशियों का तालमेल (रायफल शूटिंग में हाथ, आंख और शरीर के अन्य भोगों का तालमेल जरुरी होता है)
सहने की क्षमता और तन्यता (क्रिकेट में लगभग पूरे दिन खेलना होता है)

योग

योग में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के अनुशाषन की ज़रूरत होती है। योग एख कमाल का व्यायाम होता है, जिसमें मूलतः तीन चीज़ की जाती हैं-

आसन

किसी निश्चित समय के लिए किसी निश्चित स्थिति में रहने को आसन कहा जाता है। आसन में आइसोमैट्रिक व आइसोटोनिक कसरतें सभी शामिल होती हैं और इससे शरीर में रक्त का बहाव और पेशियों के तालमेल और सहने की क्षमता आदि बढ़ते हैं।

मुद्राएं

मुद्राएं दरअसल चेहरे की कसरतें होती हैं। उदाहरण के लिये सिंह मुद्रा चेहरे की पेशियों को स्वस्थ बनती है।

बंध

बंध पेशियों को कसने वाली कसरतें होती हैं। इसकी मदद से पेशियों को तानने में सहायता होती है। उदाहरण के लिए मूल बंध से श्रोणी की पेशियां तन जाती हैं। ठीक इसी प्रकार जालंधर बंध से गले की पेशियां पुष्ट होती हैं।


कुल मिलाकर लगातार और नियमित शारीरिक व्यायाम, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और हृदय रोग, रक्तवाहिका रोग, टाइप 2 मधुमेह और मोटापा जैसे रोगों की रोकथाम करता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य सुधारता है और तनाव दूर करने में मदद मिलती है।



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