हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म में अंतर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 04, 2013
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Quick Bites

  • हाइपरथायराइडिज्म में कमजोर या थका हुआ महसूस होना
  • हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ना, थकान, चिड़चिड़ापन।
  • ग्रेव्स रोग हाइपरथाइराइडिज्म की बड़ी वजह होती है।
  • हाइपरथाइराइडिज्म में थायराइड हार्मोन के स्तर में वृद्धि होना।

हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्मज दोनों हैं तो थायराइड के ही प्रकार, लेकिन दोनों ही बिल्कुल अलग-अलग अवस्थाएं हैं। दोनों के लक्षण अलग हैं। और दोनों में अलग प्रकार से रहन-सहन में बदलाव करना पड़ता है। आइए जानें हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म में क्‍या अंतर है।

hypothyroidism in hindi

हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण

हाइपरथायराइडिज्म होने पर हो सकता है कि आपको इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई दें या हो सकता है आपको यह सब लक्षण दिखाई दें।

  • नर्वस, मूडी, कमजोर या थका हुआ महसूस करना।
  • सांस लेने में समस्या, हृदय गति बढ़ना, हाथ कांपना।
  • ज्यादा पसीना आना, गर्मी लगना।
  • बाल झड़ने की समस्या होना।
  • पर्याप्त भोजन लेने के बाद भी तेजी से वजन कम होना।
  • अल्प माहवारी।
  • त्वचा मे खुजली व लालिमा पैदा होना।
  • नरम नाखून।


हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण

  • शुष्क त्वचा, भंगुर नाखून।
  • वजन बढ़ना, थकान, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन।
  • फूला हुआ चेहरा।
  • ठंड असहिष्णुता।
  • संयुक्त और मांसपेशियों में दर्द।
  • कब्ज।
  • भौंहों के बालों का झड़ना।
  • पसीने की कमी।
  • भारी या अनियमित माहवारी और बिगड़ा प्रजनन।
  • हृदय गति कम होना।

 

हाइपोथायरायडिज्म के कारण

  • दवाएं जैसे लिथियम कार्बोनेट।
  • आनुवंशिक कारण।
  • शरीर में आयोडीन का कम स्तर।
  • पिट्यूटरी ग्रंथि और ह्य्पोथालमस में गड़बड़ी।
  • वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण।

hyperthyroidism in hindi

हाइपरथाइराइडिज्म के कारण

  • ग्रेव्स रोग हाइपरथाइराइडिज्म की बड़ी वजह है। इसमें थायरॉयड ग्रंथि से थायरॉयड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है।
  • विनाइन (नॉनकैन्सरस) थाइराइड ट्यूमर, जो कि अनियंत्रित ढंग से थाइराइड हार्मोन की बढ़ी हुई मात्रा को निकालता है।
  • विषाक्त मल्टीनोडूलर गण्डमाला (गोईटर), ऐसी अवस्था जिसके कारण थायरायड ग्रंथि, कई विनाइन (नॉनकैन्सरस) थायरायड ट्यूमर की वजह से बड़ी हो जाती है और थायरायड हार्मोन के स्राव की मात्रा को बढ़ा देती है।

 

सारांश:

  1. हाइपरथाइराइडिज्म में थायराइड हार्मोन के स्तर में वृद्धि होती है जबकि हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन के स्तर में कमी होती है।
  2. हाइपरथाइराइडिज्म थाइरोटॉक्सिकॉसिस और ग्रेव्स रोग हो सकता है। जबकि हाइपोथायरायडिज्म इन बीमारियों का उत्पादन नहीं करता है।
  3. हाइपरथाइराइडिज्म में तेजी से चयापचय होता है, जबकि हाइपोथायरायडिज्म में चयापचय की गति धीमी हो जाती है।
  4. हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन की खुराक द्वारा इलाज किया जाता है, जबकि हाइपरथाइराइडिज्म में विरोधी थायराइड दवाओं के द्वारा इलाज किया जाता है।
  5. हाइपोथायरायडिज्म का पता T3 और T4 के स्तर में कमी और TSH के स्तर में वृद्धि से चलता है, जबकि हाइपरथाइराइडिज्म का पता T3 और T4 के स्तर में वृद्धि और TSH के स्तर में कमी से चलता है।

 

Image Source : Getty

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