टखने में मोच का पूर्वानुमान व निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 21, 2013
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Quick Bites

  • किसी भी उम्र में आ सकती है टखने में चोट।
  • 15 से 24 वर्ष के पुरुषों में अधिक होता है खतरा।
  • निदान के लिए डॉक्‍टर करवा सकता है एक्‍स-रे।
  • बेहतर होगा कि नीम-हकीम के पास जाकर न करवायें इलाज।

टखने में दर्द का बड़ा कारण चोट होती है। और इस चोट को अक्‍सर खिलाड़ि‍यों के साथ जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि उन्‍हें चोट लगने का खतरा अधिक होता है। लेकिन, यह पूरा सच नहीं है। आपकी एड़ियों में चोट लगे इसके लिए जरूरी नहीं है कि आपका एथलीट या योद्धा होना जरूरी नहीं। एक सामान्‍य व्‍यक्ति को भी टखने में चोट लगने का उतना ही खतरा होता है। किसी असमान धरातल पर चलते समय पैर मुड़ अथवा फिसल जाना टखने में चोट का कारण हो सकता है। इससे काफी दर्द हो सकता है और ऐसे में आपको डॉक्‍टर के पास जाना चाहिए।

injury in ankleटखने में चोट किसी भी व्‍यक्ति को किसी भी उम्र में लग सकती है। हालांकि 15 से 24 वर्ष की आयु के पुरुषों को टखने में मोच आने का खतरा अधिक होता है। वहीं तीस वर्ष की ऊपर की आयु में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले टखने में चोट लगने का खतरा अधिक होता है। टखने में चोट अथवा मोच आने के आधे से अधिक मामले एथलीट एक्टिविटी के दौरान आते हैं। अकेले अमेरिका की बात करें तो रोजाना करीब 25 हजार लोगों को टखने में मोच अथवा चोट आते हैं। और हर वर्ष दस लाख से अधिक लोग टखने की चोट के कारण अस्‍पताल के आपातकालीन कमरों में जाते हैं। मोच और फ्रेक्‍चर टखने में चोट लगने के सबसे सामान्‍य प्रकार हैं। इसमें अस्थिबंध, हड्डियां और टखने प्रभावित होती है।

निदान

टखने की जांच

टखने में चोट का निदान करने के लिए डॉक्‍टर आपसे कुछ सवाल पूछ सकता है। वह आपसे पूछेगा कि आपको चोट कैसे लगी। इसके बाद डॉक्‍टर आपकी टखने का परीक्षण करेगा। इसमें वह इस बात की जांच करेगा कि आखिर आपकी टखने में लगी चोट कितनी गंभीर है और आपको कितनी सूजन आ रखी है। जांच के लिए डॉक्‍टर को आपकी टखने को बार-बार अलग-अलग दिशा में मोड़ेगा। वह ऐसा इसलिए करेगा क्‍योंकि उसके लिए यह जानना जरूरी होता है कि आखिर आपकी टखने में कितना दर्द हो रहा है। ऐसा करना वाकई काफी पीड़ादायक हो सकता है। लेकिन, सही निदान और ईलाज के लिए ऐसा किया जाना बहुत जरूरी होता है।

 

पारिवारिक इतिहास

डॉक्‍टर आपसे यह भी जानने की कोशिश करेगा कि कहीं अापका दर्द दिन के विशिष्ट समय या विशिष्ट गतिविधियों के बाद और भी बढ जाता है। वह आपसे यह भी दर्द क्षेत्र में हाल ही में कोई अन्‍य चोट तो नहीं लगी। डॉक्‍टर के लिए यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि कहीं आपको अथवा आपके परिवार में किसी को मधुमेह अथवा गठिया तो नहीं है।

 

आपके खेल और व्‍यायाम का कार्यक्रम

डॉक्‍टर के लिए आपकी शौकिया खेल गतिविधियां और व्यायाम के कार्यक्रम भी मायने रखते हैं। वह जानना चाहेगा कि कहीं आप किस प्रकार के खेल खेलते हैं अथवा व्‍यायाम करते हैं। डॉक्‍टर के लिए यह जानना भी फायदेमंद होगा कि आखिर आप किस प्रकार के जूते पहनते हैं और उनकी फिटिंग कैसी है।


चाल का मूल्‍यांकन

डॉक्‍टर आपको नंगे पैर खड़े होने और फिर आपको चलने के लिए के लिए कहेगा इससे वह देखेगा कि आपके पैर चलते वक्त कैसे हिलते है ये देखेंगे। डॉक्टर आपके पैर की तुलना करके उनके बीच कोई अंतर के लिए देख सकते हैं। बाद में डाक्टर अपके दर्दनाक पैरो पर नरमी के संकेत, सूजन, धब्बे औऱ मांसपेशियों में कमजोरी,गतिविधि में कमी की जाँच करेंगे।

 

एक्‍स-रे

इसके बाद डॉक्‍टर एक्‍स-रे करने को कह सकता है। एक्‍स-रे से इस बात की पुष्टि हो जाती है कि कहीं कोई हड्डी तो नहीं टूटी है। टखने के एक्‍स-रे के साथ ही आपका डॉक्‍टर टांग और पैर के एक्‍स-रे को भी कह सकता है। ऐसा करके वह इस बात की जांच करना चाहेगा कि कहीं चोट का वहां तक तो नहीं है। अगर डॉक्‍टर को स्‍ट्रेस फेक्‍चर का अंदेशा हो, तो वह एमआरआई जैसी अन्‍य जांच करने को भी कह सकता है। इससे चोट के बारे में और जानकारी मिल जाएगी। अगर आपको फ्रैक्‍चर हो, तो डॉक्‍टर एक स्‍ट्रेस टेस्‍ट कराने को भी कह सकता है। यह एक खास किस्‍म का एक्‍स-रे होता है, जिसमें जोड़ों पर दबाव दिया जाता है। इससे डॉक्‍टर को यह जानने में मदद मिलती है कि कहां सर्जरी की जरूरत है।

 

टखने की अधिकतर चोटों में, दर्द सामान्‍य दवाओं से ही काबू कर लिया जाता है। इसके अलावा आपको किस प्रकार के इलाज की जरूरत है, यह चोट की गम्‍भीरता पर निर्भर करता है।

 

कुछ सड़क किनारे बैठे, 'पहलवानों और नीम-हकीमों' के पास चले जाते हैं। ऐसे लोगों को चोट की गम्‍भीरता का अंदाजा नहीं होता और वे परिस्थिति को और खराब कर सकते हैं। आपको चाहिए कि टखने की चोट में हम अक्‍सर घर पर ही बाम या दवा लगाकर पट्टी बांध लेते हैं, कुछ लोग चोट पर एक तरफ से कच्‍ची रोटी पर सरसों का तेल और हल्‍दी लगाकर उसे टखने पर बांध लेते हैं। हालांकि, कई बार इससे आपको आराम मिलता है, लेकिन दो तीन दिन में अगर आपको आराम न मिले तो किसी विशेषज्ञ डॉक्‍टर से संपर्क करें। और कोशिश करें कि चोट वाले पैर पर अधिक दबाव न डालें।

 

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