डायबिटीज़ रोग में करें योग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 15, 2012
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Yoga in diabetiesडायबिटीज रोग में करें योग


डायबिटीज रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ रही है या यूं कहें कि यह समस्या आम हो गई है। शरीर में जब इंसुलिन हार्मोन की कमी होती है या उसके निर्माण में अनियमितता होती है तब डायबिटीज होता है। वजन में कमी आना, अधिक भूख प्यास लगना, थकान, बार-बार संक्रमण होना, देरी से घाव भरना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट ये सभी डायबिटीज के लक्षण हैं। डायबिटीज के लिए मार्केट में कई दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन इससे डायबिटीज का स्थाई इलाज संभव नहीं है। योग से डायबिटीज ही नहीं कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। डायबिटीज के स्थाई उपचार के लिए योग ही एकमात्र उपाय है। नियमित रूप से योग करने से डायबिटीज से छुटकारा पाया जा सकता है।

डायबिटीज के लिए योग

नियमित रूप से उत्तानपादासन, पवनमुक्तामसन, त्रिकोणासन, धनुरासन, मंडूकासन, पाद-हस्तासन, कपालभा‍ती, अनुलोम-विलोम, प्राणायाम, मुद्रासन तथा ध्यान आदि योग करके मधुमेह से छुटकारा पाया जा सकता है।

सूर्य नमस्कार

डायबिटीज रोगियों के लिए यह योगा सबसे आसान और लाभकारी है। इस योगा को करने से रक्त का संचार शरीर में अच्छे से होता है। इस आसन को एक मिनट में 4 बार आराम-आराम से करना चाहिए।

प्राणायाम

प्राणायाम 8 प्रकार का होता है जिसमें से भ्रामरी और भास्रिका प्राणायाम डायबिटीज के लिए ज्यादा लाभकारी होते हैं। भ्रामरी प्राणायाम करने से मन, मस्तिष्क  और तंत्रिका तंत्र को फायदा होता है। भास्रिका प्राणायाम खून में ऑक्सीजन लेवल को बढाता है और कार्बनडाइआक्साइड के लेवल को कम करता है। ज्यादा तेजी से सांस को अंदर-बाहर करना, गहरी सांस लेना अच्छे से सीखना चाहिए।

मद्रासन

जमीन पर बैठकर दाएं हाथ की हथेली को पहले नाभि पर रखें और बाएं हाथ की हथेली को दाएं हाथ पर रखें। फिर सांस बाहर निकालते हुए आगे झुककर सामने की तरफ देखते हुए ठोढी को जमीन पर टिकाइए। सांस अंदर भरते हुए वापिस आइए। इस क्रिया को करते समय 4-5 बार दोहराएं  करें।


मेडिटेशन

ध्यान करने से तनाव कम होता है, दिमाग शांत और एकाग्रचित्त होता है। मेडिटेशन प्रतिदिन करने से इंसुलिन हार्मोन की अनियमितता ठीक होती है जो कि मधुमेह के रोगी के लिए बहुत जरूरी है।

सर्वांगासना

यह योगा करने से गले के आसपास पाई जाने वाली थॉयराइड और पैराथाइराइड ग्रंथियों ( मोटापा, प्रोटीन और कार्बोहाइडेट मेटाबोलिज्म के लिए उत्तडरदायी ग्रंथियां) का व्यायाम हो जाता है। यह योगा करने से ग्रंथियों में रक्‍तसंचार सुचारु हो जाता है। इस योग को करने के लिए आराम से किसी चटाई पर लेटकर दोनों हाथ फैला लीजिए, फिर धीरे-धीरे दोनों पैरों को उपर कीजिए, फिर हाथों से कमर को पकडकर पूरे शरीर को हवा में कीजिए और शरीर का पूरा भाग गर्दन पर हो जाने दीजिए। अपने पैरों को सीधा रखिए।

पश्चिमोत्सपना

इस आसन को करने के लिए अपने दोनों पैरों को सीधा रखिए, दोनों हाथों को उपर करके सांस बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुककर मुंह से टखनी को छुएं। यह आसन 2-3 बार दोहराइए।
योग के दौरान यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सांस का क्रम क्या है। इसके लिए एक सामान्य सिद्धांत है कि जब हम योग के दौरान आगे की ओर झुकते हैं तब सांस बाहर निकालते हैं और जब पीछे की ओर झुकते हैं तब सांस लेते हैं। कोशिश यह होनी चाहिए की योग किसी टीचर की देखरेख में किया जाए।

Write a Review
Is it Helpful Article?YES33 Votes 15759 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर