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यह तो सभी जानते हैं डायबिटीज बीमारी मीठे जहर की तरह है। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या लगभग 5.08 करोड़ है। इतना ही नहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आने वाले 20 सालों में डायबिटीज रोगियों की संख्या 8.7 करोड़ होने का अनुमान है। क्या आप जानते हैं पूरे विश्व में लगभग 23 करोड़ लोग डायबिटीज बीमारी से पीडि़त है। इतना ही नहीं लगभग 85 फीसदी डायबिटीज रोगी व्यस्त ही होते हैं। जबकि 5 फीसदी बच्चे भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। एक अध्ययन की मानें तो महानगरों और शहरी इलाकों में डायबिटीज 2.3 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
आपको मालूम होना चाहिए कि दुनियाभर में भारत में सबसे अधिक डायबिटीज के मरीज है। ये अनुमान इस बात से लगाया गया कि सन 2000 में हुए एक रिसर्च में दुनियाभर में लगभग 17 करोड़ डायबिटीज के मरीज थे जिनमें से अकेले भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या लगभग 3 करोड़ आंकी गई जो कि उस समय में सबसे अधिक थी। इतना ही नहीं, कई शोधों में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले तीस सालों में भी भारत में ही डायबिटीज के सबसे अधिक मरीज रहेंगे। तमाम शोधों और रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, सन2030 में दुनियाभर में लगभग 36 करोड़ डायबिटीज मरीज होने की आशंका हैं जिनमें से केवल भारत के ही डायबिटीज मरीज लगभग 8 करोड़ होने की आशंका जताई जा रही है। इन आंकड़ों के मुताबिक ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि डायबिटीज के मरीजों का ये आंकड़ा 2030 तक भी भारत में सबसे अधिक होगा। यानी भारत एकमात्र अकेला ऐसा देश है जहां और देशों के मुकाबले सबसे अधिक डायबिटीज के मरीज है और आने वाले कई सालों तक भारत में ही सबसे अधिक डायबिटीज मरीजों के होने की आशंका है।
हालांकि वर्तमान के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या चीन से डेढ़ गुना अधिक, संयुक्त राज्य अमेरिका से 2 गुना अधिक और इंडोनेशिया जैसे देशों से 4 गुना अधिक है। इतना ही नहीं आने वाले 2030 तक भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या इन देशों के मुकाबले 2.5 गुना अधिक बढ़ जाएगी। यानी 2030 तक भारत इन देशों के डायबिटीज के मरीजों की संख्या से बहुत आगे निकल जाएगा जो कि भारत के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं।
दरअसल, डायबिटीज के दोनों प्रकार टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज बच्चों से लेकर महिलाओं, युवाओं और व्यस्कों को खासा प्रभावित कर रहे हैं। इसका एकमात्र कारण है लोगों का आधुनिक लाइफ स्टाइल और दौड़ती-भागती जिंदगी। लोग अपनी परवाह किए बगैर यानी अपने प्रति लापरवाही बरतकर लगातार आधुनिक लाइफ स्टाइल से सराबोर होते जा रहे हैं जिससे इसका नकारात्मक असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नतीजन लोग डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने अपनी जीवनशैली से व्यायाम, एक्सरसाइज, सैर इत्यादि को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया है जो कि डायबिटीज का महत्वपूर्ण कारक है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब वैज्ञानिकों और शोधकर्तोंओं के सभी अनुमान सच हो जाएंगे और भारत सबसे अधिक डायबिटीज के मरीजों का देश बन जाएगा।

