प्रसव के दौरान दर्द से राहत पाने के उपाय

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 27, 2011
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Quick Bites

  • दर्द से राहत पाने के लिए सकारात्‍मक सोच है बेहद जरूरी।
  • दर्द इस बात का संकेत है कि प्रसव का समय करीब है।
  • मालिश भी दर्द से राहत दिलाने में करती है मदद।
  • टहलना भी आपके लिए हो सकता है काफी लाभकारी।

किसी नये जीवन को इस दुनिया में लाना कोई आसान काम नहीं। प्रसव के दौरान महिला को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ सकता है। यह दर्द इस बात का संकेत होता है बच्‍चे का जन्‍म किसी भी समय हो सकता है। हालांकि यह दर्द बेहद तकलीफदेह होता है, लेकिन फिर भी इससे राहत पाने के लिए कुछ काम किये जा सकते हैं।

prasav ke dauran dard se rahat

प्रसव में दर्द होना स्वाभाविक है। लेकिन, इसे दूर करने के लिए आपको डॉक्‍टर की सलाह के बिना कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। प्रसव का दर्द आमतौर पर केवल 5 मिनट में एक बार होता है। प्रसव के समय होने वाला दर्द प्रसव का संकेत होता है। प्रसव के खिंचाव को झेलने के लिए महिला को बच्चेदानी की मांसपेशियों को ढीला छोड़ देना चाहिए। दरअसल, दर्द के समय बच्चेदानी की मांसपेशियों को दबाकर रखने से प्रसव में रुकावट आती है। आइए जानें कैसे प्रसव के दौरान दर्द से राहत मिल सकती है।

 

  • महिलाओं को प्रसव के दौरान होने वाले दर्द से भयभीत नहीं होना चाहिए। हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक बनाये रखें।
  • प्रसव का दर्द जितना अधिक होगा प्रसव का समय उतनी ही नज़दीक आएगा और मां को दर्द से निजात मिलेगी।
  • यदि गर्भाशय की मांसपेशियां सही तरह से काम नहीं करती तो प्रसव के समय अधिक दर्द तथा रक्तस्राव होता है।
  • यदि महिला प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को सहजता से ले तो इसके कारण बच्चे का जन्म शीघ्र व आसानी से हो जाता है।

 

 

  • प्रसव के दर्द से भयभीत महिलाओं के शरीर में हो सकती है ऑक्‍सीजन की कमी। जिससे प्रसव के लिए ऑपरेशन की नौबत आ जाती है।
  • प्रसव के दौरान दर्द से राहत पाने के लिए प्रसव से पूर्व मां का हल्‍के कदमों से टहलना लाभकारी होता है।
  • प्रसव का दर्द शुरू हो या जब दर्द बन्द हो जाए तो पेट के नीचे के भाग को हाथों से पकड़कर दबाना चाहिए।
  • प्रसव के समय महिलाएं दीवार के सहारे खड़ी हो सकती हैं।

 

 

  • दर्द से बचने के लिए दीवार के पास खड़ी होकर हाथों को सीधा करना चाहिए।
  • कुर्सी पर महिलाएं घुटने को मोड़कर बैठ सकती हैं या फिर कुर्सी पर टांगों को चौड़ा करके बैठे तथा नीचे के शरीर को ढीला छोड़ देना चाहिए।
  • घूमने के दौरान यदि थकान होने लगे तो व्रजासन में बैठना आपके लिए होता है फायदेमंद।
  • महिलाओं को प्रसव के दर्द से बचने के लिए हमेशा अपने नीचे का भाग ढीला रखना चाहिए और मांसपेशियों में किसी भी प्रकार का तनाव होना चाहिए।

 

 

  • प्रसव के समय लम्बी सांस लेना चाहिए, सांस को कुछ देर रोककर छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से प्रसव सरलतापूर्वक हो जाता है।
  • प्रसव के समय महिलाओं को हल्के हाथ से अपने पेट को नीचे की ओर दबाना चाहिए तथा नाभि के पास ले जाकर उसे समाप्त करना चाहिए।
  • प्रसव के समय बीच -बीच में पैरों और टांगों की भी मालिश करनी चाहिए। मालिश के समय सबसे पहले टखनों से घुटनों तक की मालिश करनी चाहिए यदि जांघों में दर्द हो तो ऊपर भी मालिश करनी चाहिए।
  • बच्चे के जन्म के समय महिलाओं के कमर में अधिक दर्द होता है। सिर के नीचे और दोनों पैरों के नीचे तकिया रखना चाहिए तथा कमर की मालिश करवानी चाहिए। मालिश करते समय कमर को दबाना चाहिए।

स्‍त्री को इसलिए सृजक कहा जाता है क्‍योंकि वह स्‍वयं असहनीय पीड़ा को सहन कर एक नवजीवन को इस संसार में लेकर आती है। लेकिन, फिर भी ये कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्‍हें अपनाकर इस दर्द को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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