लैपटॉप, स्‍मार्टफोन बना सकते हैं बीमार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 12, 2013
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कारपल टनल सिंड्रोम से कलाई में दर्द

स्‍मार्ट फोन और लेपटॉप महानगरीय जीवनशैली का अहम हिस्‍सा बन चुके हैं। दिन भर में कितनी ही देर हम इस पर उंगलियां दौड़ाते रहते हैं। लेकिन, सेहत के लिहाज से ऐसा करना बिलकुल भी ठीक नहीं। यह आदत आपको 'कारपल टनल सिंड्रोम' का शिकार बना सकती है। इसमें कलाई में दर्द और बीच की उंगली में संवेदना न होना, जैसी पर‍ेशानियां आती हैं।

दिल्‍ली के मौलाना आजाद कॉलेज के कम्‍यूनिटी मेडिसन विभाग द्वारा किए गये एक अध्‍ययन में यह बात निकलकर सामने आयी है इस अध्‍ययन से पता चला है कि 30 फीसदी युवा मोबाइल और लेपटॉप का सही तरीके से इस्‍तेमाल करना नहीं जानते। इसी के चलते मांपेशियों और स्‍नायु सम्‍बन्‍धी बीमारियां उन्‍हें घेर लेती हैं। दिल्‍ली और एनसीआर के करीब एक हजार युवाओं पर अध्‍ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला गया है। इनमें से 89 फीसदी रोजाना पांच से सात घंटे मोबाइल-लेपटॉप पर बिताते हैं। कुछ ही हथेली से कोहनी तक दर्द र‍हता है, तो कुछ को उंगलियों से सामान उठाने में दिक्‍कत आती है। कलाई अकड़ने और हाथ की गतिविधि पर असर पड़ने पर डॉक्‍टरी सर्जरी की सलाह देते हैं।

जानकार मानते हैं कि इसके पीछे ऑफिस में हमारे बैठने का तरीका भी काफी हद तक उत्तरदायी होता है। सही प्रकार से नहीं बैठने का असर हमारी कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। और साथ ही मांसपेशियों और स्‍नायु सम्‍बन्‍धी कई परेशानियां भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्‍सा बनती जा रही हैं।

यह समस्‍या और इसलिए बढ़ जाती है क्‍योंकि अधिकतर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। और इसे सामान्‍य दर्द मानकर ही रहने लगते हैं। एक अनुमान के अनुसार अमेरिका में लगभग 10 मिलियन यानी एक करोड़ लोग स्‍नायु सम्‍बन्‍धी इस परेशानी का शिकार हैं।


रोग के लक्षण


आमतौर यह बीमारी पचास की उम्र के बाद परिलक्षित होती है, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से 20 से 40 साल के लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

यह समस्या एक साथ दोनों हाथों में भी हो सकती है। इस रोग की सबसे खास बात यह है कि सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। इस रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को हाथ में सूजन महसूस हो सकती है और हथेली से लेकर कुहनी तक दर्द भी हो सकता है। रात में या जब हाथ गर्म हो दर्द या सुन्नपन बढ़ जाता है। पीड़ित अपने हाथ में कमजोरी महसूस करने लगता है। व्‍यक्ति चीजों को आसानी से पकड़पाने में असमर्थ रहता है। चीजें उसके हाथ से छूटने लगती हैं। उसके लिए किसी चीज को उठा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। कुछ महिलाएं हर्मोंस में बदलाव की वजह से इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।

क्या है उपचार

अपने शरीर को लेकर विशेष सावधानी बरतें। उंगलियों को बीच-बीच में आराम देते रहिये। कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए जरूरी है कि वे अपनी कमर, बाजुओं और पैरों को ऐसी स्थिति में रखें कि कलाई और उंगलियों में कम से कम दबाव पड़े। नेचरल अगरेनामिक कीबोर्ड का इस्तेमाल भी फायदेमंद हो सकता है।

हाथों में थकान होने पर बैठकर गहरी सांस लेने, संगीत सुनने, ध्यान या प्रार्थना से भी लाभ मिलता है। इस समस्या से बचने के लिए लंबे समय तक कलाई को व्यस्त रखें और थोड़ी-थोड़ी में हाथों को आराम देते रहें। कंप्यूटर पर काम करते वक्त की-बोर्ड कोहनी की ऊंचाई से ऊपर न रखें।

लंबे समय तक बैठने पर कमर को सीधा रखने की कोशिश करें। कलाई, कमर व गर्दन का व्यायाम रोजाना करें। रोज रात को सोने से पहले उंगलियों पर देसी घी लगाकर मालिश करने से भी लाभ मिलता है।


इलाज का नया तरीका

दिल्‍ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्व‍िज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) ने कारपल टनल सिंड्रोम का नया इलाज शुरू किया है। इस इलाज के जरिये महज 15 मिनट में इससे राहत मिल सकती है। एक विशेष 'ड्रग एल्‍यूटेड पैच' कलाई पर बांधने से लोगों को राहत मिलती है। इसमें दो हजार रुपये का खर्च आता है।

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