हर समय खुद के बारे में सोचना और बुदबुदाना हो सकती है मानसिक बीमारी, ऐसे करें बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 23, 2018
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Quick Bites

  • कुछ लोगों को ज्यादा सोचने की आदत होती है।
  • कुछ लोग अकेले में खुद से बातें करने लगते हैं या बुदबुदाते रहते हैं।
  • डिप्रेशन या अवसाद की स्थिति की शुरुआत इसी तरह के लक्षणों से होती है।

जीवन में सफलता का मूलमंत्र है आत्मनिरीक्षण यानि खुद के बारे में सोचना और अपनी कमियों को ठीक करना। मगर क्या आपको पता है कि खुद के बारे में ज्यादा सोचना भी एक तरह की मानसिक बीमारी है और इसकी वजह से आपकी सेहत पर भी असर पड़ सकता है। कुछ लोगों को ज्यादा सोचने की आदत होती है। इनमें से कुछ ऐसे लोग होते हैं जो खुद के बारे में ही सोचते रहते हैं। खुद के बारे में सोचना अच्छी बात है मगर जरूरत से ज्यादा सोचना गलत है। जब आप अपने बारे में ज्यादा सोचते हैं तो आपके अंदर अपने काम के प्रति और जीवन के प्रति नकारात्मकता बढ़ जाती है।

आत्मनिरीक्षण का नाम मत दीजिए

कुछ लोग खुद के बारे में ज्यादा सोचने को आत्मनिरीक्षण कह सकते हैं। मगर आत्मनिरीक्षण और ज्यादा सोचने में थोड़ा अंतर है। जब आप आत्मनिरीक्षण करते हैं तो अपने किए गए काम के परिणाम के बारे में सोचते हैं या फिर उस काम में रह गई कमी के बारे में सोचते हैं। आत्मनिरीक्षण का परिणाम सकारात्मक हो सकता है या कुछ भी नहीं होता है। जबकि जब आप जरूरत से ज्यादा आत्मनिरीक्षण करते हैं और बिना वजह सोचते हैं तो ये एक मानसिक बीमारी के कारण होता है और इसके परिणाम नकारात्मक होते हैं। देखा जाता है कि जिन लोगों को खुद के बारे में ज्यादा सोचने की बीमारी होती है वो अकेले में खुद से बातें करने लगते हैं या बुदबुदाते रहते हैं। कई बार सड़क पर चलते हुए, कोई काम करते हुए या बैठे-बैठे जब आप बुदबुदाते हैं और दूसरे लोग इसे देख लेते हैं, तो आपको शर्मिन्दगी का सामना भी करना पड़ता है।

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सामान्य नहीं है ये आदत

हम सब अपने आप से दिनभर कुछ न कुछ बातें करते हैं। ये तब तक सामान्य कहा जा सकता है जब आप संबंधित काम को वाकई कर रहे हों या वैसी स्थिति में हों जैसे आपके शब्द बता रहे हैं, जैसे- गाड़ी की चाभियां कहां हैं, कहीं मैं गलत रास्ते पर तो नहीं बढ़ रहा, पिंक कलर दीवार पर नहीं अच्छा लग रहा आदि। । इन्हें असामान्य तब कहा जाएगा जब आप बिना वजह ही नकारात्मक बातें सोच रहे हों, जैसे- ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है, मैं सबको बुरा क्यों लगता हूं, मेरा लुक इतना बुरा क्यों है आदि।

डिप्रेशन हो सकता है कारण

डिप्रेशन या अवसाद की स्थिति की शुरुआत इसी तरह के लक्षणों से होती है। जीवन के प्रति निराशा का भाव, खुद को कमजोर और हारा हुआ मानना, हमेशा महसूस होना कि आपके साथ ही गलत हो रहा है या किसी परीक्षा के परिणाम को लेकर चिंतित होना आदि ऐसी स्थितियां हैं, जिनके कारण व्यक्ति को अवसाद हो सकता है। अवसाद की स्थिति में व्यक्ति को सिर दर्द, उलझन, बेचैनी आदि भी हो सकती है।

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सोच का कोई अंत नहीं है

ज्‍यादा सोचना नशे की लत की तरह होता है। दरअसल सोच का कोई अंत नहीं है और न ही शुरुआत है। आप अगर थोड़ा ध्यान दें तो आपको पता चलेगा कि बात से बात निकलती जाती है और आप सोचते जाते हैं, जबकि कई बार उन बातों का आपस में कोई रिश्ता नहीं होता है। आप किसी बात पर क्या सोचते हुए पहुंचे थे ये याद कर पाना आपके लिए मुश्किल होगा। आमतौर पर जब आप अपने बारे में कुछ नकारात्मक सोच रहे होते हैं, तो इसके चार स्टेज होते हैं। पहले अपनी जिंदगी की किसी एक घटना को आप याद करते हैं फिर उससे जुड़ी किसी स्थिति की कल्पना करते हैं, फिर उसमें समस्याएं की कल्पना करते हैं और फिर खुद ही घबराकर अवसाद से घिर जाते हैं। ये प्रक्रिया चलती रहती है और आपका अवसाद यानि डिप्रेशन गहराता रहता है। इसलिए अपने मस्तिष्‍क को बहुत ज्‍यादा भटकाव से रोकें।

कैसे बचें इस स्थिति से

इस स्थिति से बचने के लिए आपको अपनी आदतों में कुछ सुधार करना पड़ेगा। ये परेशानी ज्यादातर उन लोगों के साथ आती है जो ज्यादातर समय अकेले रहते हैं। इसलिए अगर आपको भी इनमें से कोई लक्षण नजर आते हैं, तो सबसे पहले अपना अकेलापन दूर करें। इसके लिेए दोस्तों, परिवार, रिश्तेदारों या पड़ोसियों से बात करना शुरू करें। अगर आपके आसपास ऐसे लोग नहीं है जिनसे आप बात कर सकें, तो समय गुजारने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप किताबें पढ़ें, फिल्में देखें, गाने सुनें या दोस्तों से चैट करें। ऐसा करने से आपका ध्यान ज्यादा भटकेगा नहीं और आप धीरे-धीरे ऐसी स्थिति से बाहर आ जाएंगे।

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