पुरानी कब्ज बन सकती है इस रोग का कारण!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 06, 2017
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Quick Bites

  • आजकल लोगों में कब्ज की समस्या आम बात हो गई है।
  • एक स्थिति के बाद कब्ज डिप्रेशन का रूप ले लेती है।
  • कब्ज की बीमारी को गंभीरता से लेना चाहिए।

अनियमित खानपान और भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते आजकल हर तीसरा इंसान कब्ज, ब्लोटिंग और गैस जैसी समास्याओं से घिरा हुआ है। ये सभी पेट से जुड़ी समस्याएं। हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पेट संबंधी एक बार कोई रोग होने पर वह आसानी से सही नहीं होता है। जिस व्यक्ति को पेट संबंधी कोई भी पेरशानी है वह व्यक्ति स्वस्थ नहीं है। अपने पेट और और पूरे स्वास्थ्य को सही रखने का सबसे सीधा और सरल रास्ता हमारा अच्छा खानपान और लाइफस्टाइल है। अगर कोई इंसान अपनी डाइट को हेल्दी और संतुलित रखता है तो उस व्यक्ति के 99 प्रतिशत चांस बीमार होने के नहीं रहते हैं। कब्ज जैसी पेट से जुड़ी बीमारी से घिरा व्यक्ति हमेशा मुर्झाया हुआ रहता है। ऐसे व्यक्ति के चेहरे से ग्लो और रौनक पूरी तरह से गायब हो जाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि पुरानी कब्ज किस तरह से डिप्रेशन का कारण बन सकती है।


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शायद आपको इस बात पर यकीन ना आए कि सिर्फ 2 साल पुरानी कब्ज कैसे डिप्रेशन का कारण बन सकती है। लेकिन इस बात के पीछे डॉक्टरों और विशेषज्ञों के गहरे तर्क है। किसी भी व्यक्ति को डिप्रेशन उस स्थिति में होता है जब उसने ना चाहते हुए भी किसी चीज की उम्मीद छोड़ दी हो, दिमाग में लगातार किसी बात को लेकर उतार-चढ़ाव चल रहा हो, चिंता, अकेलापन, आत्मविश्वास की कमी और किसी करीबी व्यक्ति से धोखा मिलना। ये कुछ ऐसे कारण हैं जिनसे लगभग 80 प्रतिशत लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं। कब्ज एक ऐसी बीमारी है जिसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति डिप्रेशन के इन सभी लक्षणों से घिर जाता है। आप अपने आसपास भी देख सकते हैं कि पेट की किसी भी समस्या या कब्ज से पीड़ित व्यक्ति समाज से कटना, किसी बात में मन ना लगना, अकेले वक्त बिताना, भूख ना लगना और अधिक नींद लेना शुरू कर देते हैं। इसके बाद ऐसी स्थिति आती है जब इंसान पूरी तरह से डिप्रेशन में चला जाता है।

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कब्ज के शुरुआती दौर में हर कोई मामूल समझता है। लेकिन कब्ज 1 साल बाद ही हमारे शरीर में अपनी पैठ जमाने लग जाती है। फिर भी समय रहते अगर किसी ने इसका इलाज नहीं कराया तो ये बीमारी धीरे धीरे हमारे दिमाग को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। जिसके चलते व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट और दिमाग का बहुत गहरा रिश्ता होता है। कई बार आपने ये महसूस किया होगा कि जब हमें बहुत खुशी या दुख की खबर मिलती तो पेट में कुछ हलचल होने लगती है। इसी तरह से पेट की कब्ज भी दिमाग पर गहरा असर डालती है।

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