कंप्‍यूटर से कम करें डिमेशिया का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 06, 2012
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आज कंप्‍यूटर के बिना जीवन की कल्‍पना भी मुश्किल सा लगता है। हमारी जिंदगी में कंप्‍यूटर इस हद तक जरूरी हो चुका है कि उसे मजबूरी कहना भी गलत न होगा। हमारे रोजमर्रा के काम का बोझ कंप्‍यूटर और कंप्‍यूटर आधारित तकनीक ने बहुत आसान बना दिया है। लेकिन, गाहे-बगाहे कंप्‍यूटर के जरिए आम आदमी की सेहत पर पड़ने वाले नकरात्‍मक असर पर भी सवाल उठते रहते हैं। लेकिन आस्‍ट्रेलियाई शोधकर्ताओं का नया शोध बताता है कि कंप्‍यूटर से सेहत को कई फायदे भी होते है़।

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शोधकर्ताओं की मानें तो कंप्‍यूटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उम्र के साथ बढ़ने वाली भूलने की बीमारी या डिमेंशिया के खतरे को कम करता है। यहां तक कि कंप्‍यूटर से डिमेंशिया का खतरा चालीस फीसदी तक कम हो जाता है। हाल के दिनों में डिमेशिया और अल्‍जाइमर्स जैसी बीमारियां आम समस्‍या बनती जा रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्‍टर्न आस्‍ट्रेलिया की प्रोफेसर और सह शोधकर्ता ओस्‍वालेडो अलमीडा के मुताबिक दुनिया की आबादी की औसत उम्र में इजाफे के साथ ही डिमेंशिया जैसी समस्‍या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2025 तक पांच करोड़ लोगों के डिमेंशिया का शिकार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, कंप्‍यूटर के इस्‍तेमाल से इन आंकड़ों में कमी की जा सकती है।

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लोगों का नाम, उनसे मुलाकात का समय, यहां तक की अपनी चीजें भूल जाने आदि को डिमेंशिया का शुरुआती लक्षण माना जाता है। डिमेंशिया का शिकार होने वाले लोग वाहन चलाना और अपना बजट बनाना भी भूलने लगते है। मूड बदलना, गुस्‍सा आना, हमेशा संशकित और विभ्रम में रहना इसके अन्‍य संकेत है। अलमीडा के मुताबिक पहले हुए शोध बताते है कि संज्ञान बढ़ाने वाली क्रियाओं में कमी के चलते डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन, इस संबंध्‍ा में कंप्‍यूटर की पड़ताल कभी नही की गई।

[इसे भी पढ़े : स्वास्थ्य समाचार]

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