कॉफी से प्रोस्‍टेट कैंसर का खतरा 20 फीसदी कम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 03, 2013
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coffee se prostate cancer ka khatra bees fisadi kamकॉफी पीने से पुरुषों में प्रोस्‍टेट कैंसर का खतरा 20 फीसदी तक कम हो जाता है। लेकिन, ऐसा तभी होता है जब वे रोजाना छह कप कॉफी ही पिएं। लेकिन इसे कॉफी सम्‍बन्‍धी विरोधाभासी खबरों की श्रृंखला की नवीनतम कड़ी माना जा रहा है।

ब्रिटिश अखबार, डेली मेल में छपी नई रिसर्च में पता चला है कि अधिक कॉफी पीने वालों को ट्यूमर होने का खतरा उन लोगों के मुकाबले काफी कम होता है,
जो लोग या तो कॉफी पीते ही नहीं या बहुत कम कॉफी का सेवन करते हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि कॉफी, प्रोस्‍टेट कैंसर जैसे धीमे बढ़ने वाले कैंसर के लिए तो असरदार है, लेकिन तेजी से बढ़ने वाले अन्‍य कैंसर के प्रकारों पर यह कम प्रभावकारी होती है।

यह रिसर्च 'एनल ऑफ ऑनकॉलोजी' में प्रकाशित हुई है। इसे विज्ञान की विरोधाभासी खबरों की श्रृंखला की नवीनतम कड़ी माना जा रहा है।

इस साल की शुरुआत में हालैंड के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में दावा किया था कि कॉफी का कैंसर पर कोई असर नहीं होता। हालांकि अपनी रिपोर्ट में उन्‍होंने यह बात जरूर कही थी कि चाय पीने से इस बीमारी का खतरा एक तिहाई तक घट जाता है।

लेकिन, उससे पहले साल 2011 में अमेरिका में हुई एक स्‍टडी में भी ट्यूमर को रोकने में कॉफी की सकारात्‍मक भूमिका के बारे में चर्चा की गई थी।

ब्रिटेन में हर साल प्रोस्‍टेट कैंसर के 40 हजार मरीजों का इलाज किया जाता है और 10 हजार लोग मौत का ग्रास बनते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो हर घंटे में एक से अधिक लोग अकेले यूके में प्रोस्‍टेट कैंसर की वजह से अपनी जान गंवाते हैं।

उम्र के साथ-साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है। 50 वर्ष की आयु के ऊपर के लोगों को ट्यूमर होने की आशंका अधिक रहती है। इस बीमारी के पीछे अनुवांशिक कारणों का गहरा संबंध होता है।

कैंसर के अन्‍य प्रकारों की ही तरह आहार इस कैंसर के प्रभाव को बढ़ाने अथवा कम करने का एक अहम हिस्‍सा होता है। वैज्ञानिकों के लिए किसी विशिष्‍ट आहार/पेय का कैंसर पर पड़ने वाले प्रभाव को आंकना आसान नहीं, क्‍योंकि हर आहार के प्रभाव का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

ब्रिटिश कॉफी एसोसिएशन के अनुसार, यूके में रोजाना तकरीबन 70 मिलियन (सात करोड़) कप कॉफी पी जाती है।

स्‍वीडन के स्टॉकहोम स्थित कारोलिंस्‍का इंस्‍टीट्यूट के विशेषज्ञों ने 45 से 79 वर्ष के करीब 45 हजार पुरुषों पर 12 साल तक अध्‍ययन किया। इसमें उन्‍होंने जांचा कि कैसे उनमें प्रोस्‍टेट कैंसर के लक्षणों का इजाफा हुआ अथवा नहीं।

इस रिसर्च में उनके खाने-पीने की आदतों, जिसमें कॉफी का सेवन भी शामिल है, का अध्‍ययन किया गया। इसमें पाया गया कि जिन पुरुषों ने रोजाना छह कप या उससे अधिक कॉफी का सेवन किया था, उनमें प्रोस्‍टेट कैंसर होने के कम लक्षण पाए गए।

जिन लोगों ने रोजाना चार से पांच कप कॉफी का सेवन किया उनमें यह बीमारी होने का खतरा सात प्रतिशत कम पाया गया। गौरतबल यह है कि चार से कम कप कॉफी पीने का कोई फायदा सामने नहीं आया।

रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि मोटापे और अधिक वजन के शिकार पुरुषों में यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। हालांकि इस रिपोर्ट में इसके कारण नहीं बताए गए हैं। लेकिन एक थ्‍योरी यह है कि शायद कॉफी से शरीर में एडिपोनिक्‍सटिन नाम के एक प्रोटीन का स्‍तर बढ़ जाता है। इस प्रोटीन में कैंसर-रोधी गुण पाए जाते हैं, जो इसके जीवाणु को फैलने से रोकते हैं।

मोटे लोगों में यह प्रोटीन कम मात्रा में पाया जाता है। अपनी रिसर्च में जानकार यह भी कहते हैं, 'कॉफी के कारण एडिपोनिक्‍टिन का बढ़ा स्‍तर  मोटे और अधिक वजन वाले लोगों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है।'

हालांकि इस रिसर्च में भी इस बात के पुख्‍ता सबूत नहीं हैं कि कॉफी पीने से प्रोस्‍टेट कैंसर के खतरे को कैसे कम किया जा सकता है।

 

 

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